लिवर डोनेट नहीं कर सकते नाबालिग, फिर दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 साल के लड़के को क्यों दी डोनेशन की मंजूरी?

पिता की जान बचाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे 17 वर्षीय बेटे को बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में नाबालिग लड़के को लिवर डोनेट करने की अनुमति दे दी है. अदालत ने मंजूरी देने के साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS), वसंत कुंज को निर्देश दिया कि ट्रांसप्लांट प्रक्रिया सभी कानूनी, नैतिक और चिकित्सकीय नियमों का सख्ती से पालन करते हुए की जाए, ताकि नाबालिग डोनर की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित हो सके.

जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने यह आदेश नाबालिग की ओर से उसकी मां और प्राकृतिक अभिभावक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया. याचिका में मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 और 2014 के नियमों के तहत पिता उत्तम कुमार शॉ को लिवर का हिस्सा दान करने की अनुमति मांगी गई थी.

अदालत ने कहा कि आमतौर पर नाबालिगों द्वारा जीवित अंग दान करने की अनुमति नहीं होती, लेकिन 2014 के नियमों के Rule 5(3)(g) के तहत असाधारण चिकित्सा परिस्थितियों में ऐसा संभव है, बशर्ते संबंधित प्राधिकरण और राज्य सरकार की मंजूरी हो.

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अदालत को 29 जून 2026 का एक पत्र सौंपा, जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल और संबंधित प्राधिकरण द्वारा नाबालिग को लिवर दान की अनुमति दिए जाने की जानकारी दी गई.

कोर्ट ने रिकॉर्ड पर माना कि लड़के के पिता क्रॉनिक लिवर डिजीज, लिवर सिरोसिस, पोर्टल हाइपरटेंशन, हल्के एसाइटिस और हेपेटोसेल्युलर कार्सिनोमा (लिवर कैंसर) जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. अदालत ने कहा कि उनकी जान बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र प्रभावी इलाज है.

अदालत ने यह भी नोट किया कि परिवार के अन्य करीबी रिश्तेदारों की मेडिकल जांच की गई, लेकिन 17 वर्षीय बेटा ही एकमात्र उपयुक्त डोनर पाया गया.ऐसे में पिता की जान बचाने के लिए सभी पैरामीटर्स को ध्यान में रखने के बाद यह अनुमति दी गई.

कोर्ट ने कहा कि नाबालिग, जिसकी उम्र लगभग 17 वर्ष 6 महीने है, शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है और उसने बिना किसी दबाव या आर्थिक लालच के, केवल अपने पिता के प्रति प्रेम और लगाव के कारण स्वेच्छा से लिवर दान करने की इच्छा जताई है.

अंत में अदालत ने कहा कि यदि अनुमति नहीं दी गई, तो पिता की जान जा सकती है. इसी आधार पर हाई कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए बेटे को पिता को लिवर दान करने की अनुमति दे दी.

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