ताकत का किया गलत इस्तेमाल, 25 साल पुराने केस में CBI के जॉइंट डायरेक्टर दोषी करार, IRS अफसर के घर पर की थी रेड

होमताजा खबरDelhi

ताकत का किया गलत इस्तेमाल, 25 साल पुराने केस में CBI के जॉइंट डायरेक्टर दोषी

Last Updated:

अशोक कुमार अग्रवाल 1985 बैच के आईआरएस अफसर थे. साल 2000 में वह दिल्ली में डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एनफोर्समेंट थे. 19 अक्टूबर 2000 को उनके घर पर एक रेड हुई थी. अग्रवाल ने अपनी शिकायत में इस रेड को पूरी तरह गलत बताया था. तीस हजारी कोर्ट ने अब इस मामले में अपना अहम फैसला दिया है. सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश को इस मामले में दोषी माना गया है.

ख़बरें फटाफट

सीबीआई के जाइंट डायरेक्टर को कोर्ट ने दोषी ठहराया है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 25 साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए सीबीआई के एक मौजूदा जॉइंट डायरेक्टर और दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड अधिकारी को दोषी करार दिया है. यह मामला साल 2000 में एक आईआरएस अधिकारी के घर पर कथित तौर पर गलत इरादे से की गई रेड से जुड़ा है.

अदालत ने अपने फैसले में सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस वीके पांडे (जो उस समय सीबीआई में तैनात थे) को कई भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323, 427, 448 और 34 के तहत दोषी ठहराया है. तीस हजारी कोर्ट के जज शशांक नंदन भट्ट ने यह फैसला सुनाया.

यह मामला 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की शिकायत से जुड़ा है, जो उस समय दिल्ली में डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एनफोर्समेंट के पद पर कार्यरत थे. अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि 19 अक्टूबर 2000 को उनके घर पर की गई तलाशी और गिरफ्तारी पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण थी.

अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि यह रेड सिर्फ केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी) के 28 सितंबर 2000 के आदेश को नाकाम करने के उद्देश्य से की गई थी. सीएटी ने अपने आदेश में अग्रवाल के निलंबन की चार सप्ताह के भीतर समीक्षा करने का निर्देश दिया था.

कोर्ट के अनुसार, इस आदेश का पालन करने के बजाय सीबीआई अधिकारियों ने 18 अक्टूबर 2000 की शाम को एक गुप्त बैठक की और अगले दिन सुबह अग्रवाल के घर पर छापा मारने और उन्हें गिरफ्तार करने की योजना बनाई. घटनाओं की इस पूरी श्रृंखला को अदालत ने एक सोची-समझी साजिश करार दिया.

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि तलाशी और गिरफ्तारी की कार्रवाई न केवल अवैध थी, बल्कि इसमें शक्ति का दुरुपयोग भी साफ तौर पर नजर आता है. कोर्ट ने माना कि अधिकारियों ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए एक निर्दोष अधिकारी को परेशान करने की कोशिश की. अब इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जल्द ही सजा पर सुनवाई होगी.

About the Author

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *