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Ramgarh Upchunav: रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए क्षेत्र में हलचल मची हुई है. सभी दल अपनी तैयारी में जुटे हुए हैं. इस उपचुनाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. चुनावी समर में उतरे प्रत्याशी मतदाताओं के बीच हैं. वह उन्हें रिझाकर कैसे अपने खेमे में करने की कोशिश कर रहे हैं.
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संजय कुमार. बक्सर लोकसभा क्षेत्र के रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान होना है. यहां से राजद, भाजपा, बसपा, जन सुराज सहित अन्य दलों और निर्दलीय को मिलाकर 9 प्रत्याशी मैदान में हैं. राजद के सामने 2020 में जीती हुई अपनी सीट पर फिर से काबिज होने की चुनौती है.
तो भाजपा साल 2015 के इतिहास को दोहराने की जद्दोजहद से गुजर रही है. साल 2020 के चुनाव में बसपा को यहां से मात्र 189 वोट से हारना पड़ा था. अपनी हार को वह इस बार जीत में तब्दील करने के लिए पसीना बहा रही है. वहीं, जन सुराज पार्टी अपने प्रत्याशी को साल 2024 के लोकसभा चुनाव में रामगढ़ विस क्षेत्र से मिले 35568 मत को प्लस कर जीत में कन्वर्ट करने के लिए लड़ाई की धार को मोड़ने की फिराक में है.
राजद का गढ़ कहे जाने वाले रामगढ़ में पहली बार साल 2015 में भाजपा ने कमल खिलाया था, लेकिन साल 2020 के चुनाव में भाजपा तीसरे पायदन पर चली गई. इस बार फिर भाजपा से अशोक सिंह मैदान में हैं. साल 2020 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े पूर्व विधायक अंबिका सिंह के भतीजे सतीश सिंह पर पार्टी ने दांव खेला है. रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव में 2 लाख 90 हजार मतदाता हैं, जो प्रत्याशियों व उनके दल की मानसिकता से भली भांति परिचित हैं. चुनावी समर में उतरे प्रत्याशी मतदाताओं के बीच हैं. वह उन्हें रिझाकर कैसे अपने खेमे में करने की कोशिश कर रहे हैं. यह सभी देख व सुन रहे हैं.
प्रत्याशियों को करनी पड़ेगी मशक्कत
रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए क्षेत्र में हलचल मची हुई है. सभी दल अपनी तैयारी में जुटे हुए हैं. इस उपचुनाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नामजदगी का पर्चा दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, अब संवीक्षा, नाम वापसी व चुनाव-चिन्ह आवंटित करने की बारी है. यह काम भी 30 सितंबर तक पूरा हो जाएगा. फिर मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने के लिए प्रत्याशियों के पास मात्र 13 दिन का समय बच जाएगा, लेकिन इस बीच धनतेरस, दीपावली, भाई दूज, छठ महापर्व भी है, ऐसे में वोटरों को भुनाने में प्रत्याशियों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी.
चुनाव मैदान में कार्यकर्ता बहा रहे हैं पसीना
विधानसभा उपचुनाव में कोई पार्टी गढ़ बचाने, तो कोई कुर्सी झटकने के लिए जद्दोजहद करती दिख रही है. वर्चस्व कायम करने के लिए नेता ही नहीं कार्यकर्ता भी चुनाव मैदान में पसीना बहा रहे हैं. विपक्षी पार्टियां क्षेत्र में विकास के नाम पर सरकार को कोस रही हैं, जबकि भाजपा शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, सड़क जैसी व्यवस्था में हुए परिवर्तन और समाज को मिले इसके फायदे को गिना रही है. केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए गए सामाजिक बदलाव को याद दिलाने से भी प्रत्याशी चूक नहीं रहे हैं.
नेताओं का दौरा हो जाएगा तेज
बता दें कि रामगढ़ सीट से इंडिया गठबंधन के घटक दल राजद से अजीत कुमार सिंह, एनडीए गठबंधन के भाजपा से अशोक कुमार सिंह, बसपा से सतीश सिंह उर्फ पिंटू यादव, जन सुराज पार्टी से सुशील कुशवाहा चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं. ये सभी चुनाव मैदान में एक-दूजे को टक्कर देने के लिए तैयार हैं. चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के साथ दिग्गजों की भी कठिन परीक्षा होनी है, जिन्हें साबित करना होगा कि उनके साथ जन समर्थन है. जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, मतदाताओं को रिझाने के लिए राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक देंगे और नेताओं का दौरा तेज हो जाएगा.
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