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इस मंदिर की नींव महान संत A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada ने रखी थी. उन्होंने ‘हरे कृष्ण आंदोलन’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भक्ति योग और आध्यात्मिक ज्ञान को दुनिया भर में फैलाना था. दिल्ली उनके लिए विशेष महत्व रखती थी, क्योंकि यहीं से उन्होंने अपने लेखन कार्य को आगे बढ़ाया और विदेश यात्रा की तैयारी की.
नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली की पहाड़ियों के बीच स्थित इस्कॉन मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और ज्ञान का अद्भुत संगम है. यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु और पर्यटक भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ-साथ भारतीय परंपराओं को नजदीक से समझने के लिए पहुंचते हैं. आज यह मंदिर दुनियाभर के लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है. यहां न सिर्फ पूजा-अर्चना होती है, बल्कि जीवन जीने की कला, मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन का भी मार्गदर्शन दिया जाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के इतिहास और इसकी विशेषताओं के बारे में.
कैसे हुई शुरुआत
इस मंदिर की नींव महान संत A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada ने रखी थी. उन्होंने ‘हरे कृष्ण आंदोलन’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भक्ति योग और आध्यात्मिक ज्ञान को दुनिया भर में फैलाना था. दिल्ली उनके लिए विशेष महत्व रखती थी, क्योंकि यहीं से उन्होंने अपने लेखन कार्य को आगे बढ़ाया और विदेश यात्रा की तैयारी की. उनकी इसी सोच और इच्छा को साकार करते हुए इस भव्य मंदिर का निर्माण किया गया.
1998 में हुआ भव्य उद्घाटन
इस मंदिर का उद्घाटन 5 अप्रैल 1998 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किया गया था. लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से बने इस मंदिर का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थल बनना नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित होना भी था.
मंदिर से बढ़कर एक सांस्कृतिक केंद्र
आज यह मंदिर Glory of India Vedic Cultural Center के रूप में भी प्रसिद्ध है. यहां महाभारत, रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे प्राचीन ग्रंथों को आधुनिक तकनीक और मल्टीमीडिया के माध्यम से रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है. स्कूल और कॉलेज के छात्र यहां आकर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को नए नजरिए से समझते हैं.
यहां क्या है खास
मंदिर परिसर में दुनिया की सबसे बड़ी श्रीमद्भगवद्गीता रखी गई है, जिसका वजन लगभग 800 किलोग्राम बताया जाता है. इसके अलावा यहां इंटरएक्टिव म्यूजियम, भक्ति संगीत, समृद्ध पुस्तकालय, ओपन थिएटर में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, सुंदर बाग-बगीचे और फव्वारे मौजूद हैं. ये सभी आकर्षण मिलकर इस स्थान को एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र का रूप देते हैं.
अनोखी वास्तुकला
इस मंदिर की डिजाइन प्रसिद्ध आर्किटेक्ट Achyut Kanvinde ने तैयार की थी. यहां पारंपरिक भारतीय शैली और आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. हरे-भरे उद्यान, पत्थरों की बारीक नक्काशी और ‘हरे कृष्ण’ की गूंज पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है. मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी ऐसा है, जो धीरे-धीरे श्रद्धालुओं को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है.
कैसे पहुंचें यहां
यह मंदिर दिल्ली के ग्रेटर कैलाश क्षेत्र में स्थित है. यहां पहुंचना बेहद आसान है. निकटतम मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो का नेहरू प्लेस स्टेशन है, जहां से मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
