नई दिल्ली: आपके घर की घंटी बजाकर कोई आपके हाथ में ‘जनगणना’ का कोई कागजी फॉर्म थमाता है, तो तुरंत सावधान हो जाइए. राजधानी दिल्ली में इन दिनों जनगणना के नाम पर एक खतरनाक खेल चल रहा है. जालसाज सरकारी प्रक्रिया की आड़ में आम लोगों का पर्सनल और फैमिली डेटा चुराने की फिराक में हैं. दिल्ली के कुछ हिस्सों में जनगणना सर्वेक्षण दस्तावेज से मिलता-जुलता एक फर्जी फॉर्म बांटे जाने की खबरें सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है.
मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर-पूर्वी और पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में यह गिरोह सक्रिय है. ये लोग घरों में छपे हुए फर्जी फॉर्म बांट रहे हैं. इस फॉर्म में लोगों से उनकी बेहद संवेदनशील जानकारियां मांगी जा रही हैं; जैसे- आवास, फैमिली मेंबर्स का ब्योरा, मकान के ऑनरशिप, पीने का पानी, शौचालय, रसोई गैस/ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विवरण, मोबाइल फोन का मालिकाना हक, वाईफाई और गाड़ियों की डेटा. ये ऐसे विवरण हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी या डेटा चोरी के लिए किया जा सकता है.
जनगणना पूरी तरह डिजिटल है
इस फर्जीवाड़े की खबर मिलते ही वरिष्ठ जनगणना अधिकारियों ने तुरंत मोर्चा संभाला. एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस कागजी फॉर्म को पूरी तरह ‘फर्जी’ करार दिया है. उन्होंने दिल्लीवासियों को आगाह करते हुए स्पष्ट किया है कि, ‘इस बार जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल है. डेटा एकत्र करने के लिए किसी भी तरह के कागजी फॉर्म का उपयोग नहीं किया जा रहा है.’
अधिकारियों ने बताया कि गणना करने वाले और पर्यवेक्षक मुख्य रूप से मोबाइल फोन और सरकारी ऐप का उपयोग कर रहे हैं. जालसाज सिर्फ जनगणना की आड़ में व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ अपनी जानकारी साझा न करें.
कैसे करें असली अधिकारी की पहचान?
जनता को भ्रम और ठगी से बचाने के लिए अधिकारियों ने असली प्रगणकों की पहचान का तरीका भी साझा किया है. अधिकारियों ने सलाह दी है कि निवासियों को जनगणना प्रक्रिया से जुड़े होने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति की पहचान की जांच जरूर करनी चाहिए. प्रत्येक अधिकृत जनगणना प्रगणक और पर्यवेक्षक के पास एक विशेष पहचान पत्र (आईडी कार्ड) है, जिस पर एक क्यूआर कोड छपा हुआ है. कोई भी नागरिक इस कोड को स्कैन करके संबंधित अधिकारी की असली पहचान की पुष्टि कर सकता है.
दिल्ली में क्या है जनगणना का मौजूदा स्टेटस?
राष्ट्रीय राजधानी में मकानों की सूची तैयार करने का पहला चरण 16 मई से शुरू हो चुका है. यह काम दिल्ली नगर निगम (MCD) के सभी 250 वार्डों में युद्धस्तर पर जारी है. मकानों को चिन्हित करने और उनका ब्योरा जुटाने के लिए 50,000 से अधिक प्रगणकों को मैदान में हैं, जो गुरुवार तक कम से कम 25,000 ब्लॉक तक अपनी पहुंच चुके हैं.
पूरी तरह गोपनीय होता है आपका डेटा
अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त किया है कि सरकार द्वारा जुटाई गई जनगणना की जानकारी पूरी तरह गोपनीय होती है. इसे ‘जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15’ के तहत कड़ी कानूनी सुरक्षा मिली हुई है. यह डेटा न तो आम जनता के देखने के लिए होता है और न ही इसे इस अधिनियम के उल्लंघन के अलावा किसी अन्य दीवानी या आपराधिक मुकदमे में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
दिल्ली में जनगणना के नाम पर क्या फर्जीवाड़ा हो रहा है?
उत्तर-पूर्वी और पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाकों में जालसाजों द्वारा घरों में छपे हुए फर्जी फॉर्म बांटे जा रहे हैं, जिनमें लोगों से उनकी निजी संपत्ति, वाहन, इंटरनेट और परिवार के सदस्यों का पूरा ब्योरा मांगा जा रहा है.
क्या सरकार द्वारा असली जनगणना के लिए कागजी फॉर्म भरे जा रहे हैं?
बिल्कुल नहीं. वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस बार की जनगणना 100% डिजिटल है और डेटा एकत्र करने के लिए किसी भी कागजी फॉर्म का उपयोग नहीं किया जा रहा है. प्रगणक सिर्फ मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
असली जनगणना अधिकारी या प्रगणक की पहचान कैसे करें?
असली जनगणना प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के पास एक विशेष सरकारी पहचान पत्र होता है जिस पर ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) लगा होता है. आप इस कोड को अपने मोबाइल से स्कैन करके उनके अधिकृत होने की पुष्टि कर सकते हैं.
दिल्ली में असली जनगणना का काम कब से शुरू हुआ है और कितने प्रगणक लगे हैं?
दिल्ली के सभी 250 एमसीडी वार्डों में मकानों की सूची तैयार करने का काम 16 मई से शुरू हो चुका है. इस कार्य को पूरा करने के लिए 50,000 से अधिक प्रगणक तैनात किए गए हैं.
