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यदि किसी भी गैस या अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई जाती है, तो यह डिवाइस तुरंत अलर्ट जारी करती है. यह चेतावनी मोबाइल फोन के माध्यम से भी प्राप्त की जा सकती है, जिससे वाहन चालक और संबंधित व्यक्ति समय रहते सतर्क हो सकते हैं.
नई दिल्ली: भारत में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शराब पीकर वाहन चलाना और गैस लीकेज जैसी समस्याएं शामिल हैं. हर वर्ष हजारों लोग इन वजहों से अपनी जान गंवा देते हैं. ऐसे में दिल्ली के आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अरिजीत चौधरी और मिरांडा हाउस के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है. इस अभिनव डिवाइस का नाम ‘इलेक्ट्रॉनिक नोज (E-Nose)’ रखा गया है.
क्या है इलेक्ट्रॉनिक नोज?
इलेक्ट्रॉनिक नोज एक स्मार्ट डिवाइस है, जो इंसानी नाक की तरह कार्य करती है, लेकिन गैसों और रासायनिक तत्वों की पहचान कहीं अधिक तेज़ और सटीक तरीके से कर सकती है. इसे विशेष रूप से वाहनों में उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है. इस डिवाइस में चार अलग-अलग सेंसर लगाए गए हैं, जो विभिन्न प्रकार की गैसों और अल्कोहल की मौजूदगी का पता लगाने में सक्षम हैं.
कैसे करता है काम?
इस डिवाइस में एक माइक्रोकंट्रोलर और ब्लूटूथ आधारित संचार प्रणाली को जोड़ा गया है. इसके चारों सेंसर क्रमवार 10-10 सेकेंड के लिए सक्रिय होते हैं और अलग-अलग तत्वों की जांच करते हैं. पहला सेंसर अल्कोहल (Alcohol) की पहचान करता है, दूसरा मिथेन (Methane) गैस की जांच करता है. वहीं, तीसरा कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का पता लगाता है. चौथा सेंसर कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) की निगरानी करता है. यदि किसी भी गैस या अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई जाती है, तो यह डिवाइस तुरंत अलर्ट जारी करती है. यह चेतावनी मोबाइल फोन के माध्यम से भी प्राप्त की जा सकती है, जिससे वाहन चालक और संबंधित व्यक्ति समय रहते सतर्क हो सकते हैं.
ड्रंक ड्राइविंग पर लगेगी रोक
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह शराब पीकर वाहन चलाने की स्थिति का बेहद कम समय में पता लगा सकती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि कोई चालक शराब के नशे में वाहन चला रहा है, तो यह डिवाइस मात्र 4 से 5 सेकेंड के भीतर इसकी पहचान कर सकती है. वहीं अधिकतम 40 सेकेंड के अंदर वाहन के इंजन को बंद करने की व्यवस्था भी इसमें की जा सकती है. इससे संभावित सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा और लोगों की जान बचाई जा सकेगी.
गैस लीकेज से भी बचाएगी जान
यह डिवाइस केवल ड्रंक ड्राइविंग की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहनों में होने वाले गैस रिसाव का भी पता लगाने में सक्षम है. कई बार सीएनजी वाहनों में खराब फिटिंग, तकनीकी खामी या निम्न गुणवत्ता वाली किट के कारण गैस लीकेज होने लगती है, जिससे आग लगने और विस्फोट जैसी गंभीर घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है. इलेक्ट्रॉनिक नोज ऐसी परिस्थितियों में समय रहते चेतावनी जारी कर सकती है, जिससे वाहन मालिक आवश्यक कदम उठाकर बड़े हादसों को टाल सकते हैं. इस प्रकार यह तकनीक सड़क सुरक्षा के साथ-साथ वाहन सुरक्षा को भी मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकती है.
फिलहाल प्रोटोटाइप चरण में है तकनीक
इस तकनीक को विकसित करने वाले प्रोफेसर अरिजीत चौधरी और उनकी टीम का कहना है कि फिलहाल यह डिवाइस प्रोटोटाइप चरण में है और इसके विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है. शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि उद्योग जगत का सहयोग और आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो जाते हैं, तो अगले 3 से 6 महीनों के भीतर इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारा जा सकता है.
सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में गेम चेंजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर वाहनों में इस्तेमाल की जाने लगे, तो शराब पीकर वाहन चलाने और गैस लीकेज से होने वाले हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है. यही वजह है कि इलेक्ट्रॉनिक नोज को भविष्य में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक संभावित ‘गेम चेंजर’ तकनीक के रूप में देखा जा रहा है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
