पाकिस्तान के 'चाचा' और 'रहमान' का नापाक प्लान फेल, 3 राज्यों से पकड़े गए 12 संदिग्धों से क्या-क्या पता चला?

15 अगस्त यानी भारत के स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के नापाक मंसूबों पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा प्रहार किया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, एक हफ्ते के अंदर देश के तीन राज्यों के चार शहरों में अलग-अलग साजिशों का खुलासा हुआ है. इन मामलों में पंजाब के अमृतसर और तरनतारन, पश्चिम बंगाल के वर्धमान और राजधानी दिल्ली से कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों मुताबिक, पता चला है कि पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर्स के इशारे पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टास्क दिए गए थे. साजिश का मकसद सिर्फ दहशत फैलाना नहीं था, बल्कि पुलिस, सुरक्षा बलों और राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाकर देश के अंदर अस्थिरता पैदा करना भी बताया जा रहा है.

पंजाब में निशाने पर पुलिस प्रतिष्ठान और रेलवे नेटवर्क

पंजाब पुलिस के अनुसार, अमृतसर में दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है. इस कार्रवाई में चार नाबालिगों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों के कब्जे से तीन अवैध पिस्तौल, नौ जिंदा कारतूस, चार पेट्रोल बम और चोरी की मोटरसाइकिल बरामद हुई.

डीजीपी गौरव यादव और अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी कर रहे थे.

जांच में रेलवे ट्रैक के आसपास निगरानी कैमरे लगाए जाने और उनकी फुटेज विदेशी हैंडलरों तक भेजने के आरोप भी सामने आए हैं. पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क, उसकी फंडिंग और अन्य सहयोगियों की पहचान की जा रही है.

जंतर-मंतर तक पहुंचने का दावा

अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि आरोपी पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे. वहां उन्हें कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर कुछ सामग्री उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन वे अपने मंसूबों को अंजाम नहीं दे सके और वापस पंजाब लौट गए.

तरनतारन में ड्रोन से हथियारों की खेप

इसी दौरान पंजाब के तरनतारन में पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संयुक्त अभियान में एक अन्य आरोपी मनजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया. पुलिस के अनुसार उसके घर से सात विदेशी पिस्तौल, एक MP-9 गन, बड़ी मात्रा में कारतूस और मोबाइल फोन बरामद हुए. पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि हथियार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए मंगाए गए थे.

पुलिस का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल कथित तौर पर टारगेट किलिंग और अन्य गंभीर वारदातों के लिए किया जाना था. आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान के कई नंबर मिलने का भी दावा किया गया है, जिनमें दो नंबर ‘चाचा’ और ‘रहमान’ नाम से सेव थे. जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि ये वास्तविक नाम हैं या कोडनेम.

बंगाल में जैश मॉड्यूल की जांच

उधर पश्चिम बंगाल के बर्दवान से जुड़े मामले ने जांच एजेंसियों को और सतर्क कर दिया है. जांच में कथित तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री और बड़े राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने की साजिश का एंगल सामने आया है. जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार मोहम्मद हमीम मंडल उर्फ हमीम फुएगो कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट और कई विदेशी व्हाट्सएप नंबरों के संपर्क में था.

एफआईआर में दावा किया गया है कि उसके मोबाइल से पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के साथ चैट, विदेशी नंबरों से संपर्क और सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं.

जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह नेटवर्क स्थानीय लोगों की भर्ती, हथियारों की व्यवस्था, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाने और वीआईपी व्यक्तियों तक पहुंच बनाने जैसे कामों में सक्रिय था.

हनी ट्रैप एंगल की भी जांच

एफआईआर के आधार पर जांच एजेंसियां कथित हनी ट्रैप एंगल की भी जांच कर रही हैं. आरोप है कि एक महिला आरोपी को राजनीतिक और वीआईपी हलकों तक पहुंच बनाने का टास्क दिया गया था. हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है.

जंतर-मंतर कनेक्शन की भी जांच

जांच एजेंसियों के अनुसार दिल्ली से जुड़े इनपुट सबसे संवेदनशील माने जा रहे हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक, जंतर-मंतर पर पुलिस की वर्दी में घुसकर बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश का खुलासा हुआ है. यानी साजिशकर्ताओं की कोशिश थी कि पुलिस की वर्दी का फायदा उठाया जाए. सुरक्षा व्यवस्था को चकमा दिया जाए और भीड़भाड़ वाले संवेदनशील इलाके में बड़ी तबाही मचाई जाए. जंतर-मंतर राजधानी का बेहद संवेदनशील इलाका है, जहां लगातार राजनीतिक प्रदर्शन और बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है. ऐसे में पुलिस के कान खड़े हो गए हैं.

एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल

तीनों राज्यों में हुई गिरफ्तारियों के बाद अब जांच का सबसे बड़ा केंद्र यह है कि क्या तीनों मामलों के पीछे एक ही पाकिस्तान आधारित नेटवर्क था? क्या अलग-अलग मॉड्यूल को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं? फंडिंग कहां से आई? भर्ती किसने कराई? हथियार कैसे पहुंचे? क्या 15 अगस्त से पहले किसी बड़ी वारदात की तैयारी थी?

15 अगस्त से पहले क्यों बढ़ी चिंता?

स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर देशभर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से हाई अलर्ट पर रहती है. ऐसे में एक साथ कई राज्यों और राजधानी दिल्ली में कथित साजिशों के खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. चार शहरों से हुई गिरफ्तारियों के बाद अब जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या इन सभी मामलों के पीछे एक ही पाकिस्तान-आधारित नेटवर्क था या अलग-अलग मॉड्यूल को अलग-अलग टास्क दिए गए थे.

कई एजेंसियां मिलकर इन सवालों का जवाब तलाशे में जुटी हुई हैं. इन मामलों की जांच पंजाब पुलिस, पश्चिम बंगाल STF, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां समन्वय के साथ कर रही हैं. डिजिटल फॉरेंसिक, मोबाइल डेटा, बैंकिंग लेनदेन, सोशल मीडिया गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच की जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और आगे की पूछताछ में नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं.

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