ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के ओमिक्रोन स्थित Migsun Ultimo सोसाइटी में लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं ने निवासियों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है. ताजा घटना में फ्लैट नंबर 505, सन-2 टॉवर में रहने वाले आश्रय गर्ग ने एक ऐसे हादसे का जिक्र किया, जिसने सोसाइटी की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आश्रय गर्ग ने बताया कि घटना के समय वह घर पर अकेले थे, जबकि उनके दोस्त और सहपाठी बाहर गए हुए थे. इसी दौरान अचानक उनके फ्लैट में ब्लास्ट जैसी आवाज हुई. जब उन्होंने बाहर निकलकर देखा, तो उनका पूरा सोफा और डेस्क जल रहा था, जबकि आसपास कोई ज्वलनशील सामग्री मौजूद नहीं थी. खास बात यह रही कि जिस स्थान पर आग लगी, वह सीधे वॉटर स्प्रिंकलर के नीचे था, लेकिन स्प्रिंकलर ने काम नहीं किया.
फायर टेस्टिंग भी नहीं किया काम
उन्होंने बताया कि घबराकर वह बाहर की ओर भागे और पानी के होज से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन उसमें भी पानी नहीं था. सोसाइटी में फायर टेस्टिंग की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आई. आश्रय ने बताया कि उनके फ्लैट में लगे दोनों फायर अलार्म भी फट गए, लेकिन उनमें से कोई भी अलार्म नहीं बजा. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते आसपास के निवासी मदद के लिए नहीं आते, तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था.
मेंटेनेंस टीम के लोग गायब
घटना के बाद आश्रय ने मेंटेनेंस टीम को कई बार सूचना दी, लेकिन उनकी ओर से कोई भी व्यक्ति मौके पर नहीं पहुंचा. इतना ही नहीं, जब उन्होंने इस बारे में रेजिडेंट्स से बात की, तो उल्टा उन पर ही आरोप लगाए गए कि शायद उन्होंने सिगरेट पी होगी या लापरवाही की होगी. आश्रय ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पूरा सोफा जल चुका था, लेकिन उसके ऊपर रखी माचिस की तिल्ली तक नहीं जली, जिससे यह घटना और भी संदिग्ध लगती है.
लोगों ने बताई आपबीती
इस घटना ने सोसाइटी के अन्य निवासियों को भी अपनी आपबीती साझा करने पर मजबूर कर दिया है. स्थानीय निवासी सुशांत खंडेलवाल ने बताया कि 12 मार्च को उनके फ्लैट में भी इसी तरह आग लगी थी. उनके अनुसार, यह आग उनके मंदिर वाले कमरे में लगी, जिससे पूरा घर काला पड़ गया. उन्होंने कहा कि मेंटेनेंस के जीएम सनी ने उस समय कुछ बिंदु लिखकर दिए थे, लेकिन उसे केवल औपचारिकता के तौर पर लिया गया और असल समस्या का समाधान नहीं किया गया.
सुशांत ने दावा किया कि उनके पास इस पूरे मामले की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें उन्होंने मेंटेनेंस से बातचीत की थी. उनका आरोप है कि उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि जो करना है कर लो. उन्होंने यह भी बताया कि आग लगने के तुरंत बाद जिम्मेदार अधिकारी मौके से चले गए और केवल कैशियर और जूनियर स्टाफ ही वहां मौजूद रहा.
फायर डिपार्टमेंट से मिली जानकारी
एक अन्य निवासी यदुवीर सिंह ने बताया कि 12 मार्च की घटना के बाद जब वे 13 मार्च को फायर डिपार्टमेंट पहुंचे, तो वहां उनकी मुलाकात चीफ फायर ऑफिसर अमित से हुई. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने आवेदन दिया, तो उन्हें यह जानकारी मिली कि सोसाइटी का 28 अक्टूबर को फायर ऑडिट किया गया था, जिसमें कई गंभीर खामियां पाई गई थीं. इनमें स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर ऑटोमेशन पंप और जेट चार्जिंग पॉइंट जैसे जरूरी उपकरण काम नहीं कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि फायर डिपार्टमेंट की ओर से 1 सितंबर, 8 सितंबर और 1 नवंबर को तीन अलग-अलग नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन सोसाइटी के मेंटेनेंस या बिल्डर की ओर से किसी का भी जवाब नहीं दिया गया. उन्होंने बताया कि इस लापरवाही के चलते फायर विभाग ने सेशन कोर्ट में मामला दर्ज किया है.
मेंटेनेंस की ओर से केवल औपचारिकताएं
निवासियों का कहना है कि अगर अक्टूबर में सामने आई खामियों को समय रहते दूर कर लिया गया होता, तो न तो 12 मार्च की घटना होती और न ही हाल ही में सामने आई आग की घटना. उनका आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से मेंटेनेंस की ओर से केवल पाइपलाइन लीकेज की जांच के नाम पर औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं, जबकि असल फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच और सुधार नहीं किया जा रहा.
बिल्डर की ओर से कोई जवाब नहीं
सोसाइटी के निवासियों ने सामूहिक रूप से यह भी आरोप लगाया कि बिल्डर और मेंटेनेंस की ओर से उनकी सुरक्षा को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है. उनका कहना है कि हम बारूद के ढेर पर नहीं, बल्कि लैंडमाइंस पर बैठे हैं, जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
इस पूरे मामले में जब मेंटेनेंस टीम से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया. वहीं, migsun ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर यश मिगलानी से भी संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया और मैसेज के जरिए भी कोई जवाब नहीं दिया.
