1 कॉल से शुरू हुई कहानी, पुलिस भी बनी मोहरा… न कोई हीरो, न कोई विलेन, 18 साल पुरानी सबसे तगड़ी थ्रिलर फिल्म

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सिनेमा प्रेमियों के लिये ‘न्यूज 18’ लाया है बेहद खास सीरीज ‘फिल्म फाइल्स’. जहां बात होती है शानदार फिल्मों की कहानियों की. अगर आपको कहानियां पढ़ना अच्छा लगता है तो आप सही पते पर आए हैं. आज 18 साल पुरानी फिल्म की बात होगी, जिसके थ्रिलर ने सबको चौंका दिया है.

ऐसी फिल्म जहां कोई विलेन नहीं है और कोई हीरो नहीं है. यहां तक की फिल्म में एक भी गाना नहीं था. कहानी से लेकर एक्टिंग तक सबकुछ इतना जबरदस्त था कि फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड भी जीता था. तो चलिए बताते हैं इस थ्रिलर फिल्म के बारे में.

सिर्फ 1 कॉल के साथ कहानी शुरू होती है और पूरी फिल्म में ट्विस्ट भरे हैं. इस मूवी का नाम है A Wednesday (2008). इसका निर्देशन किया था सुपरहिट डायरेक्टर नीरज पांडे ने. वही नीरज पांडे जिन्होंने क्राइम, थ्रिलर और कॉप सीरीज में महारथ हासिल की है. वह बेशक खाकी हो, स्पेशल ऊप्स हो या फिर स्पेशल 26.

‘ए वेडनेसडे’ साल 2008 में रिलीज हुई. इस थ्रिलर फिल्म को रोनी स्क्रूवाला ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म में कोई बड़ा सुपरस्टार नहीं था. बल्कि एक्टिंग जगत के गुरु माने जाने वाले नसीरुद्दीन शाह थे जिन्होंने लीड रोल प्ले किया. उनका साथ दिया था अनुपम खेर ने.

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‘ए वेडनेसडे’ एक दिलचस्प फिल्म थी. जिसमें कोई विलेन या कोई गाना नहीं था. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने जिस कॉमन मैन का किरदार प्ले किया था, वो कोई विलेन नहीं था. बल्कि अपने हक की लड़ाई लड़ रहा था.

‘ए वेडनेसडे’ के लिए नीरज पांडे को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर इंदिरा गांधी अवॉर्ड मिला तो नेशनल अवॉर्ड भी जीता. फविल्म में अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह के अलावा जिम्मी शेरगिल, आमिर बशीर, दीपक शॉ, पराग त्यागी से लेकर विरेंद्र सक्सेना जैसे सितारे भी थे.

फिल्म की पूरी कहानी एक कॉमन मैन (नसीरुद्दीन शाह) के इर्द-गिर्द घूमती है. एक दिन पुलिस स्टेशन में फोन आता है. वह मुंबई में बम धमाके की धमकी देकर पुलिस को चुनौती देता है.

कॉमन मैन पुलिस से चार आतंकियों को रिहा करने की मांग करता है. फिल्म में कई मोड़ आते हैं. पुलिस उसे पकड़ने में एड़ी चोटी का जोर लगा देती है. लेकिन वह हर कदम पर उनसे आगे रहता है. आखिर में खुलासा होता है कि उसका मकसद आतंकियों को सजा देना है, क्योंकि वह सिस्टम से परेशान है.

इस तरह ए वेडनसडे की कहानी एक कॉमन मैन के गुस्से और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाती है. निर्देशक ने तमाम ट्विस्ट के साथ इसे पिरोया है. फिल्म का क्लाइमैक्स दर्शकों को इंप्रेस करता है.

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