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अगर सही मायने से देखा जाए तो साउथ इंडियन फिल्मों ने अक्सर बॉलीवुड को डूबने से बचाया है, लेकिन जब बात थलपति विजय की फिल्मों की आती है, तो यह कनेक्शन और भी गहरा हो जाता है. साल 2009 और 2011 बॉलीवुड के सुल्तान सलमान खान के करियर के लिए लाइफलाइन साबित हुए. ऐसे समय में जब सलमान खान की कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो रही थीं, थलपति विजय की दो ब्लॉकबस्टर फिल्मों (पोक्किरी और कावलन) के हिंदी रीमेक ने उन्हें उनकी खोई हुई गद्दी वापस दिलाई. इन फिल्मों ने न सिर्फ सलमान को सुपरस्टारडम के शिखर पर फिर से स्थापित किया, बल्कि बॉलीवुड में साउथ रीमेक के एक नए सुनहरे दौर की शुरुआत भी की.
नई दिल्ली. फिल्म इंडस्ट्री में सितारों का उठना और गिरना एक लगातार चलने वाला प्रोसेस है. साउथ इंडियन सिनेमा और खासकर थलपति विजय की फिल्मों ने बॉलीवुड के ‘भाईजान’ सलमान खान को आज जो मुकाम हासिल हुआ है, उसमें एक बड़ा रोल निभाया है. अगर 2000 के दशक के आखिर में देखें, तो सलमान खान मुश्किल दौर से गुजर रहे थे. उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उतना अच्छा परफॉर्म नहीं कर रही थीं, जिसके लिए वे जाने जाते थे. इसी मोड़ पर थलपति विजय की फिल्मों ने उनके करियर में यू-टर्न लिया.
जब थलपति की ‘पोक्किरी’ ने सलमान को ‘राधे’ बना दिया: 2009 में रिलीज हुई ‘वांटेड’ सलमान खान के करियर की सबसे अहम फिल्मों में से एक मानी जाती है. कम ही लोग जानते हैं कि यह फिल्म थलपति विजय की 2007 की ब्लॉकबस्टर ‘पोक्किरी’ की ऑफिशियल हिंदी रीमेक थी. हालांकि ‘पोक्किरी’ असल में एक तेलुगु फिल्म थी, लेकिन साउथ इंडिया में थलपति विजय के तमिल वर्जन ने जो धूम मचाई, उसने बॉलीवुड फिल्ममेकर्स को इसे हिंदी में रीमेक करने के लिए इंस्पायर किया. ‘वांटेड’ में सलमान खान का ‘राधे’ स्टाइल, उनके बोल्ड डायलॉग्स और यूनिक एक्शन सीधे तौर पर विजय के ‘पोक्किरी’ अवतार से इंस्पायर्ड थे. थलपति विजय ने तमिल सिनेमा में ‘मास हीरो’ की इमेज को फिर से जिंदा किया और प्रभु देवा ने बॉलीवुड में सलमान खान के साथ यही फॉर्मूला दोहराया. ‘वॉन्टेड’ की सफलता ने सलमान खान को लंबे समय के बाद सोलो हिट दी और उन्हें A-लिस्ट सुपरस्टार की रेस में सबसे आगे ला खड़ा किया.
2011 में रचा इतिहास: ‘वॉन्टेड’ के बाद सलमान खान का कॉन्फिडेंस लौट आया था, लेकिन इतिहास अभी बनना बाकी था. 2011 में थलपति विजय की फिल्म ‘कावलन’ रिलीज हुई. यह एक इमोशनल एक्शन ड्रामा थी जिसमें विजय ने एक वफादार बॉडीगार्ड का रोल किया था. सलमान खान ने इस फिल्म को हिंदी में ‘बॉडीगार्ड’ के नाम से रीमेक किया. 31 अगस्त, 2011 को रिलीज हुई ‘बॉडीगार्ड’ ने बॉक्स ऑफिस के कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए. यह साल की सबसे बड़ी ओपनर और ब्लॉकबस्टर बन गई. हिंदी दर्शकों को थलपति विजय की कहानी में मासूमियत और हीरोइज्म का मेल बहुत पसंद आया, जिसमें सलमान खान ने एक्टिंग की थी. ‘बॉडीगार्ड’ की जबरदस्त सफलता ने यह पक्का कर दिया कि सलमान खान अब बॉक्स ऑफिस के बिना किसी शक के किंग हैं.
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थलपति विजय और सलमान खान स्टारिंग इन दोनों फिल्मों की तुलना करने पर एक दिलचस्प पैटर्न पता चलता है. विजय की फिल्में अक्सर आम आदमी की भावनाओं को बड़े एक्शन के साथ मिलाती हैं. सलमान खान ने नॉर्थ इंडिया के थिएटर्स में सिंगल-स्क्रीन ऑडियंस को वापस लाने के लिए यह ‘विजय फॉर्मूला’ अपनाया.
जहां विजय की ‘पोक्किरी’ ने 100 दिनों से ज्यादा चलकर तमिल सिनेमा के लिए एक रिकॉर्ड बनाया, वहीं सलमान की ‘वांटेड’ ने बॉलीवुड में ‘मास मसाला’ फिल्मों के लिए ऑडियंस की भूख फिर से जगा दी. इसी तरह, ‘कावलन’ ने विजय को एक सेंसिटिव एक्टर के तौर पर स्थापित किया और ‘बॉडीगार्ड’ ने फैमिली ऑडियंस को वापस लाया जो उनसे दूर थी.
आज थलपति विजय तमिलनाडु के होने वाले चीफ मिनिस्टर और सबसे महंगे एक्टर हैं, लेकिन उनका करियर हमेशा इस बात के लिए याद किया जाएगा कि उनकी फिल्मों ने बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार्स को कैसे नया रूप दिया. ‘वांटेड’ और ‘बॉडीगार्ड’ के बिना, सलमान खान का आज का गोल्डन एरा शायद मुमकिन नहीं होता.
थलपति विजय ने न सिर्फ एक्टिंग में MGR और रजनीकांत की विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि उनकी कहानियों के चुनाव ने पूरे इंडियन सिनेमा पर असर डाला है. आज भी, जब बॉक्स ऑफिस नंबर मुश्किल में होते हैं तो डायरेक्टर अक्सर ‘मास’ ऑडियंस की नब्ज पकड़ने का तरीका खोजने के लिए थलपति विजय की पुरानी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की ओर रुख करते हैं.
