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सेकेंड हैंड कार खरीदने से पहले सिर्फ इंजन और बॉडी देखकर फैसला लेना भारी पड़ सकता है. कई बार गाड़ियों पर हजारों रुपये के चालान, पुलिस केस या चोरी का रिकॉर्ड निकल आता है. अच्छी बात ये है कि अब आप घर बैठे सिर्फ 1 मिनट में कार की पूरी हिस्ट्री ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. जानिए Parivahan Portal, NCRB और पुलिस ऐप्स के जरिए पुरानी कार खरीदने से पहले कौन-कौन सी जरूरी जांच करनी चाहिए.
Second-Hand Car कार खरीदते समय ये दो काम जरूर करें.
Used Car Buying Tips: पुरानी यानी सेकेंड हैंड कार खरीदना एक फायदे का सौदा हो सकता है, लेकिन जरा सी लापरवाही आपके इस सौदे को भारी नुकसान में बदल सकती है. अक्सर लोग गाड़ी की बॉडी, इंजन और माइलेज को देखकर उसे तुरंत खरीद लेते हैं, लेकिन उसके कानूनी दस्तावेजों और बैकग्राउंड को चेक करना भूल जाते हैं.
सोचिए, आपने चाव से एक कार खरीदी और अगले ही दिन आपके घर हजारों रुपये के पेंडिंग चालान का नोटिस आ जाए या पता चले कि गाड़ी किसी क्रिमिनल केस या एक्सीडेंट में शामिल रही है! ऐसे झंझटों से बचने के लिए कार का सौदा फाइनल करने से पहले सिर्फ 1 मिनट निकालकर उसका ऑनलाइन ‘क्रिमिनल और चालान रिकॉर्ड’ जरूर चेक कर लें. आज डिजिटल दौर में ये बेहद आसान हो गया है. आइए जानते हैं कि चालान की हिस्ट्री कैसे निकाली जा सकती है.
ऐसे चेक करें चालान हिस्ट्री
गाड़ी पर कोई पुराना चालान पेंडिंग है या नहीं, ये जानने का सबसे प्रामाणिक तरीका सरकार का आधिकारिक वाहन पोर्टल है. परिवहन सेवा (Parivahan Sewa) वेबसाइट से चालान की हिस्ट्री जानने के लिए ये स्टेल-बाय-स्टेप प्रोसेस फॉलो करें-
- सबसे पहले अपने फोन या कंप्यूटर पर इलेक्ट्रॉनिक चालान सिस्टम (echallan.parivahan.gov.in) की वेबसाइट पर जाएं.
- होमपेज पर आपको ‘Check Online Services’ का विकल्प दिखेगा, उस पर क्लिक करके ‘Check Challan Status’ चुनें.
- अब आपके पास तीन विकल्प होंगे: चालान नंबर, व्हीकल नंबर (गाड़ी का नंबर) या डीएल नंबर. आप ‘Vehicle Number’ का विकल्प चुनें.
- गाड़ी का नंबर दर्ज करें. इसके बाद सेफ्टी के लिए कार के चेसिस नंबर (Chassis Number) या इंजन नंबर के आखिरी 5 अंक डालें.
- कैप्चा कोड भरकर ‘Get Detail’ पर क्लिक करें. स्क्रीन पर गाड़ी के सारे पेंडिंग और भुगतान किए गए चालान की लिस्ट आ जाएगी.
पुलिस केस/एफआईआर ऐसे पता करें
सिर्फ चालान ही नहीं, ये सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कार चोरी की न हो या किसी पुलिस केस से न जुड़ी हो. इसके लिए आपको नीचे दिया गया प्रोसेस फॉलो करना होगा-
NCRB पोर्टल से मदद लें: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आप Digital Police Portal के जरिए Stolen Vehicle Enquiry चेक कर सकते हैं. यहां गाड़ी का नंबर डालने पर पता चल जाएगा कि वह चोरी की लिस्ट में है या नहीं.
स्टेट पुलिस ऐप: लगभग हर राज्य की पुलिस (जैसे दिल्ली पुलिस, यूपी पुलिस, एम-परिवहन आदि) के अपने मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स हैं. वहां Vehicle Verification सेक्शन में जाकर आप गाड़ी की एफआईआर (FIR) हिस्ट्री चेक कर सकते हैं.
CarInfo या CarDekho जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स: अगर आप और भी आसान तरीका चाहते हैं, तो प्ले स्टोर से इन ऐप्स को डाउनलोड करके सिर्फ गाड़ी का नंबर डालकर उसका पूरा ब्लैकलिस्ट स्टेटस, चालान और ओनरशिप हिस्ट्री 10 सेकंड में देख सकते हैं.
सार: पुरानी कार खरीदते समय सिर्फ 1-2 मिनट का ये ऑनलाइन चेक आपको भविष्य में लाखों रुपये का नुकसान और कानूनी परेशानी से बचा सकता है. हमेशा याद रखें कि जल्दबाजी में की गई खरीदारी बाद में पछतावे का कारण बन सकती है. आजकल डिजिटल ट्रांसपेरेंसी के कारण कोई बहाना नहीं कि गाड़ी की पूरी हिस्ट्री पता न चले. सतर्क रहें, सही से चेक करें और आत्मविश्वास के साथ अपनी ड्रीम कार घर लाएं.
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न्यूज़18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के रूप में कार्यरत राम मोहन मिश्र 2021 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और फिलहाल ऑटो डेस्क संभाल रहे हैं. वे कार और बाइक से जुड़ी जानकारी को आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से …और पढ़ें
