ग्रेटर नोएडा की ग्रीन आर्क सोसाइटी में चहकी सुबह, निवासियों ने लगाए 100 से ज्यादा घोंसले!

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ग्रेटर नोएडा की ग्रीन आर्क सोसाइटी में निवासियों की पहल से सुबह का माहौल बदल गया है. तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पक्षियों के लिए सुरक्षित जगह बनाने के उद्देश्य से लोगों ने ग्रीन बेल्ट में 100 से अधिक घोंसले लगाए हैं. सामूहिक प्रयास के चलते अब सुबह चिड़ियों की चहचहाहट लौट आई है और इस पहल को आगे बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है.

ग्रेटर नोएडा. नोएडा एक्सटेंशन की ग्रीन आर्क सोसाइटी में इन दिनों सुबह का माहौल बदलता नजर आ रहा है. जहां पहले सन्नाटा और शहरी शोर सुनाई देता था, वहीं अब चिड़ियों की चहचहाहट लोगों का ध्यान खींच रही है. इस बदलाव के पीछे सोसाइटी के निवासियों की एक अनोखी पहल है, जो अब चर्चा का विषय बनती जा रही है. सोसाइटी की निवासी रश्मि पांडे बताती हैं कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने पक्षियों के रहने की जगह लगभग खत्म कर दी है. चारों तरफ इमारतें ही इमारतें बन गई हैं, जमीन खत्म हो गई है और पेड़ भी कम होते जा रहे हैं. ऐसे में पक्षियों के पास रहने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है. इसी सोच के साथ उन्होंने और सोसाइटी के अन्य लोगों ने मिलकर पक्षियों के लिए घोंसले बनाने की शुरुआत की.

रश्मि पांडे ने बताया कि इस पहल की शुरुआत सोसाइटी के लोगों द्वारा ग्रीन बेल्ट एरिया में की गई. हमने सोसाइटी के बाहर ग्रीन बेल्ट में अलग-अलग जगहों पर घोंसले लगाए हैं, ताकि पक्षियों को रहने और खाने की सुविधा मिल सके. अब तक 100 से अधिक घोंसले लगाए जा चुके हैं और आगे भी इसे जारी रखा जाएगा. कहा कि यह सिर्फ एक छोटा प्रयास है, लेकिन इससे बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. वहीं, स्थानीय निवासी रुचि जैन इस पहल को अपनी जिम्मेदारी से जोड़कर देखती हैं. उन्होंने कहा हम इस धरती पर रहते हैं, तो पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी बनती है. बचपन में जो चिड़ियों की आवाज हर सुबह सुनाई देती थी, वह अब गायब हो गई है. हमें लगा कि अगर अभी कुछ नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियां इसे कभी महसूस नहीं कर पाएंगी.

पूरी सोसाइटी का सामूहिक प्रयास

रुचि जैन ने बताया कि सोसाइटी के सभी लोग इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. हमने ग्रीन बेल्ट के दोनों तरफ 100 से ज्यादा घोंसले लगाए हैं और सभी निवासी मिलकर उनकी देखभाल कर रहे हैं. कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि पूरी सोसाइटी का सामूहिक प्रयास है. निवासियों का कहना है कि इस पहल का असर अब दिखने लगा है. सुबह के समय घोंसलों के आसपास पक्षियों की हलचल बढ़ गई है और उनकी चहचहाहट से माहौल जीवंत हो उठा है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह एक सुखद अनुभव बन गया है. सोसाइटी के लोगों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा. आने वाले समय में वे इसे और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ें और अपने आसपास भी पक्षियों के लिए सुरक्षित स्थान तैयार करें.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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