1 लाख में बेटी और 2 लाख में बेटा, गरीब पर‍िवारों से खरीदकर आख‍िर न‍िसंतान दंपतियों को कैसे बेचता था ये ग‍िरोह

नई द‍िल्‍ली. दिल्ली पुलिस ने नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस गैंग का नेटवर्क दिल्ली से लेकर राजस्थान और दूसरे राज्यों तक फैला हुआ था. पुलिस ने इस मामले में कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 5 नवजात बच्चों को सकुशल बरामद किया गया है. जांच में सामने आया है कि गिरोह गरीब परिवारों से बच्चों को खरीदकर ऐसे लोगों को बेचता था जिनके बच्चे नहीं थे. ये गरीब पर‍िवार से बच्‍च‍ियां एक लाख रुपये में और बेटे 2 लाख रुपये में खरीदते थे.

आम आदमी ने कैसे खोला पूरा राज…
सेंट्रल जिले के डीसीपी रोहित राजवीर सिंह ने बताया कि इस पूरे मामले का खुलासा एक आम नागरिक की सूचना से हुआ. एक व्यक्ति ने पुलिस को जानकारी दी कि पहाड़गंज इलाके में एक महिला अक्सर छोटे बच्चों को लेकर आती है और कुछ समय बाद वहां से गायब हो जाती है. महिला की गतिविधियां काफी संदिग्ध लग रही थीं. वह बार-बार आती-जाती थी और अलग-अलग बच्चों के साथ दिखाई देती थी.

20 हजार के टोकन अमाउंट पर तय हुआ सौदा
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की. इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया. फुटेज के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध महिला की पहचान की और उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी. इसके बाद पुलिस ने एक विशेष टीम बनाई और एक पुलिसकर्मी को नकली ग्राहक बनाकर महिला से संपर्क कराया गया. पुलिसकर्मी ने बच्चा लेने की इच्छा जताई. बातचीत के बाद महिला ने 20 हजार रुपये टोकन अमाउंट लेकर बच्चा देने की बात तय की.

5 द‍िन का नवजात बरामद
जैसे ही महिला बच्चा लेकर पहुंची और पुलिसकर्मी को सौंपा, पुलिस टीम ने मौके पर कार्रवाई कर उसे दबोच लिया. महिला की पहचान ज्योति के रूप में हुई. उसके साथ शालू नाम की महिला और एक पुरुष साथी को भी गिरफ्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, जिस बच्चे को बरामद किया गया वह सिर्फ 5 दिन का नवजात था. बच्चे को इतनी कम उम्र में बेचने की तैयारी की जा रही थी. इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू की. पूछताछ में ज्योति और उसके साथियों ने पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी दी. जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इस गिरोह में कई लोग अलग-अलग भूमिका निभा रहे थे. दिव्या और प्रतिभा नाम की महिलाएं भी बच्चों की सप्लाई करती थीं.

डॉक्टर विवेकी नेटवर्क की अहम कड़ी
पुलिस ने इनके बारे में जानकारी जुटाई और एक और ऑपरेशन चलाकर दोनों को लाइव पकड़ा. इनके कब्जे से 2 लाख 92 हजार रुपये बरामद किए गए. पुलिस को शक है कि यह रकम बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़ी थी. जांच में सबसे बड़ा खुलासा दिल्ली के बेगमपुर स्थित हीरा सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल को लेकर हुआ. पुलिस के अनुसार, इसी अस्पताल में नवजात बच्चों को रखा जाता था और यहीं से खरीद-बिक्री की पूरी डील तय होती थी. आरोप है कि अस्पताल से जुड़ी डॉक्टर विवेकी इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी थी. पुलिस के मुताबिक, डॉक्टर विवेकी बच्चों को सप्लाई करने वाले लोगों और बच्चों को खरीदने वाले ग्राहकों के बीच संपर्क कराती थी. वही कीमत तय करती थी और पूरी डील को मैनेज करती थी.

कैसे बनाते थे लोगों को न‍िशाना
पुलिस जांच में सामने आया कि अस्पताल में आने वाले ऐसे लोग जिनकी संतान नहीं थी उन्हें निशाना बनाया जाता था. अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों से संपर्क किया जाता था. इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए भी ग्राहक तलाशे जाते थे. गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था. आरोपी पहले गरीब परिवारों से नवजात बच्चों को पैसे देकर लेते थे. इसके बाद बच्चों के बर्थ रिकॉर्ड और दस्तावेजों में हेरफेर कर उन्हें जरूरतमंद परिवारों को बेच दिया जाता था.

1 लाख रुपये में लड़की और 2 लाख में लड़का
पुलिस के मुताबिक, बच्चियों को करीब 1 लाख रुपये तक में खरीदा जाता था और आगे 3 से 4 लाख रुपये में बेचा जाता था. वहीं नवजात लड़कों को करीब 2 लाख रुपये में लेकर 5 से 8 लाख रुपये तक में बेचने का खुलासा हुआ है. कुछ मामलों में आरोपियों ने फर्जी तरीके से बच्चों को जुड़वां बताकर भी बेचा. पुलिस के अनुसार, ऐसे मामलों में 9 लाख रुपये तक वसूले गए, जबकि बच्चे असल में ट्विन्स नहीं थे. इस नेटवर्क में शामिल एक बड़े आरोपी कालिया को गुजरात के साबरकांठा से गिरफ्तार किया गया है. वह मूल रूप से जोधपुर का रहने वाला है. पुलिस के अनुसार, कालिया का काम गरीब परिवारों से बच्चों को तलाशना और उन्हें इस नेटवर्क तक पहुंचाना था.

काल‍िया गैंग को चलाता था
पूछताछ में पता चला कि कालिया अब तक 30 से ज्यादा बच्चों को इस गिरोह तक पहुंचा चुका है. वह अलग-अलग राज्यों से बच्चों को दिल्ली लाता था. पुलिस ने बच्चों को खरीदने वाले लोगों पर भी कार्रवाई की है. ग्वालियर के रहने वाले मुकेश और हेमा नाम के दंपति को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने एक बच्चा खरीदा था. वहीं पानीपत के रहने वाले सनी अरोड़ा और रितु अरोड़ा नाम के दंपति को भी बच्चा खरीदने के मामले में पकड़ा गया है. जांच में यह भी सामने आया है कि इस गैंग के कई सदस्यों के खिलाफ पहले से मानव तस्करी से जुड़े मामले दर्ज हैं.

क‍िन-क‍िन को बेचे गए बच्‍चे
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह पिछले करीब डेढ़ साल से सक्रिय था और लगातार नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त कर रहा था. आरोपी दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों से भी बच्चों को लाते थे और फिर उन्हें ऊंची कीमतों पर बेच देते थे. पूरे मामले में डॉक्टर विवेकी और कालिया को पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता बताया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने और लोग शामिल हैं, कितने बच्चों की खरीद-बिक्री की गई और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया. दिल्ली पुलिस की टीम अब आरोपियों के मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और पुराने मामलों की जांच कर रही है. साथ ही उन परिवारों की भी पहचान की जा रही है, जिन्हें इस गैंग ने बच्चे बेचे थे.

इस कार्रवाई से नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

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