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Noida Latest News: आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों के प्रोत्साहन राशि में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है. आरोप है कि सर्जनों के हिस्से की रकम अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों (EMO) के खातों में ट्रांसफर कर दी गई.
डॉक्टरों ने डीएम और सीएमओ से की शिकायत (सांकेतिक तस्वीर)
नोएडा: आयुष्मान भारत योजना में जिला अस्पताल के भीतर धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. आरोप है कि पिछले करीब छह महीनों से ऑपरेशन करने वाले सर्जनों को मिलने वाला बोनस उन्हें देने के बजाय ऐसे डॉक्टरों के खातों में भेजा गया, जिनका सर्जरी से कोई संबंध ही नहीं था.
जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों को इस दौरान नाममात्र की राशि मिली. वहीं दूसरी ओर आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी (EMO) के खातों में किस्तों में करीब दो लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए. जब सर्जनों ने आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का हिसाब मांगा, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ.
डॉक्टरों ने डीएम और सीएमओ से की शिकायत
मामले का पता चलते ही अस्पताल के कई सर्जनों ने जिलाधिकारी मेधा रूपम और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मदन मोहन त्रिपाठी को लिखित शिकायत दी. शिकायत में कहा गया कि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों को उनका भुगतान नहीं मिला, जबकि दूसरे अधिकारियों के खातों में लगातार रकम भेजी जाती रही.
शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दे दिए. तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है, जिसमें डॉ. आर.के. सिंह, डॉ. एच.एन.एम. लवानिया और डॉ. चैतन्य देव को शामिल किया गया है. समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं.
कैसे खुली गड़बड़ी?
अस्पताल में तैनात डॉ. आलोक, डॉ. रेनू अग्रवाल, डॉ. अनुराग समेत अन्य सर्जनों ने जब आयुष्मान योजना के भुगतान का पूरा रिकॉर्ड मांगा, तब सामने आया कि उनके हिस्से की प्रोत्साहन राशि किसी और के खातों में चली गई. डॉक्टरों का सवाल है कि जब ईएमओ का ऑपरेशन या सर्जरी से कोई संबंध नहीं है, तो आखिर उनके खातों में यह पैसा किस आधार पर भेजा गया.
EMO ने क्या कहा?
इस मामले में जिन ईएमओ के नाम सामने आए हैं, उनमें डॉ. नेहा शर्मा और डॉ. आद्या सिंह शामिल हैं. डॉ. नेहा शर्मा का कहना है कि उनके खाते में केवल एक बार पैसे आए थे. उनका दावा है कि उनका आयुष्मान भारत योजना से कोई संबंध नहीं है और उन्हें नहीं पता कि राशि उनके खाते में कैसे पहुंची. उन्होंने कहा कि अगर गलती से पैसा आया है तो वह उसे वापस करने के लिए तैयार हैं. वहीं डॉ. आद्या सिंह ने भी कहा कि उन्हें इस ट्रांसफर की कोई जानकारी नहीं है. उनके मुताबिक, उन्हें नहीं मालूम कि उनके खाते में यह रकम कैसे जमा हुई.
जांच के बाद होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यह साफ होगा कि मामला तकनीकी लापरवाही का है या फिर किसी ने जानबूझकर गड़बड़ी की है. अगर जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिन डॉक्टरों का भुगतान रुका है, उन्हें उनकी प्रोत्साहन राशि दिलाने की भी प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…
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