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बैंक अधिकारियों के अनुसार गाजियाबाद में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत अब तक करीब 1 लाख 20 हजार लोगों को ऋण दिया जा चुका है. इन ऋणों की कुल राशि लगभग 1264 करोड़ रुपये है. योजना का उद्देश्य छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, स्वरोजगार करने वाले युवाओं और सूक्ष्म उद्यमों को आर्थिक सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाना था. बड़ी संख्या में लोगों ने इस योजना का लाभ उठाकर अपना कारोबार शुरू किया या उसका विस्तार किया लेकिन अब कई लाभार्थी ऋण चुकाने में पीछे रह गए हैं.
गाजियाबादः प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए दिए गए ऋण अब गाजियाबाद के बैंकों के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं. जिले में बड़ी संख्या में ऐसे लाभार्थी सामने आए हैं, जिन्होंने समय पर अपनी ऋण किश्तों का भुगतान नहीं किया. नतीजा यह हुआ कि हजारों ऋण खाते अब गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए की श्रेणी में पहुंच गए हैं.
बैंक अधिकारियों के अनुसार गाजियाबाद में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत अब तक करीब 1 लाख 20 हजार लोगों को ऋण दिया जा चुका है. इन ऋणों की कुल राशि लगभग 1264 करोड़ रुपये है. योजना का उद्देश्य छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, स्वरोजगार करने वाले युवाओं और सूक्ष्म उद्यमों को आर्थिक सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाना था. बड़ी संख्या में लोगों ने इस योजना का लाभ उठाकर अपना कारोबार शुरू किया या उसका विस्तार किया लेकिन अब कई लाभार्थी ऋण चुकाने में पीछे रह गए हैं.
37688 ऋण खाते एनपीए घोषित
गाजियाबाद के लीड बैंक मैनेजर बुध राम ने बताया कि वर्तमान में 37688 ऋण खाते एनपीए घोषित किए जा चुके हैं इन खातों पर करीब 205 करोड़ रुपये की राशि बकाया है. किसी खाते को एनपीए तब घोषित किया जाता है जब लंबे समय तक उस पर कोई भुगतान प्राप्त नहीं होता और बैंक को वसूली की संभावना कम दिखाई देने लगती है. बैंक अधिकारियों का कहना है कि ऋण की किश्तें समय पर जमा न करने का असर केवल बैंकिंग व्यवस्था पर ही नहीं पड़ता बल्कि खाताधारकों के भविष्य पर भी पड़ता है. लगातार डिफॉल्ट रहने से संबंधित व्यक्ति का सिबिल स्कोर खराब हो जाता है. खराब क्रेडिट रिकॉर्ड के कारण भविष्य में होम लोन, वाहन लोन या व्यवसाय विस्तार के लिए किसी भी प्रकार का बैंक ऋण प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है.
समय से भुगतान करने की अपील
बैंक प्रबंधन ने सभी ऋणधारकों से अपील की है कि वे अपने बकाया ऋण का समय पर भुगतान करें और खाते को नियमित बनाएं अधिकारियों का कहना है कि समय पर ऋण चुकाने से न केवल व्यक्ति की वित्तीय विश्वसनीयता बनी रहती है बल्कि बैंकिंग व्यवस्था भी मजबूत होती है. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण चार श्रेणियों में दिए जाते हैं.
शिशु श्रेणी में 50 हजार रुपये तक, किशोर श्रेणी में 50 हजार से 5 लाख रुपये तक, तरुण श्रेणी में 5 लाख से 10 लाख रुपये तक और तरुण प्लस श्रेणी में 10 लाख से 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है. बैंक अधिकारियों का कहना है कि यदि डिफॉल्ट खातों की संख्या लगातार बढ़ती रही तो इससे भविष्य में ऋण वितरण और बैंकिंग व्यवस्था दोनों पर असर पड़ सकता है. ऐसे में समय पर भुगतान ही इस समस्या का सबसे बड़ा समाधान माना जा रहा है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
