पंजाब में रिक्शा चलाया, हरियाणा के आश्रम में छिपा; पत्नी का मर्डर कर 40 साल से फरार था शख्स, अब पुलिस ने दबोचा

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पत्नी का मर्डर कर 40 साल से फरार था कातिल पति, 82 साल की उम्र में हुआ अरेस्ट

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आरोपी चंद्रशेखर प्रसाद ने पूछताछ में अपना खौफनाक जुर्म सरेआम कबूल कर लिया है. उसने बताया कि उसे अपनी पत्नी के कैरेक्टर पर शक था. इसी शक को लेकर अक्सर दोनों के बीच बहुत ज्यादा झगड़ा होता था. 19 अक्टूबर 1986 को उसने गुस्से में अपनी पत्नी का मर्डर कर दिया. भागने से पहले उसने अपनी मेड को बंदूक दिखाकर बंधक भी बनाया. पुलिस ने मर्डर का केस दर्ज किया, लेकिन वह फरार होने में कामयाब रहा.

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आरोपी चंद्रशेखर प्रसाद बिहार के नालंदा का रहने वाला था.

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने 1986 में पत्नी की हत्या करने के बाद 40 साल से फरार 82 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है. पुलिस के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आरोपी चंद्रशेखर प्रसाद को बाहरी उत्तरी दिल्ली के नांगली पूना में एक कारखाने के गोदाम से गिरफ्तार किया गया, जहां वह फर्जी पहचान के तहत रह रहा था. वह मूल रूप से बिहार के नालंदा का रहने वाला है. यह मामला 19 अक्टूबर 1986 का है. उस वक्त करीब 40 वर्ष के प्रसाद ने पूर्वी दिल्ली के शकरपुर स्थित अपने आवास पर अपनी पत्नी की विवाहेतर संबंध के संदेह में कथित तौर पर हत्या कर दी थी.

अधिकारी ने कहा, “उसने और उसके साथियों ने घटनास्थल से भागने से पहले एक घरेलू सहायिका को बंदूक दिखा कर बंधक बना लिया था.” शकरपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 34 (साझा मंशा से किया गया अपराध) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन आरोपी गिरफ्तारी से बचता रहा और 1987 में एक अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया. अधिकारी ने बताया कि हत्या के सभी अनसुलझे मामलों को सुलझाने के लिए एक टीम को जिम्मेदारी दी गई है, और अध्ययन के दौरान टीम को इस मामले के बारे में पता चला. सुरागों की कमी और उस समय आधुनिक जांच उपकरणों के अभाव के कारण यह मामला लगभग 40 वर्षों तक अनसुलझा रहा.

पुलिस ने कहा कि आरोपी का पता लगाना काफी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि उस दौर के कोई डिजिटल रिकॉर्ड, तस्वीरें, आधार कार्ड डेटा या मोबाइल रिकॉर्ड मौजूद नहीं थे, और अपराध के समय उसकी उम्र लगभग 40 वर्ष थी जो अब बढ़कर लगभग 82 वर्ष हो गई है. अपराध शाखा की एक टीम ने मामले को फिर से खोला और मुखबिरों और अन्य लोगों से जानकारी जुटाना तथा तकनीकी निगरानी के माध्यम से आरोपी का पता लगाना शुरू किया.

अधिकारी ने बताया, “जांचकर्ताओं ने पाया कि उसके बच्चे दिल्ली और बिहार में बसे हुए हैं, और उन्होंने परिवार से जुड़े संदिग्ध मोबाइल नंबरों पर सावधानीपूर्वक नजर रखी. नालंदा में जांच से पुष्टि हुई कि प्रसाद जीवित है और पारिवारिक या धार्मिक आयोजनों के दौरान कभी-कभार आता है.” उन्होंने बताया कि किसी की मृत्यु के बाद हुई ऐसी ही एक यात्रा की सूचना मिलने पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी और दिल्ली तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गयी. 22 अप्रैल को आरोपी को अलीपुर स्थित एक कारखाने से गिरफ्तार कर लिया गया.

पूछताछ के दौरान, प्रसाद ने अपराध कबूल करते हुए कहा कि वह अपनी पत्नी के चरित्र को लेकर संदेह के कारण अक्सर उससे झगड़ा करता था. एक दिन क्रोध में आकर उसने पत्नी की हत्या कर दी और भाग गया. पुलिस ने बताया कि दशकों तक फरार रहने के दौरान वह लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा और बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में रहा. उसने पंजाब के पटियाला में रिक्शा चलाने का काम किया और पकड़े जाने से बचने के लिए हरियाणा के एक आश्रम में भी शरण ली.

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