घने जंगल के बाद भी क्यों तप रहा दिल्ली का 'रिज' इलाका? क्या है इसके पीछे की साइंस? 5 साल के रिकॉर्ड में समझिए

Delhi Ridge Heatwave: जब हम किसी घने जंगल, पेड़ों की छांव और हरियाली के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में ठंडक और सुकून का ख्याल आता है. दिल्ली का ‘कमला नेहरू रिज’ (Kamla Nehru Ridge) भी ऐसा ही एक इलाका है. यह शहर की कंक्रीट की इमारतों, घने शहरी निर्माण और भारी यातायात से दूर एक शांत और हरा-भरा क्षेत्र है. यहां मोर खुलेआम घूमते हैं, बंदर शाखाओं पर झूलते हैं और घनी वनस्पतियों के बीच जंगली सुअर, नेवले व सरीसृप पनपते हैं.

लेकिन, इन सबके बावजूद एक बड़ा और हैरान करने वाला सवाल यह है कि – आखिर यह रिज क्षेत्र से दिल्ली के सबसे गर्म हिस्सों में लगातार क्यों आ रहा है? हाल ही में मौसम वेधशाला (Ridge Observatory) में दोपहर और शाम तक गर्मी असहनीय हो गई. इस हफ्ते लगातार तीन दिनों तक यहां दिल्ली का सबसे अधिक अधिकतम तापमान दर्ज किया गया – सोमवार को 44.6°C, मंगलवार को 46.5°C और बुधवार को 45.8°C. इन तीनों दिनों में, दिल्ली के आधिकारिक मौसम की जानकारी देने वाले ‘सफदरजंग स्टेशन’ का तापमान रिज से कम से कम एक डिग्री कम ही रहा.

दिल्ली का सबसे अधिक अधिकतम तापमान, सबसे कम न्यूनतम तापमान और सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की जाती है

आखिर ‘रिज’ (जंगल) में इतनी भयानक गर्मी क्यों है?

वेधशाला में तैनात आईएमडी (IMD) के वैज्ञानिक अधिकारी ए.के. सिंह का कहना है कि रिज का मौसम दिल्ली के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग व्यवहार करता है. आमतौर पर रिज वेधशाला में ही दिल्ली का सबसे अधिक अधिकतम तापमान, सबसे कम न्यूनतम तापमान और सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की जाती है. इसके पीछे दो मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं:

भौगोलिक संरचना

सिंह ने आगे बताते हैं, ‘यह एक जंगल है, लेकिन इसकी भौगोलिक संरचना पथरीली (Rocky Terrain) है. दिन के समय सूरज की सीधी किरणें पड़ने पर ये चट्टानें बहुत तेजी से गर्मी सोखती हैं और तापमान बढ़ा देती हैं. बाद में ये चट्टानें उसी गर्मी को बाहर (रेडियेट) भी करती हैं.’ यही चट्टानें रात के समय बहुत तेजी से ठंडी भी हो जाती हैं, जिससे यहां का न्यूनतम तापमान बाकी दिल्ली से कम हो जाता है. इसके अलावा, भारी हरियाली के कारण इस क्षेत्र में अक्सर बारिश भी ज्यादा होती है.

पथरीली जमीन और विलायती पेड़ों की वजह से भी पारा हाई हो जाता है.

‘विलायती कीकर’ का प्रभाव

वैज्ञानिकों का कहना है कि रिज की इस विरोधाभासी गर्मी का संबंध केवल इसके पथरीले इलाके से नहीं है, बल्कि ‘आक्रामक वनस्पतियों’ के कारण होने वाले पारिस्थितिक क्षरण से भी है. डीडीए बायोडायवर्सिटी पार्क कार्यक्रम के वैज्ञानिक-प्रभारी फैयाज ए. खुदासर के अनुसार, अरावली पर्वतमाला के इस हिस्से में लंबे समय से ‘प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा’ यानी ‘विलायती कीकर’ का प्रभुत्व रहा है.

विदेशी पेड़ बढ़ा रहे हैं, रिज का तापमान?

यह एक आक्रामक विदेशी प्रजाति है जो इलाके के प्राकृतिक शीतलन तंत्र को बाधित करती है. खुदासर ने बताया, ‘विलायती कीकर का वॉटर-बजटिंग तंत्र बहुत असामान्य है. इसका मतलब है कि यह मिट्टी से वायुमंडल में छोड़े जाने वाले पानी की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में भूजल सोख लेता है. आसपास के तापमान को कम करने में इसका कोई खास योगदान नहीं होता. इसके विपरीत, जो हमारे स्थानीय पौधे होते हैं, उनमें तापमान को नियंत्रित करने और ठंडक देने की प्राकृतिक क्षमता होती है.’ हालांकि, अब इस ‘विलायती कीकर’ को हटाकर इसकी जगह स्थानीय वनस्पतियों को लगाने के लिए एक व्यवस्थित पारिस्थितिक बहाली कार्यक्रम शुरू किया गया है.

पिछले 5 वर्षों में IMD का डेटा

दिल्ली के मौसम का इतिहास बताता है कि रिज इलाके का 46 डिग्री सेल्सियस या उससे पार जाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसकी आवृत्ति (Frequency) और तीव्रता चिंता का विषय है. आइए पिछले 5 वर्षों (2021 से 2025) के कुछ अहम आंकड़ों पर नजर डालते हैं जब मई-जून के महीने में रिज का तापमान 46°C के आसपास या पार गया:

  1. मई 2024: 28 और 29 मई 2024 को भयंकर हीटवेव के दौरान रिज का तापमान 47.5°C से 48°C के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था. यह पिछले कई सालों में सबसे गर्म दिनों में से एक था.
  2. मई-जून 2023: 2023 में 22-23 मई को अधिकतम तापमान 46°C के करीब दर्ज किया गया था.
  3. मई 2022: 15 और 16 मई 2022 को भीषण लू के दौरान रिज और मुंगेशपुर जैसे बाहरी इलाकों में तापमान 47.3°C तक रिकॉर्ड किया गया था.
  4. जुलाई 2021: 2021 में मानसून की देरी के कारण 1 जुलाई को रिज इलाके में तापमान 44.5°C से 45°C के बीच रहा था.

कमला नेहरू रिज इलाका हरा-भरा होने के बावजूद दिल्ली का सबसे गर्म हिस्सा क्यों बन जाता है?
इसके मुख्य रूप से दो कारण हैं. पहला, रिज की जमीन पथरीली (Rocky) है जो दिन में तेजी से गर्मी सोखती है और तापमान बढ़ा देती है. दूसरा, यहां ‘विलायती कीकर’ नाम के पेड़ ज्यादा हैं, जो तापमान को ठंडा करने में मदद नहीं करते और जमीन का पानी ज्यादा सोखते हैं.

‘विलायती कीकर’ पेड़ दिल्ली के पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है?
हां, विलायती कीकर एक विदेशी और आक्रामक प्रजाति है. यह मिट्टी से बहुत अधिक पानी सोखता है लेकिन वायुमंडल में नमी कम छोड़ता है, जिससे यह इलाके को ठंडा नहीं कर पाता. यह स्थानीय पौधों को पनपने भी नहीं देता.

आईएमडी के अनुसार रिज इलाके का न्यूनतम तापमान अचानक कम क्यों हो जाता है?
रिज की पथरीली भौगोलिक संरचना की वजह से, चट्टानें दिन में जितनी तेजी से गर्मी सोखती हैं, रात में वे उतनी ही तेजी से ठंडी भी हो जाती हैं. इसी कारण यहां अक्सर दिल्ली का सबसे कम न्यूनतम तापमान भी दर्ज किया जाता है.

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