टूटती उम्मीद, 13 साल का दर्द, आर्थिक तंगी… कैसे टूटता गया हरीश का परिवार?

Last Updated:March 17, 2026, 13:32 IST

Harish Rana News: हरीश के पिता के दोस्तों का कहना है कि हरीश की सेवा उनके माता-पिता 24 घंटे करते थे. हरीश के पिता अशोक जब भी मिले मुस्कुराते मिले, कभी अपने दर्द को झलकने नहीं दिया. हरीश का परिवार मानसिक रूप से तो टूट चुका था. घर में आर्थिक रूप से भी परेशानियां थीं. दिल्ली का मकान भी बेचना पड़ा था.

सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद एम्स में हरीश की निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू है.

गाजियाबादः हरीश राणा के इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सोशल मीडिया पर हरीश राणा के कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जो भावुक कर देने वाले हैं. इन दिनों सोशल मीडिया पर हरीश राणा की चर्चा खूब हो रही है. ऐसे में उनके घर पर कैसा माहौल है, उनके आसपास के लोगों का क्या कहना है, इसको जानने के लिए हमारी संवाददाता रचना पांडेय गाजियाबाद के राज नगर में स्थित राज अंपायर पहुंचीं, जहां उन्होंने हरीश के पिता के दोस्तों से भी बातचीत की.

बेचना पड़ा था दिल्ली का मकान
हरीश के पिता के दोस्तों का कहना है कि हरीश की सेवा उनके माता-पिता 24 घंटे करते थे. हरीश के पिता अशोक जब भी मिले मुस्कुराते मिले, कभी अपने दर्द को झलकने नहीं दिया. हरीश का परिवार मानसिक रूप से तो टूट चुका था. घर में आर्थिक रूप से भी परेशानियां थीं. दिल्ली का मकान भी बेचना पड़ा था. मां निर्मला को चिंता सताती थी की उनके चले जाने के बाद हरीश का क्या होगा. हरीश पिता के दोस्तों ने बताया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया तो परिवार और भी भावुक हो गया था.

‘हर एक दिन बोझ जैसा है’
13 साल का दर्द, एक परिवार की टूटती उम्मीदें. हरीश राणा का मामला अब सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक दर्दनाक हकीकत बन चुका है. ये वही घर है, जहां पिछले कई सालों से एक लंबी जंग जारी थी, दर्द के खिलाफ, हालात के खिलाफ. परिवार की आंखों में थकान साफ दिखती है. आसपास के लोग पड़ोसियों और हरीश के पिता अशोक राणा के दोस्तों के मुताबिक कभी हंसता-खेलता ये घर अब खामोश हो चुका है. हर दिन जैसे एक बोझ बन गया. हरीश के पिता के दोस्त एमपी शर्मा ने बताया पिछले कई सालों से राज एक्सटेंशन की सोसाइटी में हरीश का परिवार साथ रहता था.

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मां को सताता था हरीश का डर
इसके अलावा उन्होंने बताया कि हरीश का परिवार पहले बहुत खुश रहता था. लेकिन अब हालात बहुत बदल गए हैं. पूरा परिवार परेशान है. उन्होंने बताया की इच्छा मृत्यु की स्वीकृति के बाद हरीश के पिता और परिवार के लोग और भी ज्यादा दुखी और भावुक नजर आए. क्योंकि जब हरीश की मां निर्मला से बात होती थी, तो उनको यही चिंता थी कि आज मैं दुनिया में हूं लेकिन जब कल हम चले जाएंगे तो हरीश का क्या होगा और शायद यही चिंता थी की इच्छा मृत्यु की अर्जी लगाने के लिए परिवार को यह कदम उठाना पड़ा.

पूरा परिवार 24 घंटे सेवा में लगा हुआ था
हरीश के पड़ोसियों ने बताया कि हरीश के माता-पिता 24 घंटे उसकी सेवा में लगे रहते थे. पूरा परिवार सेवा में रहता था. यहां तक की आर्थिक तंगी के चलते उसके पिता को अपना दिल्ली का मकान भी बेचना पड़ा. एक मित्र ने बताया कि 13 साल जिस तरीके से हरीश के माता-पिता ने अपने बेटे की सेवा की है, अगर इसको उल्टा कर दिया जाए तो आज कलयुग में कोई बेटा 13 साल अपने मां-बाप की इस तरीके से सेवा नहीं कर सकता, जैसे कि अशोक राणा और निर्मला राणा ने अपने बेटे हरीश की की है.

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Prashant Rai

प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें

Location :

Ghaziabad,Uttar Pradesh

First Published :

March 17, 2026, 13:32 IST

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