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दिल्ली के सरकारी अस्पताल DSCI में कैंसर के इलाज के लिए ब्रैकीथेरेपी की शुरुआत की गई है. आमतौर पर कैंसर का इलाज इस थेरेपी से कराने वाले मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में करीब 3 लाख रुपये तक का खर्च करना पड़ जाता है. जबकि इस अस्पताल में मुफ्त इलाज मिलेगा.
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में आई इलाज की नई तकनीक, मुफ्त मिलेगा उपचार.
कैंसर की बीमारी जैसे-जैसे बढ़ रही है, उसके इलाज के लिए नई-नई तकनीकें भी आ रही हैं. हालांकि दवाओं के साथ-साथ कई बार नई टैक्नोलॉजी महंगी होने के कारण मरीजों की जेब पर भारी बोझ पड़ता है. ऐसे में उम्मीद की जाती है कि कैंसर के इलाज की अपडेटेड तकनीकें सरकारी अस्पतालों में आएं, ताकि मरीजों को मुफ्त इलाज मिल सके. अब इसी को लेकर एक राहत की खबर आई है. दिल्ली के सरकारी अस्पताल दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में (डीएससीआई) में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ब्रैकीथेरेपी को शुरू किया गया है.
डीएससीआई में शुरू की गई यह सुविधा कैंसर रोगियों को अत्याधुनिक, सटीक एवं गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस थैरेपी से संस्थान में 09 जुलाई 2026 को पहला ब्रैकीथेरेपी केस सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसके बाद इसकी सेवाओं को अस्पताल में सुचारू कर दिया गया है.
क्या होती है ब्रैकीथेरेपी
ब्रैकीथेरेपी एक रेडिएशन थेरेपी तकनीक है, जिसमें विकिरण स्रोत को ट्यूमर के भीतर या उसके एकदम पास लगाया जाता है. इससे कैंसरग्रस्त ऊतकों (टिशू) पर ज्यादा प्रभावी रेडिएशन दिया जा सकता है, जबकि आसपास के स्वस्थ टिशू को न्यूनतम क्षति पहुंचती है. यह उपचार विशेष रूप से गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल), एंडोमेट्रियल, और अन्य चयनित कैंसरों के उपचार में काफी कारगर है.
इसे लेकर संस्थान की लिंक ऑफिसर टू डायरेक्टर डॉ. सविता अरोड़ा ने बताया कि ब्रैकीथेरेपी से इलाज में सफलता मिलने के बाद इसे शुरू किया गया है और यह अस्पताल के लिए बड़ी उपलब्धि है. इस सेवा के शुरू होने से कैंसर रोगियों को सुरक्षित और समयबद्ध उपचार उपलब्ध होगा. साथ ही पूरी कैंसर देखभाल एक ही स्थान पर मिल सकेगी.
प्राइवेट में खर्च हो जाते हैं 3 लाख रुपये
क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख (एचओडी) डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने बताया कि ब्रैकीथेरेपी आधुनिक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी का एक अभिन्न हिस्सा है. डीएससीआई (DSCI) में यह सुविधा दोबारा उपलब्ध होने से अब कई मरीजों को अत्यंत सटीक, वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार यहीं मिल सकेगा और उन्हें इलाज के लिए अन्य केंद्रों में रेफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.
उन्होंने बताया कि डीएससीआई में यह मेडिकल फेसिलिटी मुफ्त है, जबकि प्राइवेट में अगर इस थरेपी से इलाज कराया जाता है और कई सेशंस के अधिकतम 3 लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं. ऐसे में अब यहां इलाज शुरू होना कैंसर मरीजों के लिए राहत की बात है.
अस्पताल में यह सुविधा अनुभवी रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल फिजिसिस्ट, रेडिएशन टेक्नोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य विशेषज्ञों की समर्पित टीम द्वारा संचालित की जाएगी.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें
