फ्रिज नहीं था, फिर भी दूध रहता था ताजा! जानें 100 साल पुराना देसी मिल्क स्टोर करने का देसी तरीका

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Old Indian Milk Storage Method : आज से 100 साल पहले जब घरों में फ्रिज नहीं होता था, तब भी लोग दूध को लंबे समय तक ताजा रखते थे. जानें दूध को खराब होने से बचाने का आसान, देसी और आज भी काम आने वाला पारंपरिक तरीका.

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पुराने समय में जैसे ही दूध घर आता था, उसे तुरंत अच्छी तरह उबाल लिया जाता था.

ilk Preservation Tips : आज के समय में दूध को ताजा रखने के लिए लगभग हर घर में फ्रिज का इस्तेमाल होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि करीब 100 साल पहले, जब फ्रिज नहीं हुआ करते थे, तब लोग दूध को खराब होने से कैसे बचाते थे? खासकर गर्मियों के मौसम में, जब तेज गर्मी की वजह से दूध कुछ ही घंटों में फट सकता है. दरअसल, हमारे बुजुर्ग एक आसान और कारगर देसी तरीका अपनाते थे, जिसकी मदद से दूध लंबे समय तक ताजा बना रहता था.

घर आते ही दूध को उबालना था पहला नियम
पुराने समय में जैसे ही दूध घर आता था, उसे तुरंत अच्छी तरह उबाल लिया जाता था. इससे दूध में मौजूद कई तरह के बैक्टीरिया कम हो जाते थे, जो दूध को जल्दी खराब करते हैं. उबालने के बाद दूध को प्राकृतिक रूप से ठंडा होने दिया जाता था और फिर उसे साफ स्टील के बर्तन या मिट्टी के घड़े में रखा जाता था.

बार बार उबालने की प्रथा
इस तरीके की सबसे खास बात यह थी कि दूध को सिर्फ एक बार उबालकर नहीं छोड़ दिया जाता था. गर्मियों में हर 8 से 10 घंटे के बाद दूध को दोबारा उबाल लिया जाता था. जरूरत पड़ने पर तीसरी बार भी उबाल दिया जाता था. इससे बैक्टीरिया की बढ़त धीमी हो जाती थी और दूध ज्यादा समय तक ताजा बना रहता था.

सही जगह पर रखना भी था जरूरी
पहले के घरों की बनावट भी दूध को सुरक्षित रखने में मदद करती थी. मोटी दीवारें, हवादार कमरे और ठंडे फर्श घर के अंदर का तापमान कम बनाए रखते थे. कई लोग दूध के बर्तन को पानी से भरी थाली में रख देते थे, जिससे हल्की ठंडक बनी रहती थी. वहीं मिट्टी के घड़े में रखा दूध भी अपेक्षाकृत ठंडा रहता था, क्योंकि घड़े की सतह से पानी धीरे-धीरे उड़ता रहता था.

छोटी-छोटी आदतें बचाती थीं दूध
बुजुर्ग कुछ आसान नियमों का भी पालन करते थे. दूध को हमेशा ढककर रखा जाता था ताकि धूल और गंदगी उसमें न जाए. दूध निकालने के लिए हमेशा साफ बर्तन का इस्तेमाल किया जाता था. अगर नया दूध पुराने दूध में मिलाना होता था, तो पहले उसे अच्छी तरह उबाल लिया जाता था. इन छोटी-छोटी बातों का असर दूध की ताजगी पर पड़ता था.

मलाई और घी का भी मिलता था फायदा
बार-बार उबालने से दूध पर मोटी मलाई जम जाती थी. घरों में इस मलाई को कई दिनों तक इकट्ठा करके मक्खन और फिर देसी घी बनाया जाता था. इस तरह दूध को सुरक्षित रखने का तरीका रसोई की परंपरा का भी हिस्सा बन गया.

आज भी काम आ सकता है यह तरीका
आज फ्रिज होने के बावजूद कई बार बिजली चली जाती है या यात्रा के दौरान दूध को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है. ऐसे समय में यह पुराना तरीका मददगार साबित हो सकता है. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में दूध को बार-बार उबालने के बजाय फ्रिज में रखना बेहतर होता है, क्योंकि बार-बार गर्म करने से कुछ गर्मी-संवेदनशील पोषक तत्व कम हो सकते हैं. फिर भी, जहां फ्रिज उपलब्ध न हो, वहां यह 100 साल पुराना देसी तरीका आज भी दूध को कुछ समय तक ताजा रखने का एक व्यावहारिक उपाय माना जाता है.

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Pranaty Tiwary

मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…और पढ़ें

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