दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है. सेक्टर-16 के जी ब्लॉक में बुधवार शाम एक निर्माणाधीन इमारत अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई. इस खौफनाक घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और भारी दहशत का माहौल बन गया. सूचना मिलते ही प्रशासन तुरंत हरकत में आया और युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया. आधी रात बीत जाने के बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, क्योंकि मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका है. भारी कंक्रीट और सरियों के विशाल जाल के कारण स्थानीय प्रशासन और बचाव दल को मलबा हटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
इस भयानक हादसे ने एक गरीब मजदूर की जान ले ली है. रेस्क्यू टीम ने भारी मशक्कत के बाद मलबे के नीचे से बयालीस वर्षीय राम किशोर को बाहर निकाला था. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत ही मृत घोषित कर दिया. राम किशोर की मौत से उनके परिवार में मातम छा गया है. वहीं, इस हादसे में एक बड़ी राहत की खबर भी सामने आई है. मलबे में फंसे पैंतीस वर्षीय रवि नाम के शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने में टीम को कामयाबी मिल गई है. रवि इस निर्माणाधीन इमारत में पीओपी का काम करता था और अचानक वह मलबे में दब गया था.
मलबे के नीचे दबा है बिल्डिंग का मालिक, चार मजदूर भी फंसे
चिंताजनक बात यह है कि इमारत का मालिक राम दुआ भी भारी मलबे में बुरी तरह दबा हुआ है. जानकारी के अनुसार, इमारत ढहते वक्त राम दुआ वहां निर्माण कार्य का जायजा ले रहे थे. मालिक के साथ-साथ साइट पर काम कर रहे करीब चार से पांच अन्य मजदूरों के भी भारी मलबे में दबे होने की प्रबल आशंका जताई गई है. रात का अंधेरा होने के बावजूद राहतकर्मी इन सभी जिंदगियों को सुरक्षित बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे मलबे की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं. मशीनों की मदद से रास्ता बनाने का प्रयास जारी है.
मेयर ने बताई हादसे की असली वजह, बिल्डिंग का एक पिलर था कमजोर
घटनास्थल का मुआयना करने के बाद दिल्ली की मेयर ने आज इस खौफनाक हादसे की पूरी जानकारी मीडिया के साथ साझा की है. मेयर के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस निर्माणाधीन इमारत का एक मुख्य पिलर काफी कमजोर था. पिलर के कमजोर होने की वजह से ही पूरी इमारत अचानक भरभराकर ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गई. उन्होंने यह भी बताया कि इस चार मंजिला बिल्डिंग का नक्शा दिल्ली नगर निगम द्वारा ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से पास कराया गया था. मलबे में बिल्डिंग मालिक और एक अन्य व्यक्ति के फंसे होने की स्पष्ट पुष्टि मेयर ने की है.
शाम 4:28 बजे पुलिस को मिली पीसीआर कॉल, तुरंत हुआ एक्शन
रोहिणी में हुए इस भयानक हादसे की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को शाम करीब चार बजकर अट्ठाईस मिनट पर मिली थी. कॉल मिलते ही प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया. बिना कोई देरी किए रोहिणी के डीसीपी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सबसे पहले पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली, ताकि राहत और बचाव कार्य में रुकावट न आए. मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तुरंत भारी अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है. इस संपत्ति की कानूनी मालिक मंजू और ऋतिका बताई गई हैं, पुलिस जांच कर रही है.
मलबे में फंसे शख्स तक पहुंचाया गया पीने का पानी और ऑक्सीजन
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दिल्ली पुलिस और बचाव कर्मियों ने कमाल का जज्बा दिखाया है. अंधेरे और भारी मलबे के बीच राहत टीम ने अंदर फंसे एक व्यक्ति से सफलतापूर्वक संपर्क स्थापित कर लिया. दहशत में फंसे उस व्यक्ति की हिम्मत बढ़ाते हुए जवानों ने सबसे पहले उसे पीने का पानी मुहैया कराया. मलबे के नीचे सांस लेने में हो रही भारी तकलीफ को देखते हुए पुलिस ने तुरंत पास के एक अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाया. एक संकरे पाइप के जरिए फंसे हुए व्यक्ति तक जीवनदायी ऑक्सीजन पहुंचाई गई. अधिकारियों ने बताया कि समय पर मिली इस ऑक्सीजन की वजह से ही उसकी जान बचाई जा सकी.
मलबा हटाने के लिए उतारी गईं भारी मशीनें, जनरेटर से की गई रोशनी
कंक्रीट के भारी स्लैब और सरियों ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद जटिल बना दिया है. हाथों और छोटे उपकरणों से इस पहाड़ जैसे मलबे को हटाना लगभग नामुमकिन था. इसलिए प्रशासन ने तत्काल कई निजी जेसीबी मशीनों और दो हाइड्रा क्रेन को मौके पर तैनात किया है. इन भारी-भरकम मशीनों की मदद से बड़े कंक्रीट स्लैब को बड़ी सावधानी से उठाया जा रहा है, ताकि नीचे दबे लोगों को कोई भी चोट न पहुंचे. शाम ढलने के बाद अंधेरे के कारण राहत कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष इंतजाम किए हैं. मौके पर शक्तिशाली जनरेटर मंगाकर पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था की है.
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात, आसपास के घर कराए गए खाली
हादसे की भयावहता को देखते हुए बचाव कार्य में कोई भी कसर नहीं छोड़ी जा रही है. स्थानीय एजेंसियों के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की विशेष प्रशिक्षित टीमों को मोर्चे पर लगाया गया है. ये टीमें अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से भारी मलबे में दबी हर जिंदगी को सुरक्षित तलाशने में जुटी हैं. सुरक्षा के कड़े मद्देनजर प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए ढही हुई इमारत के बिल्कुल आसपास स्थित अन्य मकानों को भी तुरंत खाली करवा लिया है. ताकि अगर मलबा और ज्यादा खिसके तो कोई दूसरा बड़ा जानलेवा हादसा न हो सके. फिलहाल सभी एजेंसियों का लक्ष्य मलबे में फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालना है.
