गाजियाबाद: अगर आप गाजियाबाद के कौशांबी बस डिपो से अक्सर सफर करते हैं और इसे किसी हाई-टेक एयरपोर्ट की तरह देखने का सपना संजोए बैठे हैं, तो फिलहाल आपको और इंतजार करना होगा. 261 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाला ‘कौशांबी ट्रांजिट हब’ प्रोजेक्ट फिलहाल फाइलों के ढेर में दबा नजर आ रहा है. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने बजट तो मंजूर कर दिया है, लेकिन धरातल पर ईंट तक नहीं रखी गई है.
एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं, पर हकीकत में सिर्फ सन्नाटा
यूपी सरकार की योजना कौशांबी बस डिपो को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर एक आधुनिक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करने की है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रियों को बस अड्डे पर ही मॉल और एयरपोर्ट जैसा अहसास हो. लेकिन हैरानी की बात यह है कि टेंडर होने और बजट पास होने के बावजूद अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है. यात्री आज भी पुरानी जर्जर सुविधाओं के बीच ही सफर करने को मजबूर हैं.
क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी इस ट्रांजिट हब में?
प्रोजेक्ट के नक्शे के मुताबिक, यहां यात्रियों के लिए वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं प्रस्तावित हैं:
आधुनिक बस टर्मिनल: अंतरराष्ट्रीय स्तर का बस स्टैंड.
मल्टीलेवल पार्किंग: गाड़ियों के लिए सुरक्षित और विशाल पार्किंग स्पेस.
कमर्शियल हब: शॉपिंग के लिए मॉल और रिटेल आउटलेट्स.
लग्जरी वेटिंग एरिया: बैठने के लिए आरामदायक एसी वेटिंग रूम.
रेस्टोरेंट और डिस्पेंसरी: खाने-पीने के लिए बेहतरीन रेस्टोरेंट और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा के लिए डिस्पेंसरी.
प्राइवेट कंपनी तैयार, फिर पेंच कहां फंसा है?
इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी निजी कंपनी ‘ओमेक्स’ को सौंपी गई है. कंपनी ने प्राथमिक स्तर पर अपना ऑफिस बनाकर काम शुरू करने की तैयारी तो कर ली है, लेकिन मामला एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) और नक्शा पास होने पर आकर अटक गया है.
अधिकारियों का कहना है कि जब तक आधिकारिक रूप से नक्शा पास नहीं हो जाता और एनओसी नहीं मिल जाती, तब तक बसों को यहां से शिफ्ट नहीं किया जा सकता. योजना के अनुसार, निर्माण शुरू करने के लिए कौशाम्बी की बसों को आनंद विहार शिफ्ट किया जाना है, लेकिन क्लीयरेंस न मिलने की वजह से हैंडओवर की प्रक्रिया रुकी हुई है.
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गाजियाबाद के लिए 484 करोड़ का मेगा प्लान
सिर्फ कौशांबी ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने गाजियाबाद के तीन प्रमुख बस अड्डों- नया बस अड्डा (गाजियाबाद), साहिबाबाद और कौशाम्बी के कायाकल्प के लिए कुल 484 करोड़ रुपये का बजट पास किया है. जहां पुराने बस अड्डे पर काम की हलचल दिख रही है, वहीं कौशाम्बी और साहिबाबाद में प्रक्रिया धीमी है. दिल्ली-NCR की सीमा पर होने के कारण कौशांबी डिपो को परिवहन के लिहाज से सबसे अहम ट्रांजिट पॉइंट माना जाता है.
अधिकारियों का क्या कहना है?
गाजियाबाद रीजन के आरएम केएन चौधरी के मुताबिक, नक्शा पास होने की प्रक्रिया अभी चल रही है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि कम दूरी की बसों के लिए कलवर्ट बनाने का काम जल्द पूरा हो जाएगा. इन बसों को वर्कशॉप की जगह से संचालित करने की योजना है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट को पूरी तरह से रफ्तार पकड़ने में अभी कम से कम तीन महीने का समय और लग सकता है.
यात्रियों का इंतजार कब होगा खत्म?
कौशाम्बी ट्रांजिट हब न केवल सफर को आसान बनाएगा, बल्कि गाजियाबाद की तस्वीर भी बदल देगा. लेकिन प्रशासनिक देरी और एनओसी के चक्कर में 261 करोड़ का यह सपना हकीकत बनने से दूर होता जा रहा है. अब देखना यह है कि विभाग फाइलों से बाहर निकलकर जमीन पर कब काम शुरू करवाता है.
