Ghaziabad News: गाजियाबाद और पूर्वी दिल्ली के लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. शहर के ट्रैफिक जाम से जूझने वाले यात्रियों और हिंडन एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़ने वालों के लिए अब सफर सुहाना होने वाला है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने गाजियाबाद के सबसे महत्वपूर्ण मेट्रो कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस नए प्रोजेक्ट के तहत वैशाली से गोकुलपुरी तक मेट्रो दौड़ेगी, जिससे न केवल दिल्ली-यूपी के बीच की दूरी कम होगी, बल्कि हिंडन एयरपोर्ट तक पहुंचना भी चुटकियों का काम हो जाएगा.
वैशाली से गोकुलपुरी: 16 किलोमीटर का ‘गेम चेंजर’ रूट
गाजियाबाद के शहरी ढांचे और यातायात को नई रफ्तार देने के लिए यह प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होगा. अधिकारियों के अनुसार, गोकुलपुरी-वैशाली-मोहननगर रूट सबसे महत्वाकांक्षी है. इसकी कुल लंबाई करीब 16 किलोमीटर प्रस्तावित है. यह रूट केवल एक मेट्रो लाइन नहीं है, बल्कि यह दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्से को गाजियाबाद के दिल यानी मोहननगर और वैशाली से सीधा जोड़ेगा. फिलहाल दिल्ली से हिंडन एयरपोर्ट जाने के लिए यात्रियों को ऑटो या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें समय और पैसा दोनों अधिक खर्च होते हैं. इस कॉरिडोर के बनने के बाद, दिल्ली के दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोग भी सीधे मेट्रो से हिंडन एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे.
किन इलाकों को मिलेगा फायदा?
प्राथमिक DPR के मुताबिक, इस 16 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में कई महत्वपूर्ण स्टेशन होंगे:
- गोकुलपुरी (दिल्ली)
- गगन विहार
- पसंडा
- हिंडन एयरपोर्ट
- मोहननगर
- साहिबाबाद
- वैशाली
इन इलाकों के जुड़ने से रोजाना लाखों यात्रियों को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी. विशेषकर मोहननगर एक बड़ा इंटरचेंज पॉइंट बनेगा, जहां से यात्री रेड लाइन मेट्रो और अन्य प्रस्तावित रूटों के लिए ट्रेन बदल सकेंगे.
नोएडा और साहिबाबाद के बीच भी जुड़ेगी कड़ी
सिर्फ वैशाली-गोकुलपुरी ही नहीं, बल्कि DMRC और GDA की योजना में दो और महत्वपूर्ण रूट शामिल हैं. इसमें से एक है नोएडा सेक्टर-62 (इलेक्ट्रॉनिक सिटी) से साहिबाबाद तक का विस्तार. लगभग 5.1 किलोमीटर लंबे इस रूट पर कुल 5 स्टेशन प्रस्तावित हैं. इसमें वैभव खंड, शक्ति खंड, डीपीएस इंदिरापुरम, वसुंधरा और साहिबाबाद जैसे घनी आबादी वाले इलाके शामिल हैं. इस रूट के बनने से नोएडा से गाजियाबाद और साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया जाने वाले लोगों को सीधा फायदा होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि साहिबाबाद स्टेशन पर मेट्रो और ‘नमो भारत’ (RRTS) का जुड़ाव होगा, जिससे यात्री चंद मिनटों में मेरठ या दिल्ली पहुंच सकेंगे.
पुराना रेलवे स्टेशन भी मेट्रो मैप पर आएगा
तीसरे रूट के रूप में GDA ने शहीद स्थल (नया बस अड्डा) मेट्रो स्टेशन से गाजियाबाद पुराने रेलवे स्टेशन तक के विस्तार को भी हरी झंडी दी है. यह लगभग 3 किलोमीटर का छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. वर्तमान में यात्रियों को नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन से रेलवे स्टेशन जाने के लिए ऑटो या रिक्शा पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे जीटी रोड पर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है. मेट्रो के इस विस्तार से रेल यात्री सीधे मेट्रो कोच में चढ़ सकेंगे और गाजियाबाद के पुराने हिस्से को दिल्ली की लाइफलाइन से सीधा जुड़ाव मिल जाएगा.
बजट और चुनौतियां: 4800 करोड़ का सवाल
इन तीनों कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत करीब 4800 करोड़ रुपये आंकी गई है. हालांकि, इतनी बड़ी राशि जुटाना GDA के लिए एक बड़ी चुनौती है. इससे पहले भी कई बार मेट्रो विस्तार की योजनाएं बनीं, लेकिन बजट की कमी के कारण वे फाइलों से बाहर नहीं निकल पाईं. लेकिन इस बार उम्मीद की किरण दिख रही है. नमो भारत (रैपिड रेल) और मेट्रो के एकीकरण की नीति से केंद्र और राज्य सरकार से फंडिंग का रास्ता साफ हो सकता है. GDA को उम्मीद है कि ‘नमो भारत’ के साथ फीडर के रूप में काम करने पर इन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय मदद आसानी से मिल जाएगी.
UP का अनोखा शहर बनेगा गाजियाबाद
यदि ये तीनों कॉरिडोर समय पर पूरे होते हैं, तो गाजियाबाद उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बन जाएगा जहां एक साथ तीन बड़े ट्रांसपोर्ट सिस्टम मेट्रो, नमो भारत और भारतीय रेलवे का एक व्यवस्थित और इंटीग्रेटेड नेटवर्क होगा. DMRC अपनी रिपोर्ट में रूट पर पड़ने वाले स्टेशनों के सटीक स्थान और तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दे रही है. इसका मकसद यह है कि भविष्य में काम शुरू होने पर किसी भी प्रकार की तकनीकी रुकावट या तोड़फोड़ की जरूरत न पड़े. अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिलने के बाद अब कागजी कार्रवाई तेज हो गई है.
