दिल्‍ली वालों! दम घोंटू हवा बढ़ाने वाला मिल गया एक और कारण, डोंट वरी, इस साल अंत तक आपको मिल जाएगी राहत

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दिल्‍ली वालों! दम घोंटू हवा बढ़ाने वाला मिल गया कारण, डोंट वरी, राहत मिलेगी

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राजधानी दिल्ली में इंडस्‍ट्री, वाहनों के अलावा बढ़ते वायु प्रदूषण का एक और बढ़ा कारण मिल गया है. अच्‍छी बात यह है कि इस समस्‍या का समाधान भी मिल गया है ओर दिल्‍ली सरकार इस साल के अंत तक इसे परेशानी से राहत दे देगी. जानें यह कारण क्‍या है?

दिल्‍ली की सड़कों से धूल की होगी छुट्टी.

नई दिल्‍ली. दिल्ली में इंडस्‍ट्री, वाहनों के अलावा बढ़ते वायु प्रदूषण का एक और बढ़ा कारण मिल गया है. अच्‍छी बात यह है कि इस समस्‍या का समाधान भी मिल गया है ओर दिल्‍ली सरकार इस साल के अंत तक इसे परेशानी से राहत दे देगी. यानी दिसंबर तक दिल्‍ली के लोगों को वाय प्रदूषण से राहत मिल जाएगी.
के बीच एक नई रिपोर्ट ने सड़कों से उड़ने वाली धूल को बड़ा कारण बताया है. मायापुरी से पंजाबी बाग तक करीब 82.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर किए गए अध्ययन में सामने आया है कि खराब सड़कों के कारण हर दिन बड़ी मात्रा में धूल हवा में घुल रही है. यह कॉरिडोर एनएच-44 और एनएच-9 जैसे व्यस्त मार्गों से होकर गुजरता है, जहां वाहनों की आवाजाही बहुत अधिक रहती है.

हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार यह अध्ययन सीएसआईआर-नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) और सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) ने मई 2022 से जून 2023 के बीच किया था, जिसकी रिपोर्ट फरवरी 2025 में जारी की गई. रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे कॉरिडोर में केवल 34 प्रतिशत सड़कें ही अच्छी स्थिति में हैं, जबकि 66 प्रतिशत सड़कें मध्यम से बेहद खराब हालत में हैं. इसी वजह से वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ती है.

अध्ययन में बताया गया है कि इस कॉरिडोर से रोजाना लगभग 33.8 टन पीएम10 और 8.16 टन पीएम 2.5 कण हवा में फैल रहे हैं. सबसे ज्यादा प्रदूषण गेवरा से पंजाबी बाग वेस्ट (एनएच-9) खंड में दर्ज किया गया, जहां पीएम 10 का उत्सर्जन 1450.5 किलोग्राम प्रति दिन प्रति किलोमीटर तक पहुंच गया है. सड़क किनारे जमा धूल, कच्चे शोल्डर और निर्माण सामग्री का मलबा इस समस्या को और बढ़ा रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करते हैं. इससे खांसी, सांस लेने में दिक्कत और लंबे समय में फेफड़ों की बीमारियों व कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि धूल सड़क के किनारों पर 0.5 से 2 मीटर तक जमा रहती है और भारी वाहनों के गुजरने से बार-बार हवा में उड़ती है.

रिपोर्ट में समाधान के तौर पर सड़कों के किनारों को पक्का करने, मैकेनाइज्ड सफाई, पानी के छिड़काव, पेड़ लगाने और ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल की सिफारिश की गई है. वहीं, अधिकारियों का कहना है कि एनसीआर के लिए नया डस्ट कंट्रोल फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है. दिल्ली सरकार ने 2026 के अंत तक 2700 किलोमीटर सड़कों को धूल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन खराब रखरखाव और एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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