राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने पाकिस्तान से जुड़े गाजियाबाद जासूसी और आतंकी साजिश मामले में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है. जांच एजेंसी ने इस संवेदनशील मामले में क5 नाबालिगों के खिलाफ गाजियाबाद स्थित जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के सामने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट (चार्जशीट) दाखिल कर दी है. इन नाबालिगों पर आरोप है कि इन्होंने देश की सुरक्षा को ताक पर रखकर रेलवे स्टेशनों और कई अन्य बेहद संवेदनशील सैन्य व सार्वजनिक प्रतिष्ठानों पर सोलर पावर से चलने वाले सीक्रेट कैमरे इंस्टॉल किए थे. इस बेहद शातिर जासूसी नेटवर्क का सीधा कनेक्शन सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आकाओं से जुड़ा हुआ पाया गया है. इस पूरे मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य भारत की संप्रभुता, अखंडता, एकता और आंतरिक सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंचाना था. इस अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क के भंडाफोड़ के बाद से अब तक सुरक्षा एजेंसियां कुल 21 आरोपियों को दबोच चुकी हैं.
संवेदनशील ठिकानों पर लगाए गए थे सोलर कैमरे
जांच में सामने आया है कि इस जासूसी रैकेट के तार सीधे पाकिस्तानी खुफिया तंत्र से जुड़े हुए थे. आरोपियों ने देश के व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ अन्य वीआईपी और संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क ने निगरानी के लिए पारंपरिक कैमरों के बजाय सोलर पावर (सौर ऊर्जा) से चलने वाले हाई-टेक कैमरों का इस्तेमाल किया.
इन कैमरों में अवैध और फर्जी दस्तावेजों पर ली गई सिम कार्ड्स का उपयोग किया गया था. सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण इन कैमरों को किसी बाहरी बिजली सप्लाई की जरूरत नहीं थी, जिससे इन्हें दूरदराज या छिपे हुए स्थानों पर लंबे समय तक बिना पकड़े गए एक्टिव रखा जा सकता था. इन कैमरों के जरिए जुटाए गए लाइव फुटेज और संवेदनशील तस्वीरें मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सीधे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को रियल-टाइम में भेजी जा रही थीं.
पैसों का लालच देकर नाबालिगों का इस्तेमाल
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू युवाओं और नाबालिगों का ब्रेनवाश करना है. पाकिस्तानी हैंडलर्स ने स्थानीय गुर्गों के जरिए इन 5 नाबालिगों को चंद हजार रुपयों और भारी आर्थिक फायदों का लालच दिया था. इन किशोरों को अलग-अलग टास्क सौंपे गए थे, जिनमें सुरक्षा बलों की मूवमेंट को ट्रैक करना, सैन्य ठिकानों और रेलवे नेटवर्क की तस्वीरें खींचना तथा खुफिया तरीके से कैमरे फिट करना शामिल था.
BNS 2023 और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत कार्रवाई
NIA ने अपनी विस्तृत तफ्तीश पूरी करने के बाद गाजियाबाद के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष इन पांचों नाबालिगों के खिलाफ कड़ी धाराओं में रिपोर्ट पेश की है. यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट और देश विरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए लागू कड़े कानूनों के तहत की गई है. इस नेटवर्क में अब तक 21 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े कई मास्टरमाइंड और मददगार शामिल हैं.
सवाल-जवाब
गाजियाबाद जासूसी मामले में NIA ने क्या ताजा कार्रवाई की है?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान से जुड़े गाजियाबाद जासूसी और आतंकी साजिश मामले में शामिल 5 नाबालिगों (JCLs) के खिलाफ उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने विस्तृत जांच रिपोर्ट (चार्जशीट) दाखिल की है.
इस मामले में पकड़े गए नाबालिगों पर क्या गंभीर आरोप हैं?
इन नाबालिगों पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के मकसद से रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सोलर पावर से चलने वाले खुफिया कैमरे लगाए थे और वहां की लाइव फुटेज सीमा पार भेज रहे थे.
गाजियाबाद के इस पाकिस्तान आधारित जासूसी मॉड्यूल में अब तक कुल कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं?
इस बेहद संवेदनशील और बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क के खुलासे के बाद से सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने अब तक कुल 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में लगातार कई नए खुलासे हो रहे हैं.
आरोपियों द्वारा सोलर पावर से चलने वाले कैमरों का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था?
सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरों को किसी बाहरी बिजली कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इन्हें किसी भी रणनीतिक या छिपे हुए स्थान पर आसानी से लगाया जा सकता था. इनमें फर्जी सिम कार्ड डालकर लाइव डेटा को मोबाइल ऐप्स के जरिए सीधे पाकिस्तान भेजा जा रहा था.
