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चीन से ऑपरेट किए जा रहा यह खेल बीते 25 सालों से चल रहा था. एयरपोर्ट पुलिस ने लाख कोशिशें कर ली, लेकिन इस खेल के खिलाडि़यों तक पहुंचने में नाकामयाब रही. करीब ढाई दशक से घात लगाकर बैठी पुलिस के हाथ एक ऐसी खबर लगी, जिसमें पूरा खेल ही पलट दिया. इस खेल की मास्टरमाइंड को दिल्ली के रेलवे स्टेशन से अरेस्ट कर लिया गया. क्या है पूरा मामला, जानने के लिए पढ़ें आगे…
यह कहानी एक ऐसी महिला ‘खिलाड़न’ की है, जो एयरपोर्ट पुलिस को बीते 25 सालों से छका रही थी. (एआई इमेज)
Interesting Airport Retro Story: चीन में बैठे कुछ लोगों ने इस खेल को करीब 25 साल पहले शुरू किया था. इन लोगों ने भारत के अलग-अलग शहरों में ऐसे लोग तैयार किए थे, जो उनके इशारे पर साजिश को अंजाम देने के लिए हमेशा तैयार रहते थे. चीन से रची गई एक नई साजिश को अंजाम देने के लिए गुरदीश दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा था. वह अपने मंसूबों में कामयाब होता, इससे पहले वह इंटेलिजेंस ब्यूरो के हत्थे चढ़ गया. पूछताछ में गुरदीश ने कई ऐसी बातें बताईं, जिनको जानने के बाद आईबी अफसर के कान खड़े हो गए.
दिल्ली एयरपोर्ट की सिक्योरिटी से जुड़े सीनियर ऑफिसर के अनुसार, गुरदीश से पूछताछ के बाद आईबी को समझ आ गया था कि इस मामले की कडि़यां बहुत लंबी हैं और उन्हें सुलझाने के लिए गुरदीश से लंबी पूछताछ जरूरी है. लिहाजा, गुरदीश को आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस के हवाले कर दिया गया. गुरदीश से पूछताछ के बाद सिक्योरिटी एजेंसी को पता चला कि यह पूरा नेक्सेस लोगों को अवैध तरीके से विदेश भेजने का है. गुरदीश को भी इसी नेक्सेस के जरिए भेजने की कोशिश की जा रही थी. 24 जुलाई 2009 को वह कनाड़ा जाने के लिए आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचा था.
कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा
- आईजीआई एयरपोर्ट पर जांच के दौरान गुरदीश के पासपोर्ट पर लगा कनाडा का वीजा फर्जी पाया गया था. इसी आधार पर इंटेलिजेंस ब्यूरो के अंतर्गत आने वाले ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था.
- पूछताछ में गुरदीश ने उन लोगों के नाम का खुलासा किया, जो चीन से बैठ कर साजिश रच रहे थे. इन लोगों में सबसे अहम नाम राजविंदर कौर का था. राजविंदर अपने पति अपने पति सुखदेव सिंह और अशोक के साथ मिलकर यह नेक्सेस चला रही थी.
- पूछताछ में गुरदीश ने बताया कि राजवंदिर से उसकी मुलाकात चीन में हुई थी. इसके बाद, राजविंदर ने उसे अपने जाल में पूरी तरह से फंसा लिया. इसके बाद, उसने जैसा कहा, गुरदीश वैसा-वैसा करता चला गया. लेकिन, साजिश के आखिरी पायदान पर वह फंस गया.
- गुरदीश के खुलासे के आधार पर आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने राजविंदर के साथ सुखदेव सिंह और अशोक के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया. लेकिन पुलिस की टीम जब तक तीनों के पास पहुंची, इससे पहले पूरे मामले की खबर उन तक पहुंच गई.
- नतीजतन, तीनों फरार होने में कामयाब हो गए और पुलिस को खाली हाथ वापस आना पड़ा. लेकिन, पुलिस ने अपनी तलाश खत्म नहीं की. लगातार 25 सालों तक आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस तीनों के पीछे पड़ी रही. आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग ले आई.
तीनों को पकड़ने के लिए पुलिस की तरफ से क्या किया गया?
अधिकारियों के अनुसार, तीनों आरोपियों को कोर्ट ने 2012 और 2013 में भगोड़ा घोषित कर दिया. इसके बाद, तीनों लगातार ऐसे बिल में छिपे रहे, जहां तक पुलिस नहीं पहुंच सकी. वहीं, पुलिस ने भी टेक्निकल सर्विलांस के साथ मुखबिरों की टोली को इनके पीछे लगा दिया. पुलिस को इंतजार था, तीनों में कोई भी बिल से बाहर निकल आए. यह इंतजार करीब 25 सालों तक चला. इन 25 सालों में पुलिस के हाथ पूरी तरह से खाली रहे.
क्या पुलिस की पकड़ में आई खिलाड़न और उसके साथी?
अधिकारियों के अनुसार, 25 साल के लंबे इंतजार के बाद पुलिस को एक राहत देने वाली खबर मिली. पुलिस को पता चला कि राजविंदर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली है. 25 साल बाद हाथ आए इस मौके को पुलिस किसी तरह से निकलने नहीं देना चाहती थी. पुलिस की एक स्पेशल टीम का गठन किया गया. पुलिस टीम ने रेलवे स्टेशन पर पक्की घेराबंदी कर ली. इस बार किस्मत पुलिस के साथ थी्. पुलिस की टीम ने राजविंदर को सफलता पूर्वक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से अरेस्ट कर लिया गया.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें
