Last Updated:March 16, 2026, 07:18 IST
Noida Pocso Court: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा की पॉक्सो कोर्ट ने 68 वर्षीय शख्स को जेल में दस साल बिताने के बाद कथित रेप मामले में बरी कर दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह पूरा मामला दुर्भावना से प्रेरित था. विकास नगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले की बुनियादी बातों को भी साबित करने में असफल रहा है.
नोएडा की पॉक्सो कोर्ट ने 10 साल बाद एक शख्स को किया बरी. (सांकेतिक तस्वीर)
नोएडा: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा की पॉक्सो कोर्ट ने 68 वर्षीय शख्स को जेल में दस साल बिताने के बाद कथित रेप मामले में बरी कर दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह पूरा मामला दुर्भावना से प्रेरित था. विकास नगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले की बुनियादी बातों को भी साबित करने में असफल रहा है. कोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि शिकायतकर्ता नाबालिग थी या नहीं. इसके अलावा यह भी साबित नहीं हो पाया कि शिकायतकर्ता के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था या नहीं. इसके अलावा जो भी आरोप लगाए गए थे, उसको भी साबित नहीं कर पाए कि वो गलत इरादे से लगाए गए थे या नहीं?
साल 2016 में दर्ज हुई थी एफआईआर
दरअसल, साल 2016 में 8 अगस्त को पीड़िता के पिता ने सेक्टर 20 पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने दो लोगों पर अपनी बेटी का अपहरण और बलात्कार करने का आरोप लगाया था. पुलिस ने बाद में 8 नवंबर, 2016 को आईपीसी की संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप पत्र दाखिल किया. दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे. हालांकि, कार्यवाही के दौरान उनमें से एक आरोपी को नाबालिग पाया गया और 2023 में उसका मामला अलग कर किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया गया.
घटना के दिन बीमार मां को देखने गया था आरोपी
वहीं दूसरा आरोपी, जो मूल रूप से बिहार का निवासी है, उसका मुकदमा स्पेशल कोर्ट में जारी रहा. अभियोजन पक्ष ने लड़की, उसके माता-पिता, जांच अधिकारी और चिकित्सा-कानूनी जांच करने वाले डॉक्टर सहित पांच गवाहों से पूछताछ की. बचाव पक्ष ने तीन गवाह पेश किए और तर्क दिया कि कथित घटना के समय आरोपी अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए बाहर गया हुआ था. उसने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर एक ऐसे व्यक्ति ने लिखवाया है कि जिसका आरोपी के साथ लंबे समय से संपत्ति विवाद चल रहा था.
आरोपी के दुश्मन ने लिखवाई थी एफआईआर
यह दावा कोर्ट के फैसलों का मुख्य बिंदु बन गया. न्यायाधीश ने गौर किया कि शिकायतकर्ता ने पंकज पंडित के साथ किसी भी प्रकार की मित्रता से झूठा इनकार किया. जबकि वास्तव में एफआईआर उसी की ओर से लिखी गई थी. न्यायालय ने कहा कि बचाव पक्ष ने लंबित मामलों की प्रमाणित प्रतियां प्रस्तुत कीं, जिससे यह साबित होता है कि पंडित की आरोपी के साथ “दुश्मनी और विवाद” थे, जिससे इस तर्क को बल मिलता है कि मामला मनगढ़ंत था.
ना सीमन मिला और ना ही कोई यौन उत्पीड़न का सबूत
अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष लड़की के नाबालिग होने का प्रमाण नहीं दे सका. किसी आधिकारिक आयु प्रमाण पत्र के अभाव में, अदालत ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट पर भरोसा किया, जिसमें उसकी आयु 18 वर्ष से अधिक और 22 वर्ष से कम बताई गई थी. कोर्ट ने यह भी पाया कि कोई सीमन भी नहीं मिला था और रिकॉर्ड में मौजूद किसी भी चिकित्सा रिपोर्ट में यौन या अन्य दुर्व्यवहार की पुष्टि नहीं हुई. डॉक्टर ने गवाही दी कि “यौन उत्पीड़न के बारे में कोई निश्चित राय नहीं दी जा सकती”. हालांकि जांच कथित घटना के एक दिन के भीतर ही की गई थी.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें
Location :
Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
March 16, 2026, 07:18 IST
