पति की सैलरी जानना चाहती थी पत्नी, RTI डालकर मांगा जवाब, हाईकोर्ट बोले- अरे ऐसे कैसे कर सकती हो?

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सैलरी जानना चाहती थी पत्नी, RTI डाल मांगा जवाब, हाईकोर्ट बोले- नहीं दे सकते

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पति पत्‍नी को अपनी सेलरी बताना नहीं चाह रहा था. पत्‍नी हमेशा पूछती रहती थी. पति कोई न कोई बहाना बनाकर मना करता रहा. इसके लिए उसने आरटीआई लगा दी. पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि पति की इनकम टैक्स रिटर्न्स (आईटीआर) ‘व्यक्तिगत जानकारी’ हैं और इनका खुलासा आरटीआई के तहत नहीं किया जा सकता.

RTI के मिसयूज को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है.

नई दिल्ली. पति पत्‍नी को अपनी सेलरी बताना नहीं चाह रहा था. पत्‍नी हमेशा पूछती रहती थी. पति कोई न कोई बहाना बनाकर मना करता रहा. लेकिन पत्‍नी ने ठान लिया कि सेलरी पता कर रहेंगे. इसके लिए उसने आरटीआई लगा दी. पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि पति की इनकम टैक्स रिटर्न्स (आईटीआर) ‘व्यक्तिगत जानकारी’ हैं और इनका खुलासा आरटीआई के तहत नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसमें कोई बड़ा सार्वजनिक हित न जुड़ा हो.

टाइम्‍स आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की सिंगल बेंच ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी को पति की आय का विवरण देने को कहा गया था. कोर्ट ने कहा कि, ‘इस मामले में कोई शक नहीं कि रेस्पॉन्डेंट नंबर 2 (पत्नी) द्वारा मांगी गई जानकारी याचिकाकर्ता (पति) की व्यक्तिगत जानकारी है’.

कोर्ट के अनुसार ऐसे मामलों में जानकारी देना गोपनीयता का उल्लंघन होगा. मामला एक पति पत्‍नी विवाद से जुड़ा था. पत्नी ने पति की मेंटेनेंस (भरण-पोषण) की मांग को लेकर उसके नेट टैक्सेबल इनकम का विवरण वित्तीय साल 2007-08 से मांगा था. पत्नी ने आरटीआई दायर कर इनकम टैक्स विभाग से यह जानकारी मांगी.

सीआईसी ने पत्नी के पक्ष में आदेश दिया था, जिसे पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी.पति का तर्क था कि यह जानकारी आरटीआई एक्ट के तहत संरक्षित है, जो व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखने की छूट देती है.
हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि इनकम टैक्स रिटर्न निश्चित रूप से व्यक्तिगत जानकारी के दायरे में आती हैं और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. जस्टिस कौरव ने कहा कि आरटीआई कानून का उद्देश्य सार्वजनिक अथारिटी में पारदर्शिता लाना है, न कि व्यक्तियों की निजी जानकारी को बिना वजह उजागर करना.

पत्नी के इस तर्क को खारिज करते हुए कि मेंटेनेंस क्लेम के लिए जानकारी जरूरी है. वह मेंटेनेंस की कार्यवाही में उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए जानकारी मांग सकती है.अंत में कोर्ट ने सीआईसी के आदेश को खारिज कर पति की याचिका स्वीकार कर ली.यह फैसला पति पत्‍नी विवादों में आरटीआई के मिसयूज को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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