'लड़कों जैसी आवाज हो जाएगी, कोई शादी नहीं करेगा', तानों को किया अनदेखा, बॉडीबिल्डर वैशाली ने ऐसे पूरे किए सपने

नोएडा: नोएडा की एक बेटी की कहानी सुनकर आप भी कहेंगे कि हौसले बड़े हों तो मंजिलें खुद रास्ता बना लेती हैं. नोएडा के चौड़ा रघुनाथपुर गांव की रहने वाली वैशाली जोगी एक गरीब परिवार से आती हैं. घर की हालत अच्छी न होने के चलते उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी, लेकिन वेटलिफ्टिंग और बॉडी बिल्डिंग के क्षेत्र में वो अपना और समाज का नाम रोशन करना चाहती थीं.

बीते चार साल से लगातार बॉडीबिल्डिंग कर रहीं वैशाली ने तमाम उपलब्धियां और मेडल हासिल किया. इस बार उन्होंने थाईलैंड में हुए आयोजन में भारत को रिप्रेजेंट किया था. सबको हराकर अलग-अलग दो कैटेगिरी में दो स्वर्ण पदक जीतकर ये दिखा दिया कि खुली आंख से देखे गए सपने जरूर पूरे होते हैं, बस हौंसला होना चाहिए.

आर्थिक तंगी के चलते नहीं लिया था हिस्सा
लोकल 18 से बात करते हुए वैशाली जोगी ने बताया कि ये सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था और खासकर मेरे लिए, क्योंकि मेरे घरवाले रिश्तेदार और समाज शुरुआत में मेरे इस सपने के खिलाफ थे, लेकिन मैंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे जब मेरी उपलब्धि पेरेंट्स ने देखी, तब सपोर्ट करना शुरू कर दिया. लेकिन पैसे की तंगी के कारण मैंने दो साल पहले इसी तरह का कंपटीशन छोड़ दिया, क्योंकि मेरे पास किराये तक के पैसे नहीं थे.

इस बार बॉडीबिल्डिंग और वेटलिफ्टिंग में प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए वैशाली ने 12 से 14 जून 2026 के बीच आयोजित अंतरराष्ट्रीय बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए. ये चैंपियनशिप थाईलैंड के हांगकांग में आयोजित हुई थी, जिसमें पाकिस्तान, नेपाल, अमेरिका समेत 21 देशों ने हिस्सा लिया और मैने बाजी मार ली.

इस सफर में अहम योगदान
वैशाली बताती हैं कि उन्हें बॉडीबिल्डिंग और वेट लिफ्टिंग करते हुए 4 साल हो गए हैं और वह लगातार अभ्यास कर रही हैं. इससे पहले भी इंटरनेशनल लेवल पर मुझे सिलेक्ट किया गया था हिस्सा लेने के लिए, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण मैं नहीं जा पाई. लेकिन इस बार अखिल भारतीय योगी नाथ उपाध्याय समाज सेवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी तेजपाल सिंह ने मेरे आने-जाने का फ्लाइट टिकट और रहने, खाने-पीने का सब बंदोबस्त करवाया और मैंने इस आयोजन में हिस्सा लिया.

उन्होंने कहा कि मैं परिवार और समाज से वादा करके गई थी कि मैं जरूर आपका और समाज का नाम रोशन करके ही वापस लौटूंगी और आज सबके सामने है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में मिडिल क्लास और गरीब फैमिली वाली किसी भी लड़की का कोई सपोर्ट नहीं करता, लेकिन मेरा मानना है कि मेहनत करो, आगे बढ़ो और अपना, परिवार का और देश का नाम रोशन करो.

खुली आंख से देखे गए सपने जरूर होते हैं पूरे
वैशाली जोगी बताती हैं कि मैं हमेशा खुली आंख से सपना देखती हूं, ना कि सोते समय और जो कोई भी खुली आंख से सपना देखता है, वह जरूर पूरा होता है. मैं अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती थी. आगे सपना मेरा है कि मैं यूपी पुलिस में नौकरी करूं और ओलंपिक में भी भारत को वेटलिफ्टिंग में रिप्रेजेंट कर नाम रोशन करूं.

उन्होंने बताया कि शुरुआत में नोएडा के इस गांव से निकलकर थाईलैंड तक का सफर चैलेंजिंग भरा रहा है. शुरुआत में समाज बोलता था कि बॉडीबिल्डिंग लड़की करेगी, तो कोई शादी नहीं करेगा और आवाज लड़कों जैसी हो जाएगी. लेकिन ये मेरा सपना था और वह मैं पूरा कर रही हूं. फिलहाल मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं अपनी खुशी कैसे बयां करूं. पापा सुभाष जोगी छोटी सी दूध की डेरी चलाते हैं, मम्मी उर्मिला हाउसवाइफ हैं.

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