IIT दिल्ली का कमाल! सियाचिन के जवानों के लिए बनाई खास एरोजेल जैकेट, -40 डिग्री में भी रखेगी गर्म

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IIT दिल्ली ने बनाई खास एरोजेल जैकेट, -40 डिग्री में भी जवानों को रखेगी गर्म

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IIT Delhi Aerogel Jacket Siachen: आईआईटी दिल्ली ने रक्षा तकनीक में नया कमाल करते हुए सियाचिन के जवानों के लिए एरोजेल से बनी बेहद हल्की और अत्यधिक गर्म जैकेट विकसित की है. DRDO के साथ -40 डिग्री सेल्सियस पर सफल परीक्षण पार कर चुकी यह जैकेट बिना भारी परतों के भी जवानों को कड़ाके की ठंड से बचाएगी, जिससे उनका शारीरिक बोझ कम होगा और वे शून्य से नीचे के तापमान में भी आसानी से पेट्रोलिंग कर सकेंगे.

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नई दिल्ली: देश की सुरक्षा में तैनात जवानों को सियाचिन जैसे बेहद ठंडे इलाकों में कई परतों वाले भारी कपड़े पहनने पड़ते हैं. इन कपड़ों की वजह से उनका वजन बढ़ जाता है. चलने-फिरने में परेशानी होती है. इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं ने एक खास हल्की जैकेट तैयार की है. यह जैकेट जवानों को गर्म रखने के साथ-साथ उनके शरीर की मूवमेंट भी आसान बनाएगी.

क्या है एरोजेल, जिससे बनी है यह जैकेट
आईआईटी दिल्ली की विहोमा एरोजेल लैब के शोधकर्ता सुजान सतीश कौशिक के मुताबिक इस जैकेट में एरोजेल (Aerogel) का इस्तेमाल किया गया है. एरोजेल दुनिया के सबसे हल्के पदार्थों में से एक माना जाता है. इसमें करीब 99 प्रतिशत हवा और सिर्फ 1 प्रतिशत ठोस पदार्थ होता है. यही वजह है कि यह बहुत हल्का होने के बावजूद बेहतरीन थर्मल इंसुलेशन देता है.

नासा की तकनीक से प्रेरित, लेकिन भारतीय अंदाज में
शोधकर्ताओं ने बताया कि नासा लंबे समय से सिलिका आधारित एरोजेल पर काम कर रहा है. वहीं आईआईटी दिल्ली की टीम ने प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले बायोपॉलिमर का इस्तेमाल कर नया एरोजेल तैयार किया है. इसका मकसद ऐसा कपड़ा बनाना है जो शरीर की गर्मी को लंबे समय तक बनाए रख सके.

एक जैकेट, कई परतों जितनी गर्माहट
आमतौर पर सियाचिन जैसे इलाकों में जवानों को ठंड से बचने के लिए 5 से 8 परतों वाले कपड़े पहनने पड़ते हैं. नई जैकेट में एरोजेल को इस तरह जोड़ा गया है कि कम परतों में भी उतनी ही गर्माहट मिल सके. इससे जैकेट हल्की रहती है और जवान आसानी से चल-फिर सकते हैं.

40 डिग्री तक हुआ सफल परीक्षण
शोधकर्ताओं ने इस जैकेट का परीक्षण थर्मल चैंबर में माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक किया है. परीक्षण के दौरान यह देखा गया कि जैकेट बेहद कम तापमान और तेज ठंडी हवा में भी शरीर की गर्मी को बनाए रखने में सक्षम है. इसकी थर्मल कंडक्टिविटी हवा के काफी करीब है, जबकि हवा प्राकृतिक रूप से सबसे अच्छे इंसुलेटर में मानी जाती है.

DRDO के साथ मिलकर हो रहा काम
यह जैकेट अभी प्रोटोटाइप स्टेज में है. शोधकर्ताओं ने बताया कि इस तकनीक पर पेटेंट की प्रक्रिया चल रही है. आईआईटी दिल्ली की टीम का DRDO के साथ समझौता (MoU) भी हो चुका है. पेटेंट मिलने के बाद इसे बड़े स्तर पर तैयार कर सेना और अन्य जरूरतमंद क्षेत्रों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है.

दो साल की मेहनत से तैयार हुई तकनीक
इस प्रोजेक्ट पर प्रोफेसर हारून वेंकटेशन के मार्गदर्शन में शोधकर्ताओं की टीम ने करीब दो साल तक काम किया. टीम का उद्देश्य ऐसा हल्का, लचीला और गर्म रखने वाला कपड़ा तैयार करना था, जिससे सैनिकों का बोझ कम हो और कठिन परिस्थितियों में उनकी कार्यक्षमता बेहतर हो सके.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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