Harish Rana News : 'उनका जाना दुखद, लेकिन…', हरीश राणा की मौत पर जानिए क्या बोली उनकी सोसाइटी

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Harish Rana Society Reaction : 13 साल से मशीनों के सहारे घिसट रही जिंदगी को राहत मिल गई है. गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा ने आज शाम करीब 4:00 बजे दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली. 13 साल से वे पूरी तरह बिस्तर पर थे. सारे डॉक्टर हाथ खड़े कर चुके थे. ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं बची, तब बेटे की पीड़ा को देखते हुए पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दायर की. 14 मार्च को हरीश को एम्स में भर्ती कराया गया, जहां आज उनकी जिंदगी का लंबा संघर्ष खत्म हो गया. लोकल 18 ने हरीश राणा के सोसाइटी वालों से बात की.

गाजियाबाद. दिल्ली से सटे गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर सोसाइटी के रहने वाले हरीश राणा ने मंगलवार शाम करीब 4:00 बजे दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली। 13 साल पहले एक दर्दनाक हादसे के बाद वह पूरी तरह बिस्तर पर आ गए थे और मशीनों के सहारे जीवन जी रहे थे. बेटे की लगातार पीड़ा को देखते हुए पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दायर की थी, जिसे मंजूरी मिल गई. इसके बाद 14 मार्च को हरीश को एम्स में भर्ती कराया गया, जहां आज उनकी जिंदगी का लंबा संघर्ष खत्म हो गया. करीब 13 साल पहले हुए हादसे ने हरीश राणा की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी.

चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उनका शरीर लगभग निष्क्रिय हो गया था. सांस लेना, खाना हर चीज मशीनों पर निर्भर हो गई थी. एक युवा जिंदगी बिस्तर तक सिमट गई और पूरा परिवार उनकी सेवा में जुट गया था.

सोसाइटी में कैसा माहौल 
लोकल 18 से राज एम्पायर सोसाइटी निवासी तेजस ने बताया कि हमें इसकी जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप से मिली है. अभी परिवार से बात नहीं हो पाई है. जैसे ही खबर आई पूरे सोसाइटी में गम का माहौल हो गया. लोग उनके घर पर सांत्वना देने पहुंच रहे हैं. हालांकि परिवार अभी यहां मौजूद नहीं है. कुछ रिश्तेदार फ्लैट पर हैं. अशोक राणा अंकल से कई बार मुलाकात हुई है, वह हमारे लिए परिवार जैसे हैं. पिछले 13 सालों से उन्होंने जो संघर्ष किया है, उसे देखकर ही समझ आता है कि एक पिता अपने बेटे के लिए कितना कुछ कर सकता है. ऐसा कोई डॉक्टर, अस्पताल, वैद्य या आयुर्वेद नहीं बचा जहां वह अपने बेटे को लेकर न गए हों. लेकिन जब उन्होंने अपने बेटे को रोज दर्द में देखा. मशीनों के सहारे सांस लेते देखा तो अंत में उन्होंने इच्छामृत्यु की मांग की. एक पिता के लिए यह फैसला लेना बहुत कठिन होता है. हरीश पिछले 13 सालों से बिस्तर पर थे और बहुत दर्द में थे. आज उनका जाना दुखद है लेकिन यह उनके दर्द से मुक्ति भी है.

सोसाइटी निवासी दीपांशु मित्तल ने कहा कि हमें जानकारी मिली है कि शाम करीब 4 बजे एम्स में हरीश राणा का देहांत हो गया. परिवार ने बताया है कि अंतिम संस्कार गाजियाबाद में ही होगा और रात तक पार्थिव शरीर यहां लाया जाएगा. हमने हरीश राणा के पिता अशोक राणा का संघर्ष बहुत करीब से देखा है. उन्होंने अपने बेटे के इलाज के लिए अपनी पूरी जमा पूंजी लगा दी. हालात ऐसे हुए कि उन्होंने स्टेडियम में सैंडविच और चने बेचकर खर्च उठाया लेकिन कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया. हरीश राणा का करीब 30 हजार रुपये महीना इलाज पर खर्च होता था, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. यह सिर्फ संघर्ष नहीं बल्कि एक पिता के प्यार की मिसाल है. आज सोसाइटी में गम का माहौल है. लोग लगातार उनके घर पहुंच रहे हैं. परिवार अभी एम्स में है, लेकिन रिश्तेदार यहां आ चुके हैं. दुख तो बहुत है, लेकिन कहीं न कहीं परिवार को इस लंबे दर्द से राहत भी मिली है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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