Last Updated:
Ghaziabad Traffic News: सोचिए, आपको महज 7 किलोमीटर का सफर तय करना है और घड़ी की सुइयां 26 मिनट पार कर जाती हैं. गाजियाबाद के ‘लाल कुआं से मेरठ तिराहा’ रूट पर यही कड़वी सच्चाई है. सड़कों पर बेतरतीब कट, टूटे डिवाइडर और ई-रिक्शा का आतंक इस कदर है कि पैदल चलना भी किसी जंग जीतने जैसा है. ट्रैफिक पुलिस ने अब इस ‘जाम के जाल’ को तोड़ने के लिए कमर कसी है, लेकिन क्या जमीनी हकीकत बदलेगी या कागजों पर ही रफ्तार दौड़ेगी? आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…
गाजियाबाद: शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली जीटी रोड इन दिनों आम जनता के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है. सिटी रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन योजना के तहत जब पुलिस ने शहर के 8 मुख्य मार्गों की पड़ताल की, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. सबसे बुरा हाल ‘लाल कुआं से मेरठ तिराहा’ मार्ग का है. यहां की व्यवस्था देखकर लगता ही नहीं कि यह किसी बड़े शहर की मुख्य सड़क है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाल कुआं से मेरठ तिराहा तक की 7 किलोमीटर की दूरी में कुल 23 कट बने हुए हैं. हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई कट महज 20 से 30 मीटर की दूरी पर हैं. इन कट्स की वजह से वाहन चालक अचानक मुड़ जाते हैं, जिससे पीछे से आ रहे ट्रैफिक की रफ्तार अचानक रुक जाती है. सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि इतने व्यस्त मार्ग पर एक भी जेब्रा क्रॉसिंग नहीं है, जिससे पैदल यात्रियों की जान हर वक्त खतरे में रहती है.
कब्जा और अतिक्रमण: रेंगने को मजबूर वाहन
सड़कें तो चौड़ी हैं, लेकिन उनका फायदा लोगों को नहीं मिल पा रहा. सड़क की एक-एक लेन पर बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों, ई-रिक्शा और ऑटो का कब्जा है. पीक आवर्स (शाम के समय) में यहां का नजारा और भी भयावह होता है. गूगल मैप पर इस 7 किमी के सफर के लिए 26 मिनट का समय दिखाता है, जबकि यह सफर मुश्किल से 10-12 मिनट का होना चाहिए. सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हैं और सफेद पट्टियों (लेन मार्किंग) का नामोनिशान तक मिट चुका है.
फोटो-AI
क्यों थम रही है शहर की रफ्तार?
ट्रैफिक प्रभावित होने के पीछे पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के साथ-साथ स्थानीय व्यवस्था की कमी भी जिम्मेदार है:
टूटे डिवाइडर: डिवाइडर ऊंचे न होने और टूटे होने के कारण लोग जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते हैं.
पार्किंग का अभाव: पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से लोग मुख्य सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते हैं.
ई-रिक्शा का आतंक: नए बस अड्डे और चौराहों पर ई-रिक्शा और ऑटो चालक बीच सड़क पर सवारी उतारते और बिठाते हैं.
खराब टाइमिंग: ट्रैफिक लाइट की टाइमिंग सही न होने की वजह से वाहनों का भारी दबाव एक ही तरफ बना रहता है.
पुलिस का ‘मिशन-20’ प्लान
डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुण बिसेन ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक नया प्लान तैयार किया है. उन्होंने बताया कि पुलिस का लक्ष्य अगले 2 महीने में ट्रैवलिंग टाइम को 20 प्रतिशत तक कम करना है. इसके लिए ‘रूट मार्शल’ के रूप में सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई है. इतना ही नहीं, उन्होंने बताया कि अनावश्यक कटों को स्थाई रूप से बंद किया जाएगा. अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित विभागों के साथ कोऑर्डिनेशन मीटिंग की जाएगी. साथ ही, ब्लैक टॉप रोड से अवैध कब्जे और पार्किंग को पूरी तरह साफ कराया जाएगा.
कैसे होगा समाधान? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सिर्फ चालान काटने से ट्रैफिक नहीं सुधरेगा. इसके लिए बुनियादी ढांचे में बदलाव जरूरी है. एक्सपर्ट का मानना है कि डिवाइडरों पर लोहे की ऊंची रेलिंग लगानी होगी ताकि लोग कहीं से भी सड़क पार न कर सकें. इसके अलावा, डिवाइडर के कटों पर अनिवार्य रूप से जेब्रा क्रॉसिंग और साइन बोर्ड लगाने होंगे. जब तक ई-रिक्शा के लिए अलग से स्टैंड और रूट तय नहीं होंगे, तब तक जीटी रोड को जाम मुक्त करना नामुमकिन है.
About the Author
राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें
