Middle East War impact: कहते हैं कि आज की दुनिया में कोई भी कोना अलग-थलग नहीं है. मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच जो तनाव की चिंगारी सुलग रही है, उसकी तपिश अब आपके घर के बाहर वाली सड़क तक पहुंच गई है. अगर आप गाजियाबाद के जीटी रोड, लोनी या सिद्धार्थ विहार की उखड़ी हुई सड़कों पर हिचकोले खा रहे हैं और सोच रहे हैं कि काम क्यों रुक गया, तो इसका जवाब सिर्फ स्थानीय प्रशासन के पास नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में छिपा है. कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने डामर को इतना महंगा कर दिया है कि ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं.
डामर और बिटुमिनस की कीमतों में आग, ठेकेदार परेशान
सड़क निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण सामग्री ‘डामर’ और ‘बिटुमिनस’ होती है, जो सीधे तौर पर कच्चे तेल के शोधन से प्राप्त होती है. मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे इनकी कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है.
गाजियाबाद के स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि जिस रेट पर उन्होंने टेंडर लिए थे, अब उस रेट पर काम करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब काम शुरू करने की बारी आई, तो कच्चे माल की लागत 20% से 30% तक बढ़ गई. यही वजह है कि कई जगहों पर सिर्फ रोड़ी-बजरी डालकर काम छोड़ दिया गया है या फिर केवल ‘पैच वर्क’ यानी गड्ढे भरने तक ही काम सीमित रह गया है.
जीटी रोड: सबसे ज्यादा ट्रैफिक, सबसे बड़ी समस्या
गाजियाबाद की लाइफलाइन माने जाने वाले जीटी रोड (मोहन नगर से ज्ञानी बॉर्डर) की हालत सबसे ज्यादा खराब है. इस सड़क के नवीनीकरण का उद्घाटन हुए लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन काम की रफ्तार ‘कछुआ चाल’ से भी कम है. पीडब्ल्यूडी को इस सड़क के निर्माण पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च करने थे. रोजाना इस मार्ग से मेरठ और गाजियाबाद की तरफ से आने वाले 60 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं. मोहन नगर चौराहे से लिंक रोड और वसुंधरा जाने वाले यात्री धूल और गड्ढों के बीच सफर करने को मजबूर हैं. ठेकेदार इस उम्मीद में हैं कि युद्ध थमे और तेल के दाम कम हों, ताकि वे बिटुमिनस खरीद सकें.
सिद्धार्थ विहार: 600 मीटर की सड़क बनी सिरदर्द
सिद्धार्थ विहार इलाके में लगभग 600 मीटर की सड़क का निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन आधे रास्ते में ही दम तोड़ गया. दो हफ्ते पहले यहां खुदाई की गई और बजरी बिछाई गई ताकि सड़क को समतल किया जा सके, लेकिन अब वहां काम पूरी तरह बंद है. स्थानीय निवासी एनके नेगी बताते हैं कि पहले तो फाइलें और बजट अटकते थे, अब युद्ध का बहाना सामने आ गया है. इस सड़क के न बनने से करीब एक लाख की आबादी प्रभावित हो रही है जो रोजाना NH-9 की ओर जाती है.
लोनी-वजीराबाद रोड: टेंडर के बाद भी काम ठप
लोनी-वजीराबाद रोड, जिसे अब ‘हिंडन एयरपोर्ट रोड’ के नाम से भी जाना जाता है, उसकी हालत भी खस्ता है. इस सड़क के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है. अधिकारियों का कहना है कि डामर की मुख्य आपूर्ति पानीपत रिफाइनरी से होती है, लेकिन कच्चे तेल की कमी और मांग ज्यादा होने के कारण वहां से भी सप्लाई सुचारू नहीं है. इस रोड से रोजाना 40 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं, जिनमें हिंडन एयरफोर्स बेस जाने वाले लोग भी शामिल हैं.
पीडब्ल्यूडी का सख्त रुख: ‘मानसून से पहले चाहिए सड़क’
हालांकि ठेकेदार महंगाई का रोना रो रहे हैं, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारी सख्त नजर आ रहे हैं. पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रामराजा का कहना है, ‘यह सच है कि युद्ध के कारण कच्चा माल महंगा हुआ है और सप्लाई में दिक्कत आई है. लेकिन हमने ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून से पहले हर हाल में काम पूरा करना होगा. यह उनकी जिम्मेदारी है और समय सीमा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.’
आम जनता पर दोहरी मार
एक तरफ पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका है, तो दूसरी तरफ उखड़ी सड़कों के कारण गाड़ियों का मेंटेनेंस बढ़ गया है और धूल के कारण लोगों को सांस की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है. अगर जल्द ही डामर की कीमतों में स्थिरता नहीं आई और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आने वाले मानसून में गाजियाबाद की ये सड़कें तालाब में तब्दील हो सकती हैं.
