दिल्ली दंगा के दो और आरोपियों को सुप्रीम राहत, तसलीम अहमद और खालिद सैफी को 6 महीने की जमानत, उसके बाद क्या?

Delhi Riots 2020 Accused Khalid Saifi And Tasleem Ahmed Interim Bail: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फरवरी 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले पर अपना फैसला सुनाया है. अदालत ने मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल तसलीम अहमद और अब्दुल खालिद सैफी को 6 महीने के लिए अंतरिम जमानत दे दी है. इस फैसले को न सिर्फ इन आरोपियों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, बल्कि यह कानूनी हलकों में यूएपीए (UAPA) के तहत जमानत के नियमों पर एक नई बहस को जन्म दे चुका है.

जमानत देने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए के मामलों में जमानत से जुड़े एक बड़े और जटिल कानूनी सवाल को बड़ी बेंच के पास विचार करने के लिए भेज दिया है. दरअसल, अब बड़ी बेंच यह तय करेगी कि यूएपीए कानून के तहत जमानत की असल कसौटी क्या होनी चाहिए. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यूएपीए की बेहद सख्त शर्तों के बावजूद, अगर किसी मामले की सुनवाई (ट्रायल) में बहुत ज्यादा देरी हो रही है, तो क्या उस देरी को आधार बनाकर आरोपी को जमानत दी जा सकती है?

उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ फैसले पर उठे थे सवाल

गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इसी मामले के अन्य आरोपियों- उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था. लेकिन हाल ही में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने उस फैसले की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे. बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि उमर और शरजील की जमानत खारिज करते वक्त 2021 में दिए गए तीन जजों की बेंच के फैसले में तय की गई व्यवस्था का सही से पालन नहीं किया गया था.

क्या हैं तसलीम अहमद पर आरोप?

गिरफ्तारी: क्राइम ब्रांच ने तसलीम अहमद को 24 जून 2020 को गिरफ्तार किया था और तब से वह लगातार न्यायिक हिरासत में जेल की सलाखों के पीछे थे.

दंगों की साजिश: यह गिरफ्तारी 23 से 25 फरवरी 2020 के बीच सीएए (CAA) के विरोध-प्रदर्शन की आड़ में हुई हिंसा के सिलसिले में हुई थी. अभियोजन पक्ष का दावा है कि अहमद जाफराबाद, मौजपुर, चांद बाग और गोकुलपुरी सहित कई इलाकों में दंगे भड़काने के बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थे.

धाराएं: उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC), शस्त्र अधिनियम (Arms Act), सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम और UAPA की गंभीर धाराएं (13, 16, 17 और 18) लगाई गई हैं.

दूसरी ओर, अहमद के वकीलों का बचाव है कि उन्होंने केवल शांतिपूर्ण तरीके से सीएए का विरोध किया था और उन्हें आतंकवाद के झूठे आरोपों में फंसाया गया है. इस कथित बड़ी साजिश के मामले में तसलीम और खालिद सैफी के अलावा उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शिफा-उर-रहमान समेत कई अन्य चेहरे भी आरोपी बनाए गए हैं. अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच के फैसले पर टिकी हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में किन आरोपियों को अंतरिम जमानत दी है?
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में आरोपी तसलीम अहमद और अब्दुल खालिद सैफी को 6 महीने की अंतरिम जमानत दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच को क्या कानूनी सवाल भेजा है?
अदालत ने बड़ी बेंच से यह तय करने को कहा है कि क्या यूएपीए (UAPA) कानून की सख्त शर्तों के बावजूद, केवल ‘ट्रायल में देरी’ के आधार पर किसी आरोपी को जमानत दी जा सकती है या नहीं.

तसलीम अहमद को पुलिस ने कब गिरफ्तार किया था?
तसलीम अहमद को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 24 जून 2020 को गिरफ्तार किया था.

तसलीम अहमद पर मुख्य रूप से क्या आरोप हैं?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, तसलीम अहमद फरवरी 2020 में सीएए के विरोध के दौरान जाफराबाद, मौजपुर और चांद बाग जैसे इलाकों में दंगे भड़काने और उसकी साजिश रचने के आरोपी हैं. उन पर आईपीसी और यूएपीए की गंभीर धाराएं लगी हैं.
(IANS से इनपुट्स लिया गया है.)

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *