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भारतीय रेलवे के लिए आज का दिन खास रहा. देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल नई दिल्ली से जींद के बीच सफल रहा. यह जीरो कार्बन लक्ष्य और ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. इससे पहले ट्रेन का ट्रायल सोनीपत और जींद के बीच चल रही है. इस दौरान कई सुरक्षा मानकों को जांचा और परखा गया.
ट्रेन का पहली बार दिल्ली से जींद के बीच हुआ ट्रायल.
नई दिल्ली. भारतीय रेलवे ने शुक्रवार को हाइड्रोजन ट्रेन का दिल्ली और जींद के बीच सफल ट्रायल पूरा किया. इससे पहले इस ट्रेन का ट्रायल सोनीपत और जींद के बीच किया गया था. शुक्रवार का ट्रायल इसलिए खास रहा क्योंकि पहली बार हाइड्रोजन ट्रेन दिल्ली से सोनीपत होते हुए जींद तक पहुंची. रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह ट्रायल ट्रेन की सुरक्षा और तकनीकी क्षमता को परखने के लिए किया गया.
इस दौरान ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस और ऑसिलेशन (दौड़ते समय ट्रेन की स्थिरता) का ट्रायल किया गया. इन दोनों ट्रायल के जरिए यह देखा गया कि आपात स्थिति में ट्रेन कितनी दूरी में रुकती है और अधिक गति पर उसकी स्थिरता कैसी रहती है. ट्रायल के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने सभी तकनीकी पहलुओं की निगरानी की.
साल 2030 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन
भारतीय रेलवे देशभर में रेल रूट के विद्युतीकरण का काम तेजी से कर रहा है. रेलवे का लक्ष्य साल 2030 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ना है. इसी योजना के तहत पारंपरिक ईंधन के विकल्प के रूप में हाइड्रोजन तकनीक को अपनाया जा रहा है. हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन में ईंधन सेल के माध्यम से ऊर्जा तैयार होती है और इसके बाद बचा हुआ उत्पाद केवल पानी होता है. इसी कारण इसे इनवारमेंट के अनुकूल तकनीक मानी जाती है.
तकनीकी मानकों का ट्रायल सफल
हालांकि, हाइड्रोजन तकनीक को लेकर लागत, सुरक्षा और ऑपरेशन जैसे कई सवाल भी उठाए जाते रहे हैं. रेलवे का कहना है कि इन सभी पहलुओं पर लगातार ट्रायल किए जा रहे हैं और तकनीकी मानकों को पूरी तरह परखा जा रहा है, जिससे नियमित ऑपरेशन से पहले हर जरूरी चीजें सुनिश्चित की जा सके.
रेलवे के लिए बड़ी उपलब्धि
रेल मंत्रालय के अनुसार हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना और साफ सुथरे ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है. शुरुआती फेस में इस तकनीक का इस्तेमाल पहाड़ी और संवेदनशील पर्यावरण वाले रेल रूटों पर करने की योजना है. दिल्ली-जींद के बीच सफल ट्रायल को भारतीय रेलवे की ग्रीन ट्रांसपोर्ट योजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. रेलवे का मानना है कि ट्रायल के सफल रहने पर भविष्य में हाइड्रोजन तकनीक आधारित ट्रेनों की संख्या धीरे धीरे बढ़ायी जाएगी.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें
