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Tahir Hussain Delhi Riots Case Sentence Highlights: आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा हत्याकांड में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन की सजा को लेकर कड़कड़डुमा कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. दिल्ली पुलिस की फांसी की मांग और बचाव पक्ष की दलीलों पर दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी है. अब जज साहब 31 जुलाई को दिल्ली दंगों से जुड़े इस मामले में सजा का ऐलान करेंगे. पूरी दिल्ली की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट दोषियों को फांसी की सजा सुनाता है या फिर उम्रकैद की.
ताहिर को दोषी करार दिया जा चुका है.
नई दिल्ली. साल 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए दंगों के दौरान इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में 31 जुलाई को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी. अभियोजन पक्ष दिल्ली पुलिस ने पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों के लिए फांसी यानी मृत्युदंड की मांग की है. कड़कड़डूमा कोर्ट में सजा पर जारी बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने इस अपराध को क्रूर और ठंडे दिमाग से दिया गया अंजाम करार दिया है. सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट के सामने दलील दी कि हमलावरों ने अंकित शर्मा के साथ चरम क्रूरता की थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, दंगों के दौरान आरोपियों ने जल्लादों जैसा व्यवहार किया, इसलिए इस मामले में किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं बचती. उधर, बचाव पक्ष यानी ताहिर के वकील का कहना है कि इस मामले में केस नहीं बतना है. उन्हें गलत मुकदमे में फंसाया गया है.
ताहिर हुसैन की सजा पर कोर्ट में बहस लाइव अपडेट
31 जुलाई को ताहिर की सजा पर फैसला: साल 2020 के दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. कड़कड़डूमा कोर्ट इस मामले में 31 जुलाई को सजा का ऐलान करेगी. आज अदालत में दिल्ली पुलिस द्वारा मांगी गई फांसी की सजा और बचाव पक्ष की दलीलों पर दोनों पक्षों की तरफ से बहस पूरी हो गई. अदालत में अब यह तय होना बाकी है कि पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों को मृत्युदंड मिलेगा या फिर उम्रकैद. 31 जुलाई को कोर्ट के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं.
दिल्ली पुलिस का रुख: कड़कड़डूमा कोर्ट में सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की. पुलिस ने अपराध को बेहद क्रूर, नृशंस और कोल्ड-ब्लडेड करार देते हुए कहा कि आरोपियों ने जल्लादों और जानवरों जैसा व्यवहार किया. अंकित शर्मा के शरीर पर 51 जख्म मिले थे, जिनमें 7 जानलेवा थे और 16 धारदार हथियार से दिए गए थे. अंकित के शरीर से कपड़े उतारकर उनकी बेहद बर्बरता से हत्या की गई, इसलिए पुलिस के अनुसार यह मामला बिना किसी नरमी के “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में आता है.
ताहिर हुसैन के वकील का विरोध: ताहिर हुसैन के वकील ने दिल्ली पुलिस की फांसी की मांग का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि हर मामले में मृत्युदंड की सजा देना कानूनन उचित नहीं है और इस केस में भी फांसी की सजा की परिस्थिति नहीं बनती है. बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामले में कुल 91 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद कोर्ट ने 11 में से केवल 6 आरोपियों को दोषी करार दिया. बचाव पक्ष ने कोर्ट से आग्रह किया कि सजा तय करते समय इन तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर ध्यान रखा जाए.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस ने बताया कि अंकित शर्मा के शरीर पर चोटों के 51 निशान मिले थे, जिनमें 7 जानलेवा घाव थे और 16 घाव धारदार हथियारों से दिए गए थे. पुलिस ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर यानी दुर्लभ से दुर्लभतम मामला बताते हुए दोषियों को फांसी की सजा देने की पुरजोर वकालत की है. यह मामला दयालपुर थाने में अंकित के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ था. 25 फरवरी 2020 को ड्यूटी से लौटने के बाद अंकित बाहर निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे. बाद में उनका शव खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था. जांच में सामने आया कि हिंसक भीड़ उन्हें खींचकर ले गई और हत्या के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया. कोर्ट ने (ताहिर हुसैन), नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण और दंगा भड़काने का दोषी ठहराया है. फिलहाल अदालत में सजा की अवधि पर बहस जारी है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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