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Delhi Gurukul Khera Khurd: दिल्ली के खेड़ा खुर्द गांव में 1945 में स्थापित श्रीमध्यानंद आर्ष गुरुकुल आज भी चल रहा है. इसके लिए भर्तरी जी ने 12 बीघा जमीन दान की थी. यहां 130 बच्चों को मुफ्त शिक्षा, भोजन और आवास मिलता है. आइये जानते हैं इसके बारे में.
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के रिठाला से कुछ किलोमीटर दूर पर एक ऐसा ऐतिहासिक गांव मौजूद है. जहां पर आजादी के पहले का गुरुकुल आज भी मंत्रों के साथ गूंजता है. इस 12 बीघा जमीन पर यह गुरुकुल बना हुआ है. यहां के लोग बताते हैं कि अंग्रेजों ने इस जमीन को बर्बाद करने के बारे में कई बार सोचा था. क्योंकि जिनकी यह जमीन थी, वह इसे हमेशा से ही गुरुकुल के लिए देना चाहते थे. अंग्रेज नहीं चाहते थे कि यहां पर गुरुकुल की स्थापना हो.
इसीलिए इस जमीन को बंजर बनाने की कई बार अंग्रेजों ने कोशिश की, लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए और 1945 में इस जमीन के मालिक भर्तरी जी ने अपनी पूरी जमीन को गुरुकुल के नाम कर दिया. आज भी यह गुरुकुल पूरी आन बान शान के साथ खड़ा हुआ है. रिठाला समेत आसपास के गांव के लोग आज भी इस गुरुकुल में ही अपने बच्चों को शिक्षा दीक्षा के साथ-साथ यहां उनके रहने खाने की अच्छी व्यवस्था को देखते हुए यहीं पर उनका एडमिशन कराते हैं. आइये जानते हैं इसके बारे में.
फ्री है यहां पर रहना, खाना और पढ़ाई
यहां के इंचार्ज नीरज मान ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस गुरुकुल का नाम श्रीमध्यानंद आर्ष गुरुकुल है. जो कि खेड़ा खुर्द गांव में है. इसकी स्थापना 1945 में हुई थी. उस समय इस गुरुकुल के लिए गांव के जमींदार भर्तरी जी ने 12 बीघे जमीन गुरुकुल को दान में दी थी. इस समय यह गुरुकुल भर्तरी जी के पौत्र ब्रह्मप्रकाश की देख रेख में चल रहा है. इस समय इस गुरुकुल में 130 बच्चे और 7 शिक्षक हैं.
पूर्वी भारत से ये बच्चे पढ़ने के लिए आते है और इस गुरुकुल में सभी वेदों की पढ़ाई कराई जाती है. सभी बच्चों का खाना पीना रहना और शिक्षा गुरुकुल की तरफ से निशुल्क दी जाती है. बच्चों से कोई फीस नही ली जाती है. उन्होंने बताया कि इस समय इस गुरुकुल में करीब 200 गाय हैं, जिसमें 10 अंधी गाय भी हैं. सरकार की तरफ से इस गुरुकुल को कोई फंडिंग नही मिलती है. गुरुकुल को चलाने के लिए जनता और गांव वालों का सहयोग है, जो इतने सालों से ये गुरुकुल चल रहा है.
बच्चों को दिया जा रहा है भारतीय संस्कार
यहां के इंचार्ज नीरज मान ने बताया कि आज भी यहां बच्चों को भारतीय संस्कार दिए जा रहे हैं. बच्चों को वेदों की जानकारी दी जाती है. इसके अलावा यहां पर बच्चों को स्कूल की पढ़ाई भी कराई जाती है. माता-पिता की सेवा करने के संस्कार दिए जाते हैं. गौशाला की सेवा कराई जाती है. यहां पर गायों से निकलने वाला दूध और घी से ही भोजन भी बनता है. पूरा गांव और समाज के सहयोग से ही यह गुरुकुल चल रहा है. उन्होंने बताया कि यहां लोग चंदा देते हैं, तब खर्चा निकल जाता है, लेकिन बच्चों से या उनके माता-पिता से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है. यह पूरी तरह से निशुल्क है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
