नई दिल्ली: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में हवाई सफर की तस्वीर बदलने वाली है. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सालों में यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को काफी हद तक कम करेगा.
2030 तक तेजी से बढ़ेगा एयर ट्रैफिक
रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दिल्ली-एनसीआर के करीब 8 फीसदी एयर ट्रैफिक को संभाल सकता है. वहीं साल 2030 तक इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 17 फीसदी तक पहुंच सकती है. वैसे उस वक्त तक दिल्ली-एनसीआर में हवाई सफर करने वालों की संख्या करीब 13.5 करोड़ तक पहुंच सकती है.
दिल्ली, नोएडा और आसपास के शहरों को मिलेगा बड़ा फायदा
एविएशन कंसल्टेंसी फर्म Landrum & Brown ने अपनी स्टडी में बताया है कि शुरुआत में यह एयरपोर्ट मुख्य रूप से दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के लोगों के लिए सुविधाजनक रहेगा, क्योंकि इस एयरपोर्ट से लोग सीधे अपनी यात्रा शुरू करेंगे और यहीं उतरेंगे.
IGI एयरपोर्ट पर कम होगा दबाव
फिलहाल, दिल्ली का IGI एयरपोर्ट, एयरलाइंस की पहली पसंद बना रहेगा, लेकिन जैसे-जैसे वहां यात्रियों की संख्या बढ़ेगी और क्षमता पूरी होने लगेगी, वैसे-वैसे नई उड़ानें नोएडा एयरपोर्ट की तरफ शिफ्ट होंगी. इससे यात्रियों को भीड़ और लंबी वेटिंग से राहत मिल सकती है.
एयरलाइंस दोनों एयरपोर्ट्स से चलाएंगी फ्लाइट्स
रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरलाइंस धीरे-धीरे अपनी फ्लाइट्स को दोनों एयरपोर्ट्स के बीच बांट सकती हैं. इससे यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और दिल्ली-एनसीआर की एयर कनेक्टिविटी पहले से बेहतर होगी.
भविष्य में बन सकता है बड़ा एविएशन हब
फिलहाल, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भविष्य में एक बड़े एविएशन हब के तौर पर भी देखा जा रहा है. आने वाले वर्षों में यहां घरेलू ही नहीं, बल्कि इंटरनेशल यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी तेजी से बढ़ सकती है.
