आंधी-बारिश में सहारा बनी दीवार ही बन गई यमराज,चीखते रहे लोग, 7 की निगल गई जान

Bengaluru News: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में आंधी और बारिश का भीषण कहर देखने को मिला. मौसम के अचानक हुए हमले में दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है जब सहारा बनी दीवार ही लोगों के लिए यमराज बन गई. बुधवार शाम को हुई तेज आंधी, बारिश और ओलों से बचने के लिए कुछ लोग पास ही अस्पताल की दीवार के सहारे खड़े हो गए, लेकिन तेज आंधी ने ऐसी तबाही मचाई कि दीवार ढह गई और सभी लोग इसके नीचे दब गए. जिनमें से 7 लोगों की मौत हो गई.

घटना शिवाजीनगर स्थित बोरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल के पास की है जब बुधवार को भीषण आंधी, भारी बारिश और तूफान से बचने के लिए कई लोग अस्पताल की दीवार के सहारे खड़े हो गए. तभी अचानक आठ फीट ऊंची कंपाउंड वॉल भरभराकर ढह गई. इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए. मरने वालों में छह साल की बच्ची मुस्फिरा भी शामिल थी, जो अपने सातवें जन्मदिन से पहले शॉपिंग करने आई थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मरने वालों और घायलों में अधिकांश प्रभावित लोग अस्पताल की सीमा के किनारे काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर थे. मृतकों की पहचान फयाज अहमद (39), मोहम्मद अब्दुल हक (52), मुस्फिरा (6), केके लता (57), स्मिता (47), मोहम्मद सलाउद्दीन (36) और नसीमुल्लाह (19) के रूप में हुई है. इनमें दो महिलाएं केरल की थीं, जो शहर घूमने आई थीं.

मुख्यमंत्री ने 5 लाख की घोषणा की
इस दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घटनास्थल का दौरा किया और हर एक मृतक के परिवार को पांच लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने की घोषणा की. उन्होंने बताया, “घायलों को खतरा नहीं है. मैंने डॉक्टरों को मुफ्त इलाज देने के निर्देश दिए हैं.” सीएम ने जांच का आदेश देते हुए पूछा कि अगर दीवार जर्जर हालत में थी तो इंजीनियरों ने इसे क्यों नजरअंदाज किया? अस्पताल कैंपस के अंदर निर्माण कार्य चल रहा था और दीवार के पास रेत का ढेर लगा था, जिससे दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

अलग-अलग जगहों पर हुई 3 और लोगों की मौत
वहीं उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इसे खराब मौसम की घटना बताते हुए नागरिक अधिकारियों की किसी लापरवाही से इनकार किया. सिर्फ यही नहीं बल्कि इस दिन शहर में अलग-अलग बारिश संबंधी घटनाओं में तीन और लोगों की मौत हो गई.

इनमें शिवाजीनगर में 17 वर्षीय सैयद सुफियान बाइक निकालते समय पानी भरे गड्ढे में लाइव तार से करंट लगने से मारा गया. वहीं बन्नरघट्टा रोड पर जेडी मारा जंक्शन के पास 30 वर्षीय मोची रघु की भी करंट लगने से मौत हो गई. चामराजपेट में 35 वर्षीय मंजुनाथ के घर की छत और दीवार गिरने से उनकी जान चली गई.

मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट
शहर में एक घंटे से अधिक समय तक तेज आंधी चली. हवा की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी, जिससे कई पेड़ उखड़ गए और पेड़ों की शाखाएं टूट गईं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था. इस दौरान शहर के केंद्रीय इलाकों में 78 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. कई इलाकों जैसे एमजी रोड, इंदिरानगर, कोरमंगला और बीटीएम लेआउट में सड़कें नदियों में बदल गईं. जलभराव से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ.

बता दें कि स्टॉर्मवाटर ड्रेन नालियां पत्तियों और कचरे से भरी होने के कारण ओवरफ्लो हो गईं. जयदेव अस्पताल मेट्रो स्टेशन और सिल्क बोर्ड के पास पानी भरने से यातायात एक लेन पर सिमट गया. केएसआर रेलवे स्टेशन पर गिरे पेड़ ने पार्क की गई गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया. कई जगहों पर इंटरनेट सेवाएं ठप हो गईं. चर्च स्ट्रीट पर स्थित प्रसिद्ध बुकशॉप ‘बुकवर्म’ में पानी घुसने से करीब 5,000 किताबें बर्बाद हो गईं.

170 से ज्यादा गिरे पेड़
बुधवार को आंधी इतनी तेज थी कि शाम तक 170 पेड़ गिर गए और 408 शाखाएं टूट गईं. नागरिक एजेंसियों को 500 से अधिक डिस्ट्रेस कॉल्स मिलीं. सरकार ने अगले 48 घंटों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाओं के साथ छिटपुट आंधी-बारिश की चेतावनी दी है.

हालांकि इस घटना ने शहर की इंफ्रास्ट्रक्चर और पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेष इंजीनियरिंग टीमें कमजोर इलाकों में तैनात की जा रही हैं. बेंगलुरु के इस पहले आधिकारिक बारिश के मौसम ने खुशी के साथ-साथ भारी नुकसान भी पहुंचाया.

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