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Delhi Police Cyber Crime: शेयर बाजार में ‘मोटा मुनाफा’ कमाने का लालच दिल्ली के एक शख्स को भारी पड़ गया. शाहदरा जिले की साइबर सेल पुलिस ने एक ऐसे शातिर गैंग का पर्दाफाश किया है जो व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए लोगों को हाई रिटर्न का झांसा देकर लाखों की ठगी करता था. पुलिस ने 10 लाख रुपये के ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड को सुलझाते हुए तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है. ये आरोपी ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए ‘म्यूल अकाउंट्स’ (किराए के बैंक खाते) मुहैया कराते थे. आइए जानते हैं ठगी का यह पूरा खेल क्या था और कैसे ये शातिर पुलिस के हत्थे चढ़े.
दिल्ली पुलिस ने साइबर फ्रॉड करने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया. व्हाट्सएप्प से शेयर में ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों को ठगते थे.
नई दिल्ली: अगर आप भी व्हाट्सएप या टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर बाजार से जुड़े ग्रुप्स में शामिल हैं और ‘मोटे मुनाफे’ के लालच में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए चेतावनी है. दिल्ली पुलिस की शाहदरा जिला साइबर सेल ने एक ऐसे ही गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो ऑनलाइन ट्रेडिंग और हाई रिटर्न का झांसा देकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहा था. पुलिस ने 10 लाख रुपये के इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के मामले में रोहिणी इलाके से तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है.
क्या है पूरा मामला?
इस ठगी का शिकार शाहदरा के सुभाष पार्क इलाके के रहने वाले अमित कुमार जैन हुए. अमित ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके साथ 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है. पीड़ित ने बताया कि दिसंबर 2025 में उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था. इस ग्रुप में शेयर मार्केट में निवेश करके कम समय में ‘पक्का मुनाफा’ (High Return) कमाने के दावे किए जा रहे थे. ठगों ने अमित को अपने जाल में इस कदर फंसाया कि उन्होंने उन पर भरोसा कर लिया और मुनाफे की उम्मीद में अलग-अलग किस्तों में कुल 10 लाख रुपये उनके बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए.
मुनाफे की जगह मिला ब्लॉक का मैसेज
पैसे निवेश करने के बाद जब अमित ने अपना रिटर्न मांगा, तो ठगों ने टालमटोल शुरू कर दी. न तो उन्हें कोई मुनाफा दिया गया और न ही उनका मूल पैसा वापस किया गया. कुछ ही दिनों बाद जालसाजों ने अमित का नंबर ब्लॉक कर दिया और ग्रुप से भी हटा दिया. तब जाकर पीड़ित को एहसास हुआ कि वह एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं.
डिजिटल ट्रेल से खुला राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहदरा साइबर सेल ने तुरंत जांच शुरू की. पुलिस टीम ने तकनीकी जांच और डिजिटल एनालिसिस के जरिए पीड़ित द्वारा ट्रांसफर किए गए पैसों की ‘मनी ट्रेल’ खंगाली. जांच में एक अहम सुराग मिला कि ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली के रोहिणी स्थित एक बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया था. इसी लीड के आधार पर पुलिस ने रोहिणी के विजय विहार इलाके में छापेमारी की और तीन आरोपियों को धर दबोचा. पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुमित (26 वर्ष), संदीप (42 वर्ष) और कमल कुमार (41 वर्ष) के रूप में हुई है. ये तीनों ही रोहिणी के रहने वाले हैं.
म्यूल अकाउंट्स से चल रहा था खेल
पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने बताया कि वे इस ठगी के सिंडिकेट में ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर खोले गए बैंक खाते) उपलब्ध कराने का काम करते थे. इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा लूटे गए पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने और असली मास्टरमाइंड की पहचान छुपाने के लिए किया जाता था. पुलिस ने इन आरोपियों के पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए 5 मोबाइल फोन, 6 डेबिट कार्ड, संदिग्ध व्हाट्सएप चैट्स, बैंक डिटेल्स और कई अन्य अहम डिजिटल सबूत बरामद किए हैं. फिलहाल पुलिस इस गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है.
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