AIIMS के डॉक्‍टर ने लगाई मुहर, दिल की बीमारियों के लिए वरदान है योग, हॉस्पिटल जाने से मिलती है मुक्ति

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AIIMS के डॉक्‍टर ने लगाई मुहर, दिल की बीमारियों के लिए वरदान है योग

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Yoga Help in Heart Disease: आज यानी 21 जून को अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस है. इस मौके पर देश के साथ ही विदेशों में भी बड़ी तादाद में लोगों ने योगाभ्‍यास किया. कई अध्‍ययनों में यह साबित हो चुका है कि योग कई तरह की बीमारियों से निपटने में मदद करता है.

AIIMS दिल्‍ली के कार्डियो डिपार्टमेंट में प्रोफेसर डॉक्‍टर अंबुज रॉय ने दिल की बीमारियों में योग के लाभदायक होने की बात कही है.

Yoga Help in Heart Disease: भारत की प्राचीन योग परंपरा अब आधुनिक मेडिकल साइंस की कसौटी पर भी खुद को साबित कर रही है. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जहां दुनिया भर में करोड़ों लोग योगाभ्यास के जरिए भारत की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाते हैं, वहीं मेडिकल क्षेत्र में योग की सबसे बड़ी उपलब्धि लैब, क्लिनिकल ट्रायल्स और मेडिकल जर्नल्स में दर्ज हो रही है. योग अब केवल आस्था या परंपरा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि धीरे-धीरे साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य हस्तक्षेप के रूप में स्थापित हो रहा है. हाल के कुछ सालों में किए गए स्‍टडी में हार्ट डिजीज में योग के कारगर होने की बात सामने आई है.

AIIMS दिल्‍ली के कार्डियोलोजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर डॉक्‍टर अंबुज रॉय ने योग से होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी है. मेडिकल में योग पर वैज्ञानिक शोध का दायरा पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योग पर प्रकाशित लगभग 90 प्रतिशत साइंटिफिक रिसर्च पेपर पिछले 20 वर्षों में सामने आए हैं. पिछले 10 सालों में यह रफ्तार और तेज हुई है. डॉक्‍टर अंबुज ने बताया कि बायोमेडिकल रिसर्च के प्रमुख सर्च इंजन पबमेड में दर्ज योग संबंधी क्लिनिकल ट्रायल्स की संख्या हालिया दशक में उससे पहले के दशक की तुलना में दोगुनी से अधिक हो चुकी है. यह रुझान बताता है कि योग को अब आधुनिक मेडिकल रिसर्च की कसौट पर कसा जाने लगा है.

‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ में छपे एक लेख में डॉक्‍टर अंबुज बताते हैं कि हृदय रोग यानी कार्डियोवस्‍कुलर डिजीज में योग पर उभरते साक्ष्य खास महत्व रखते हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में किसी भी दावे को कठोर वैज्ञानिक मानकों पर कसकर ही स्वीकार किया जाता है. इसी संदर्भ में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMRF) द्वारा फाइनेंस ‘योगा-केयर’ ट्रायल को एक मील का पत्थर माना जा रहा है. यह अध्ययन 2020 में जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हुआ था. भारत के 24 केंद्रों में लगभग 4000 हार्ट अटैक से उबर रहे मरीजों पर किए गए इस परीक्षण को योग बेस्‍ड कार्डियक रिहैबिलिटेशन पर अब तक का सबसे बड़ा रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल माना जाता है. अध्ययन में शामिल मरीजों ने हार्ट अटैक के बाद बेहतर स्वास्थ्य स्थिति और सामान्य जीवन में अपेक्षाकृत जल्दी वापसी दर्ज की. जिन मरीजों ने 75 प्रतिशत या उससे अधिक योग सत्रों में हिस्सा लिया, उनमें प्रतिकूल हृदय संबंधी घटनाएं 40 प्रतिशत तक कम देखी गईं. इस ट्रायल की अहमियत केवल इसके नतीजों में नहीं, बल्कि इस तथ्य में भी है कि इसने साबित किया कि योग का मूल्यांकन भी दवाओं और मेडिकल उपकरणों की तरह कठोर वैज्ञानिक मानकों पर किया जा सकता है.

हालिया ‘केयरमैच’ एनालिसिस ने संकेत दिया कि योग पारंपरिक कार्डियक रिहैबिलिटेशन जितना ही लाभकारी हो सकता है. इस विश्लेषण के मुताबिक योग आधारित पुनर्वास से जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ और दोबारा अस्पताल में भर्ती होने की आशंका में करीब 30 प्रतिशत तक कमी देखी गई. भारत जैसे देश में यह निष्कर्ष खास मायने रखता है, क्योंकि आम कार्डियक रिहैबिलिटेशन सर्विसेज महंगी हैं और छोटे शहरों व ग्रामीण इलाकों में उनकी पहुंच सीमित है, जबकि योग अपेक्षाकृत सस्ता, सुलभ और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य विकल्प है. शोध यह भी बताते हैं कि योग शरीर में ऑटोनॉमिक संतुलन बेहतर करता है, हार्ट-रेट वैरिएबिलिटी बढ़ाता है, तनाव से जुड़े हार्मोनल सीक्रेशन को कम करता है और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है. ये सभी कारक कार्डियो हेल्‍थ के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इतना ही नहीं, 49 स्‍टडी के एक संयुक्त विश्लेषण में योग से औसतन सिस्टोलिक ब्‍लड प्रेशर में 5 मीमी-एचजी और डायस्टोलिक ब्‍लड प्रेशर में 3 मीमी-एचजी की कमी दर्ज की गई. विशेषज्ञों के अनुसार, ब्‍लड प्रेशर में इतनी कमी भी स्ट्रोक और हार्ट अटैक के जोखिम को उल्लेखनीय रूप से घटा सकती है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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