Last Updated:
Greater Noida News : दिल्ली से सटा नोएडा लंबे समय से देश के प्रमुख रियल एस्टेट हब के रूप में मशहूर रहा है, लेकिन अब एक नया क्षेत्र इसे पीछे छोड़ता दिख रहा है. नोएडा की शुरुआत पुरानी योजना के तहत हुई थी और कई जगह सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं, नए इलाके में ऐसा नहीं है. इस नए क्षेत्र में 60 मीटर तक चौड़ी सड़कें, अलग-अलग इंडस्ट्रियल और रेजिडेंशियल जोन और गांवों के बाहर रिंग रोड जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. लोकल 18 ने रियल एस्टेट कारोबारी हरिओम यादव से बात की.
ग्रेटर नोएडा. उत्तर प्रदेश का नोएडा लंबे समय से देश के प्रमुख रियल एस्टेट हब के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अब इसके आगे एक नया क्षेत्र तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है. यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास का इलाका. रियल एस्टेट विशेषज्ञों और स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों का मानना है कि आने वाले 10 वर्षों में यह क्षेत्र न केवल नोएडा को टक्कर देगा, बल्कि कई मामलों में उससे आगे भी निकल सकता है. लोकल 18 से रियल एस्टेट कारोबारी हरिओम यादव बताते हैं कि इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह यहां तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर है. यमुना एक्सप्रेसवे के साथ-साथ ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट इस क्षेत्र को देश के प्रमुख शहरों से जोड़ रहे हैं. इतनी मजबूत कनेक्टिविटी किसी भी इलाके के विकास के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण कारक मानी जाती है. इसी कड़ी में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) का निर्माण इस क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है.
नोएडा से क्यों अलग
एयरपोर्ट के आसपास इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स हब, होटल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स तेजी से विकसित हो रहे हैं. हरिओम के मुताबिक, जहां एयरपोर्ट आता है, वहां निवेश अपने आप बढ़ता है और प्रॉपर्टी की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है. यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की एक और खासियत इसकी आधुनिक और सुनियोजित प्लानिंग है. जहां नोएडा की शुरुआत पुरानी योजना के तहत हुई थी और कई जगह सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं, इस नए क्षेत्र में 60 मीटर तक चौड़ी सड़कें, अलग-अलग इंडस्ट्रियल और रेजिडेंशियल जोन, और गांवों के बाहर रिंग रोड जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. प्रस्तावित फिल्म सिटी (नोएडा), नई यूनिवर्सिटीज और औद्योगिक इकाइयां इस क्षेत्र को और मजबूत बना रही हैं.
क्या करें निवेशक
हरिओम बताते हैं कि वर्तमान में यहां प्रॉपर्टी की कीमतें 60,000 से 70,000 रुपये प्रति वर्ग गज के बीच बताई जा रही हैं, जबकि अथॉरिटी द्वारा विकसित प्लॉट्स की कीमत 50,000 से 55,000 रुपये के आसपास है. सरकार का सर्किल रेट भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जो पहले लगभग 35,000 रुपये था और अब 36,000 रुपये के करीब पहुंच चुका है. यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में डिमांड लगातार बढ़ रही है. हालांकि, इस तेजी के बावजूद कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं. बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी, बाजार में अधिक सप्लाई और सरकारी नीतियों में बदलाव जैसे कारक भविष्य की ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं. निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए.
About the Author
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
