नई दिल्ली: दिल्ली में घर या कॉमर्शियल बिल्डिंग बनाने वालों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है. दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने नगर निगम यानी एमसीडी से पिछले पांच वर्षों में पास किए गए भवन नक्शों का रिकॉर्ड मांगा है. जल बोर्ड को शक है कि दिल्ली में हजारों इमारतों का निर्माण बिना अनिवार्य टैक्स चुकाए ही कर लिया गया. घर बनाते समय इंफ्रास्ट्रक्चर फंड चार्ज यानी आईएफसी देना जरूरी होता है. ज्यादातर मामलों में इस नियम को ताक पर रखा गया. इस बड़े खुलासे के बाद दिल्ली में हड़कंप मच गया है. जिन लोगों ने यह सरकारी शुल्क नहीं चुकाया है उन पर भारी पेनाल्टी लग सकती है. सरकार अब सख्त एक्शन के मूड में है. करीब दो हजार करोड़ रुपये की रिकवरी की तैयारी कर ली गई है.
आखिर एमसीडी के रिकॉर्ड की जांच में जल बोर्ड को ऐसा क्या मिल गया?
जल बोर्ड के सूत्रों के मुताबिक एमसीडी से मिले शुरुआती दो साल के रिकॉर्ड में ही बड़े झोल सामने आए हैं. जांच में पता चला है कि लगभग 70 प्रतिशत मामलों में आईएफसी चार्ज बिल्कुल भी जमा नहीं किया गया. आसान भाषा में कहें तो जिन भवनों से यह टैक्स वसूला जाना चाहिए था उनका पेमेंट जीरो मिला है.
अब तक करीब 300 ऐसी प्रॉपर्टी चिन्हित की जा चुकी हैं. इन इमारतों पर 20 से 50 करोड़ रुपये तक का आईएफसी बकाया है.
शुरुआती आकलन के मुताबिक यह गड़बड़ी करीब 2000 करोड़ रुपये के सरकारी राजस्व की हो सकती है. इसी वजह से अब जल बोर्ड ने एमसीडी से पूरे दस साल का डाटा भी मांग लिया है.
क्या दिल्ली में छोटे घरों पर भी लागू होता है आईएफसी टैक्स का यह नियम?
दिल्ली में बिल्डिंग निर्माण को लेकर कुछ खास नियम बनाए गए हैं. अगर आप 200 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर घर बना रहे हैं तो आपको आईएफसी नहीं देना होता. यह नियम सिर्फ बड़े निर्माण और विशेषकर कॉमर्शियल इमारतों पर अनिवार्य रूप से लागू होता है.
जो इमारतें 3000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली हैं उनकी अलग से जांच की जा रही है. ऐसी बड़ी इमारतों में बल्क यूटिलिटी कनेक्शन लगाए जाते हैं. इन पर टैक्स की देनदारी सबसे ज्यादा बनती है. यही कारण है कि अब जल बोर्ड की टीम हर एक बड़े प्रोजेक्ट की फाइल को दोबारा खंगाल रही है.
टैक्स का भुगतान नहीं करने पर भवन मालिकों के खिलाफ क्या होगा एक्शन?
इस बड़े खुलासे के बाद जल बोर्ड ने रिकवरी का पूरा प्लान तैयार कर लिया है. सबसे पहले उन सभी भवन मालिकों की लिस्ट बनेगी जिनका आईएफसी टैक्स बकाया है. इसके बाद इन सभी को सरकारी नोटिस भेजा जाएगा.
अगर नोटिस के बाद भी किसी ने बकाया राशि जमा नहीं की तो कड़ा एक्शन लिया जाएगा. सरकार जरूरत पड़ने पर ऐसी सभी इमारतों को सील कर सकती है. बात सिर्फ सीलिंग तक नहीं रुकेगी. कानूनी प्रक्रिया के तहत बकाया वसूलने के लिए प्रॉपर्टी की नीलामी भी की जा सकती है.
इस मामले में जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा, ‘दिल्ली में सरकारी राजस्व की सुरक्षा और प्रत्येक देय राशि की वसूली हमारी सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है’. उन्होंने आगे कहा, ‘संबंधित पक्षों को पहले नोटिस जारी किए जाएंगे और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा’.
मंत्री ने साफ किया कि नियमों का पालन नहीं होने पर कानून के तहत सीलिंग और नीलामी जैसी कार्रवाई जरूर की जाएगी.
