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दिग्गज गायिका आशा भोसले बचपन से बागी रहीं. वह वो करती थी, जो मन करता था. अपने बचपन की गोल्डन कहानी को उन्होंने खुद साल 2023 में न्यूज18 राइजिंग इंडिया के ‘Sheशक्ति’ कार्यक्रम में शेयर किया था. उन्होंने बताया कि उस हरकत की वजह से उन्हें मां से काफी मार भी पड़ी लेकिन उन्होंने जो किया, उसके लिए अफसोस कभी नहीं हुआ. क्या है वो किस्सा चलिए बताते हैं…
नई दिल्ली. ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘इन आंखों की मस्ती’ जैसे अनगिनत गानों को अपनी आवाज में सजाने वालीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले अब इस दुनिया में नहीं है. लेकिन उनसे जुड़े अनगिनत किस्से ऐसे हैं, जो लोगों को चेहरे मुस्कान ला देते हैं. सोमवार को राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार हुआ. बॉलीवुड सिंगर्स ने उनका गाना ‘अभी ना जाओ छोड़कर…’ गाकर अंतिम विदाई दी. न्यूज18 राइजिंग इंडिया के ‘Sheशक्ति’ कार्यक्रम में साल 2023 में शामिल हुईं संगीत जगत की लीजेंड आशा भोसले ने अपने बचपन के विद्रोही रूप को पूरी दुनिया के सामने रखा. फाइल फोटो
13 साल की उम्र में पहला गाना गाने वाली आशा भोसले का सिंगिंग करियर 80 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 12 हजार से ज्यादा गाने गाए. आशा ताई का आखिरी गाना 2026 में रिलीज हुआ. आशा भोसले ने बताया कि वह छोटी उम्र से ही अपनी मर्जी की राजकुमारी रहीं. मां के साफ मना करने के बावजूद उन्होंने बाल कटवा लिए और उस दौर में प्रचलित सफेद साड़ी की बजाय रंग-बिरंगी साड़ियां पहनना शुरू कर दिया. फाइल फोटो
कार्यक्रम के दौरान आशा भोसले से पूछा गया कि वह बचपन से ही ‘रिबेलियस’ (बागी) रही हैं. उनकी मां ने हमेशा कहा था कि बाल नहीं काटने चाहिए, लेकिन आशा ने खुद ही बाल कटवाने की ठान ली. इस पर आशा जी ने बताया, ‘मैं उस वक्त 13 साल की थी. उस जमाने में नाना चौक में बाल कटाने जैसी आज की सैलून संस्कृति नहीं थी.’ फाइल फोटो
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उन्होंने आगे कहा, ‘सूरत में हमारी बस्ती के बाजू में एक क्रिश्चियन आदमी की दुकान थी. उस दुकान में आदमी लोग बैठकर दाढ़ी-वाढ़ी बनवा कर रहे थे. मैं वहां चली गई और बाल कटवाकर आ गई.’ जब मां को पता चला तो उन्होंने आशा ताई की खूब पिटाई लगाई. लेकिन आशा ने मां से कहा- ‘बाल ही तो हैं आ जाएंगे …’ फाइल फोटो
इस किस्से को सुनकर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा था. यह किस्सा उस दौर की सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने वाला है, जब लड़कियों के लिए बाल कटवाना या पुरुषों वाले सैलून में जाना सोच भी नहीं सकता था. फाइल फोटो
इसी कार्यक्रम में आशा भोसले से यह भी पूछा गया कि उस दौर में जब अधिकतर महिलाएं सफेद साड़ी पहनती थीं, आपने रंगीन साड़ियां पहनने का फैसला क्यों किया? जवाब में आशा ताई ने कहा, ‘मुझे रंग अच्छे लगते थे. लाइट पिंक, बेबी पिंक, लाइट स्काई ब्लू… ऐसे कलर बहुत अच्छे लगते थे और मैं वही पहनती थी.’ उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी सोशल प्रेशर में आकर कपड़े नहीं बदले. उनका अपना स्टाइल था और वह उसी पर चलती रहीं. फाइल फोटो
आशा भोसले कई इंटरव्यू में म्यूजिक इंडस्ट्री पर बात की. उन्होंने कई बार कहा कि यहां तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार कभी नहीं मानी. उन्होंने बताया था कि शुरुआती दिनों में रिकॉर्डिंग के कितने कठिन हालात हुआ करते थे, लेकिन संगीत के प्रति जुनून ने सब मुश्किलें आसान कर दीं. उन्होंने नई पीढ़ी के गायकों की भी सराहना की, लेकिन साथ ही कहा कि संगीत की मूल भावना को नहीं भूलना चाहिए. फाइल फोटो
आपको बता दें कि आशा भोसले का रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था. वे 92 साल की थीं. आशा भोसले ने अपने सिंगिंग करियर में 9 फिल्मफेयर समेत 100 से अधिक अवॉर्ड जीते. उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. फाइल फोटो
