गाजियाबाद के 'कोतवाल' काल भैरव: रावण के पिता ने भी की थी यहां पूजा, प्रसाद में चढ़ती है मदिरा और सिगरेट

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Kaal Bhairav Temple Ghaziabad: ऊंची इमारतें, रफ्तार भरती गाड़ियां और आधुनिकता की चकाचौंध… अमूमन गाजियाबाद की यही छवि लोगों के जेहन में आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस हाईटेक शहर के सीने में सदियों पुरानी आस्था और रहस्यों का एक ऐसा संगम भी छुपा है, जो सीधे रावण काल से जुड़ता है? जी हां, उत्तर प्रदेश के वाराणसी और मध्य प्रदेश के उज्जैन की तरह गाजियाबाद में भी ‘काल भैरव’ का एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है, जिन्हें इस शहर का ‘कोतवाल’ कहा जाता है. आइए जानते हैं इस प्राचीन मंदिर का दिलचस्प इतिहास और इससे जुड़ी अनोखी मान्यताएं.

Kaal Bhairav Temple Ghaziabad: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद को आमतौर पर एक आधुनिक शहर के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस शहर की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों और व्यस्त सड़कों तक सीमित नहीं है. यहां कई ऐसे प्राचीन धार्मिक स्थल हैं, जिनका इतिहास और आस्था लोगों को सदियों पुरानी परंपराओं से जोड़ती है. मध्य प्रदेश के उज्जैन और उत्तर प्रदेश के वाराणसी की तरह गाजियाबाद में भी काल भैरव मंदिर स्थित है. गाजियाबाद के केला भट्टा प्रेम नगर स्थित प्राचीन काल भैरव मंदिर, दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर और दिल्ली गेट स्थित प्राचीन देवी मंदिर के पास बना हुआ है. यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच गाजियाबाद के कोतवाल के रूप में प्रसिद्ध है. मान्यता है कि काल भैरव आज भी पूरे शहर की रक्षा करते हैं और उनकी कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

रावण के पिता ऋषि विश्रवा से जुड़ा है इतिहास
मंदिर के पुजारी जगत गिरी ने बताया कि इस स्थान का इतिहास रावण काल से जुड़ा माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण के पिता ऋषि विश्रवा ने भी यहां भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना की थी. वर्षों पहले यहां घना जंगल हुआ करता था. एक दिन कुछ लोगों को इस स्थान पर भगवान काल भैरव की प्रतिमा दिखाई दी. जब प्रतिमा को पूरी तरह बाहर निकालने के लिए खुदाई शुरू हुई, तो जितनी खुदाई होती गई, प्रतिमा उतनी ही नीचे तक दिखाई देती रही. इसे लोगों ने चमत्कार माना और बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया.

प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने वालों के साथ हुई अनहोनी
मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता भी लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है. पुजारी बताते हैं कि जिन लोगों ने कभी इस प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने या हटाने की कोशिश की, उनके साथ किसी न किसी प्रकार की अनहोनी हुई. इसके बाद आसपास के लोगों की आस्था और बढ़ गई और सभी ने मिलकर यहां भव्य मंदिर बनवाया. मंदिर परिसर में आज भी एक प्राचीन नीम का पेड़ मौजूद है, जिसे भी श्रद्धालु विशेष श्रद्धा के साथ पूजते हैं.

मदिरा-सिगरेट का भोग और कुत्तों की टोली
काल भैरव मंदिर की सबसे खास बात यहां चढ़ाया जाने वाला प्रसाद है. यहां भगवान काल भैरव को दही-भल्ले, सिगरेट और मदिरा अर्पित की जाती है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद चढ़ाते हैं. मंदिर परिसर में हर समय 20 से अधिक कुत्ते भी दिखाई देते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुत्ता भगवान काल भैरव की सवारी माना जाता है, इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु इन कुत्तों को भोजन भी कराते हैं.

दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु, ऐसे पहुंचें मंदिर
गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि दिल्ली, नोएडा, मेरठ और आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं. खास अवसरों और भैरव अष्टमी पर यहां भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं. काल भैरव मंदिर, दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर और प्राचीन देवी मंदिर मिलकर गाजियाबाद की धार्मिक विरासत को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं. यदि आप इस प्राचीन मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो आपको गाजियाबाद के केला भट्टा, प्रेम नगर स्थित काल भैरव मंदिर पहुंचना होगा, जहां इतिहास, आस्था और मान्यताओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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