बिना RC ट्रांसफर 3 बार बिकी ग्रामीण सेवा, न पुलिस ने रोका-न परिवहन विभाग ने ली सुध, जज ने सबको सीधा कर दिया

राजधानी की सड़कों पर क्या आप सुरक्षित हैं? यह सवाल आज दिल्ली की एक अदालत में गूंज उठा जब एक खौफनाक हकीकत सामने आई. जरा सोचिए, एक गाड़ी एक्सीडेंट करती है, किसी की जान जोखिम में डालती है और जब पुलिस जांच शुरू होती है तो पता चलता है कि उस गाड़ी का कोई मालिक ही नहीं है. कागजों में कोई और चलाने वाला कोई और और बेचने वाला कोई और. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में जब एक ग्रामीण सेवा गाड़ी के एक्सीडेंट का मामला पहुंचा तो जज साहब भी हैरान रह गए. एक ऐसी गाड़ी जो चार बार बिक चुकी थी लेकिन सरकारी फाइलों में आज भी साल पुरानी धूल जमी थी. यह केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग के बीच उस गहरी खाई का सबूत है जहां अपराधियों को छिपने का रास्ता मिल जाता है.

ट्रिब्यूनल ने सख्त लहजे में पूछा आखिर कब तक बिना इंश्योरेंस और बिना कागजों के ये बेनाम’ गाड़ियां मौत बनकर सड़कों पर दौड़ती रहेंगी? यह खबर केवल एक एक्सीडेंट की नहीं बल्कि उस सिस्टम को जगाने की है जो आँखों पर पट्टी बांधकर बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है. कोर्ट ने इसपर पुलिस कमिश्‍नर और परिवहन विभाग को मिलकर पॉलिसी बनाने का निर्देश दिया है. यह फैसला सड़क सुरक्षा और जवाबदेही की दिशा में मील का पत्थर है. अक्सर कमर्शियल गाड़ियां केवल एक हलफनामे पर बेच दी जाती हैं जो कानूनी रूप से मान्य नहीं है. कोर्ट के इस आदेश के बाद दिल्ली में पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त पर सख्ती बढ़ सकती है और बिना RC ट्रांसफर के गाड़ी चलाना भारी पड़ सकता है.

1. चार बार बिका, पर रिकॉर्ड में नाम वही पुराना
मामले की जांच में सामने आया कि गाड़ी का मूल मालिक सिकंदर था. उसने इसे करमवीर को बेचा, करमवीर ने मनोज को और मनोज ने विवेक को. लेकिन हैरानी की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड (RC) में इन बदलावों का कोई जिक्र नहीं था. ट्रिब्यूनल ने सवाल उठाया कि जब इन वाहनों को हर साल फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट रिन्यूअल के लिए अथॉरिटी के पास जाना पड़ता है, तो अधिकारियों की नजर से यह धोखाधड़ी कैसे बच गई?

2. पुलिस और परिवहन विभाग में तालमेल शून्य
कोर्ट ने टिप्पणी की कि दिल्ली पुलिस (जांच एजेंसी) और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) के बीच समन्वय का “पूर्ण अभाव” है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी पुलिस ने परिवहन विभाग को धारा 50 के उल्लंघन की जानकारी नहीं दी, जिससे दोषी वाहन मालिक के खिलाफ कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो सकी.

3. अनइंश्योर्ड वाहनों का खतरा
ट्रिब्यूनल ने रेखांकित किया कि जब वाहन अवैध रूप से बेचे जाते हैं, तो अक्सर उनका बीमा (Insurance) भी नहीं कराया जाता. ऐसे में एक्सीडेंट होने पर पीड़ित को मुआवजा मिलने में भारी परेशानी होती है, क्योंकि असल मालिक का पता ही नहीं चलता.

प्रमुख प्‍वाइंट्स
· धारा 50 का उल्लंघन: मोटर वाहन अधिनियम की धारा 50 के तहत वाहन बेचने पर स्वामित्व हस्तांतरण की सूचना देना अनिवार्य है.

· परमिट की शर्तों की अनदेखी: ग्रामीण सेवा जैसे वाहनों के परमिट एक निश्चित अवधि तक ‘नॉन-ट्रांस्फ़रेबल’ होते हैं, जिसका उल्लंघन धड़ल्ले से हो रहा है.

· पॉलिसी बनाने का निर्देश: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और परिवहन आयुक्त को मिलकर एक ऐसी नीति बनाने को कहा है जिससे दोनों विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके.

सवाल-जवाब
क्या पुरानी गाड़ी खरीदते समय केवल एग्रीमेंट काफी है?

बिल्कुल नहीं. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 50 के तहत RTO रिकॉर्ड में नाम बदलवाना अनिवार्य है. इसके बिना पुराना मालिक ही कानूनी रूप से जिम्मेदार माना जाता है.

ग्रामीण सेवा जैसे वाहनों के लिए क्या खास नियम हैं?

इन वाहनों को पब्लिक यूटिलिटी परमिट मिलता है. इनके ड्राइवरों के पास विशेष बैज और अथॉरिटी होनी चाहिए. इनका परमिट शुरूआती वर्षों में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता.

कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिए हैं?

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और STA को एक साझा मैकेनिज्म (Mechanism) बनाने को कहा है ताकि गाड़ी की बिक्री की जानकारी तुरंत एक-दूसरे के साथ साझा की जा सके.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *