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नोएडा भूमि अधिग्रहण के दौरान अधिक मुआवजे दिलवाने के नाम पर अधिकारियों ने कमीशन लिया था. यह खुलासा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान एसआईटी ने किया है. बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने अधिक मुआवजा दिलवाने के नाम पर 10 परसेंट का कमीशन भी लिया था.
नोएडा अथॉरिटी में मुआवजा घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई.
लखनऊः नोएडा में भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को दिए गए अत्यधिक मुआवजे के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान SIT ने बड़ा खुलासा किया. एसआईटी की जांच में सामने आया है कि कुछ किसानों को जरूरत से ज्यादा मुआवजा दिलाने के बदले अधिकारियों को 10% कमीशन देने की बात तय हुई थी. 100 करोड़ रुपए के अतिरिक्त मुआवजा घोटाले मामले में SC में गुरुवार को सुनवाई हुई. उत्तर प्रदेश की स्टैंडिंग काउंसिल रुचिरा गोयल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIT को जांच पूरी करने के लिए दो और महीने की आवश्यकता है.
160 किसानों में से कुछ के बयान हुए दर्ज
किसानों ने आरोप लगाया है कि अतिरिक्त मुआवजे की राशि का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा नकद में अधिकारियों को वापस दिया गया था. करीब एक दशक पुराने इन नकद लेन-देन का ट्रेल खोजना काफी मुश्किल और समय लेने वाला है. SIT ने अब तक नोएडा और अन्य प्राधिकरणों के अधिकारियों द्वारा अर्जित संपत्तियों का विवरण भी जुटाया है. जांच एजेंसी ने बताया कि जिन करीब 160 किसानों को अधिक मुआवजा मिला है, उनमें से अधिकांश की पहचान कर उनके बयान दर्ज किए जा चुके हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिए 6 हफ्ते का दिया टाइम
SIT ने इस कथित घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति (prosecution sanction) भी मांगी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी पर सख्ती दिखाते हुए SIT को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिए हैं.
क्या है पूरा घोटाला
बता दें कि नोएडा में साल 1982 में जमीन अधिग्रहण की एक बड़ी प्रक्रिया हुई थी. जमीन मालिक को उसकी 10-15 बीघा जमीन के लिए शुरुआती मुआवजा 10.12 रुपये प्रति वर्ग की दर से दिया गया. इस बात से जमीन मालिक खुश नहीं था. उसने 1993 में गाजियाबाद की जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया. अदालत ने दर बढ़ाकर 16.61 रुपये प्रति वर्ग गज भुगतान करने का आदेश दिया. इस आदेश के अनुसार मालिक को भुगतान कर दिया गया. इसके साथ मामला निपट गया. साल 2015 में, जमीन मालिक की कानूनी वारिस रामवती ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में फिर से मुआवजे का दावा दायर किया. मगर, इस बार अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी.
कैसे शुरू हुआ घोटाले का खेल
उसी वर्ष नोएडा प्राधिकरण ने भूमि मालिकों के लंबित दावों का निपटारा करने के लिए एक नई नीति बनाई और दर 297 रुपये प्रति वर्ग गज तय कर दी. इसी नीति का दुरुपयोग करते हुए, नोएडा ऑथोरिटी के दो अधिकारियों (कानूनी अधिकारी दिनेश कुमार सिंह और सहायक कानूनी अधिकारी वीरेंद्र सिंह नागर) ने कथित तौर पर रामवती के खारिज दावे को लंबित दिखाकर 7.28 करोड़ रुपये की राशि जारी करवा ली. बस यहीं से शुरू हुआ मुआवजा घोटाला.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें
