अब जानवरों की खाल से नहीं, केले के छिलकों से बनेगा लेदर, रामजस कॉलेज के छात्रों की खास खोज- प्लांट बेस्ड लेदर

दिल्ली. अगर आने वाले समय में आपका बैग, बेल्ट या वॉलेट जानवरों की खाल से नहीं, बल्कि केले के छिलकों से बना हो, तो हैरान मत होइए. दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के छात्रों ने ऐसा ही एक अनोखा प्रयोग किया है. छात्रों ने केले के छिलकों से प्लांट-बेस्ड लेदर तैयार किया है, जिसे वे भविष्य में एनिमल लेदर का मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बनाना चाहते हैं. यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक कॉलेज प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और रोजगार सृजन जैसी बड़ी सोच से जुड़ा हुआ है. इस प्रोजेक्ट का नाम सेहर रखा गया है, जिसका मतलब है एक नई और बेहतर शुरुआत.

प्लांट-बेस्ड लेदर बनाने का आइडिया क्यों आया
प्रोजेक्ट लीडर नमन बताते हैं कि उन्होंने अगस्त 2025 में इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया. उनका मकसद ऐसा लेदर बनाना था, जिससे जानवरों की खाल पर डिपेंडेंस कम हो और एनवायरनमेंट को होने वाला नुकसान कम से कम हो.

नमन के मुताबिक, ट्रेडिशनल लेदर प्रोडक्शन में हजारों लीटर पानी लगता है. जानवरों की खाल को साफ करने और प्रोसेस करने के लिए कई तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. ये केमिकल्स बाद में एनवायरनमेंट और पानी के सोर्स को गंदा करते हैं. इसलिए, उनकी टीम ने एक ऐसा ऑप्शन डेवलप करने के बारे में सोचा, जो सस्टेनेबल और नेचर के लिए सेफ दोनों हो.

आम, अनानास और संतरे से नहीं मिली सफलता
छात्रों ने बताया कि सफर बिल्कुल आसान नहीं था. टीम ने शुरुआत में आम, अनानास, नारियल और संतरे के छिलकों पर कई प्रयोग किए. लेकिन किसी भी फल के छिलके से वह मजबूती और मोटाई नहीं मिल पाई, जिसकी उन्हें जरूरत थी. कई महीनों तक लगातार रिसर्च, असफल प्रयोग और नए-नए प्रोटोटाइप बनाने के बाद आखिरकार केले के छिलकों से उन्हें मनचाहा परिणाम मिला. लगभग एक साल की मेहनत के बाद टीम ऐसा प्लांट-बेस्ड लेदर बनाने में सफल हुई, जो मजबूत और उपयोगी साबित हुआ.

सिर्फ दो दिन में तैयार हो जाता है यह लेदर
छात्रों के मुताबिक, केले के छिलकों से लेदर बनाने की प्रक्रिया करीब दो दिन में पूरी हो जाती है. सबसे पहले केले के छिलकों को प्रोसेस करके उनका पेस्ट तैयार किया जाता है. इसके बाद उसे एक विशेष प्रक्रिया से गुजारकर धूप में सुखाया जाता है. सूखने के बाद यह लेदर जैसी शीट का रूप ले लेता है. फिलहाल टीम इसकी मजबूती और फ्लेक्सिबिलिटी को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है, ताकि बड़े स्तर पर इसका उत्पादन किया जा सके.

पर्यावरण को कैसे होगा फायदा
इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण को दो बड़े फायदे हो सकते हैं. पहला, इससे जानवरों की खाल से बने लेदर की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे जानवरों का शोषण कम हो सकता है. दूसरा, इससे केले के छिलकों जैसे ऑर्गेनिक कचरे का अच्छा इस्तेमाल होगा. यह कचरा आमतौर पर फेंक दिया जाता है, लेकिन अब इसे एक काम के प्रोडक्ट में बदला जा सकता है. स्टूडेंट्स अलग-अलग जगहों से केले के छिलके इकट्ठा कर रहे हैं और उनका इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे वेस्ट मैनेजमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा.

किन-किन चीजों में होगा इस्तेमाल
टीम अभी इस लेदर से कई तरह के प्रोडक्ट बनाने की तैयारी कर रही है. इनमें शामिल हैं वॉलेट, बेल्ट, बैग, बुकमार्क, फैशन एक्सेसरीज, छोटे लाइफस्टाइल प्रोडक्ट. स्टूडेंट्स का दावा है कि शुरुआती टेस्टिंग में इसकी मजबूती जानवरों के लेदर के काफी करीब है. इसे और बेहतर बनाने के लिए आने वाले महीनों में और रिसर्च की जाएगी.

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