दिल्‍ली के रेलवे स्‍टेशन अब पुलिस के लिए भी बनते जा रहे हैं पसंदीदा स्‍थान, क्‍या है इसकी वजह?

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दिल्‍ली के रेलवे स्‍टेशन अब पुलिस के लिए भी बने पसंदीदा स्‍थान, जानें वजह

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भारतीय रेलवे के दिल्‍ली के कई स्‍टेशन न सिर्फ देश के तमाम शहरों के लिए ऑपरेट होने वाली ट्रेनों के लिए फेमस है, बल्कि एक और बड़ा कारण सामने आ रहा है और पुलिस के लिए मददगार बनता जा रहा है. दिल्‍ली पुलिस भी अब इन दिशा में और फोकस हो रही है.

दिल्‍ली पुलिस अब ज्‍यादा मुस्‍तैदी से स्‍टेशनों पर रखेगी नजर.

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे के दिल्‍ली के कई स्‍टेशन न सिर्फ देश के तमाम शहरों के लिए ऑपरेट होने वाली ट्रेनों के लिए फेमस है, बल्कि एक और बड़ा कारण सामने आ रहा है और पुलिस के लिए मददगार बनता जा रहा है. दिल्‍ली पुलिस भी अब इन दिशा में और फोकस हो रही है. दरअसल ये स्‍टेशन मिसिंग बच्‍चों के रेस्‍क्‍यू के लिए खास केन्‍द्र बन गए हैं. पुलिस को कई सफलता भी मिली है.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रेलवे के अनुसार पिछले एक महीने के दौरान दिल्ली पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और अन्य टीमों ने दिल्‍ली के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर एक दर्जन से अधिक रेस्क्यू अभियान चलाकर आठ नाबालिग बच्चों को बरामद कर परिजनों से मिलवाया है और परिजनों को खुशी दी है.

पुलिस का रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, आनंद विहार रेलवे स्टेशन, नांगलोई रेलवे स्टेशन समेत अन्य स्टेशनों और उनके आसपास रही है. अधिकारियों का कहना है कि बच्चे घर छोड़कर सबसे पहले इन रेलवे स्‍टेशन पर पहुंचते हैं. वहीं पुलिस के लिए उन्हें खोजने का प्रमुख ठिकाना भी बन रहे हैं. यह मार्च में बरामद बच्‍चों के आंकड़ों से सामने आया है.

पूछताछ में यह बात सामने आयी है कि ज्यादातर बच्चे घरेलू विवाद, डांट-फटकार या पारिवारिक तनाव के कारण घर छोड़ रहे हैं. इसके बाद वे सस्ती टिकट और भीड़ का फायदा उठाकर बिहार, राजस्थान या हैदराबाद जैसे दूरदराज के शहरों के लिए ट्रेन पकड़कर शहर से बाहर निकल जाते हैं.

ये हैं कुछ उदाहरण

पुलिस के अनुसार 1 मार्च को 13 वर्षीय एक लड़की नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मिली, जो पिछले साल कंझावला में घरेलू काम को लेकर डांट पड़ने के बाद घर छोड़ चुकी थी. 9 मार्च को 16 वर्षीय एक अन्य लड़की भी वहीं से बरामद हुई, जो पारिवारिक विवाद के बाद बिहार चली गई थी और कई महीने तक वहीं रही. 17 मार्च को नांगलोई स्टेशन से 16 वर्षीय किशोरी को बचाया गया, जबकि 21 मार्च को आनंद विहार स्टेशन पर 14 वर्षीय लड़की मिली, जो बिना बताए जयपुर चली गई थी. इसी तरह 28 मार्च को वसंत कुंज की 15 वर्षीय लड़की नई दिल्ली स्टेशन पर पकड़ी गई, जो मां से झगड़े के बाद बिहार में अपनी दादी के पास चली गई थी. 30 मार्च को एक ही दिन नई दिल्ली स्टेशन से तीन बच्चों दो किशोरियां और एक 12 वर्षीय लड़के को अलग-अलग प्लेटफॉर्म से बरामद किया गया. इनमें से एक हैदराबाद से लौटी थी, जबकि अन्य बिहार और अपने गांव जाने की कोशिश में थे.

पुलिस बढ़ा रही है निगरानी

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, रेलवे स्टेशन बच्चों के लिए भागने का सबसे आसान स्‍थान होता है. ट्रेनों में कम किराया और भीड़ में आसानी से छिप जाते हैं और लंबी दूरी तक सीधी ट्रेन से आसानी से भाग जाते हैं. इसी को देखते हुए पुलिस अब रेलवे स्टेशनों पर लगातार निगरानी बढ़ा रही है. सीसीटीवी कैमरों की मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और अकेले घूम रहे बच्चों से पूछताछ की जा रही है. कई मामलों में बच्चों की पहचान बाद में गुमशुदगी की रिपोर्ट से मिलान करने पर हो पाती है, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया जाता है.

About the Author

Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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