नई दिल्ली: खाते में राशन का पैसा आते ही अगर कोई घर का मुखिया उसे राशन के बजाय शराब, जुए या किसी अन्य फिजूलखर्ची में उड़ा देता था तो अब उसकी यह चालाकी नहीं चलेगी. अब दिल्ली सरकार जो पैसा भेजेगी उससे सिर्फ और सिर्फ गेहूं और चावल ही खरीदा जा सकेगा, दुकान पर खड़ा होकर कोई चाहकर भी गोलगप्पे या सिगरेट के लिए उस पैसे को ट्रांसफर नहीं कर पाएगा. दिल्ली की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री (रेखा सरकार) एक ऐसा अचूक डिजिटल ताला लगाने जा रही हैं जो सीधे गरीब के पेट तक अनाज पहुंचाना सुनिश्चित करेगा. दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के खाद्य विभाग (DoFPD) ने मिलकर राजधानी में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की डिजिटल करेंसी यानी CBDC (e₹) को राशन व्यवस्था में लागू करने का पूरा मास्टरप्लान तैयार कर लिया है.
नए लॉक्ड डिजिटल सिस्टम की 5 मुख्य बातें
• सिर्फ राशन दुकान पर चलेगा यह रुपया: यह डिजिटल रुपया ‘पर्पज-स्पेसिफिक’ होगा. यानी आपके वॉलेट में मौजूद इस पैसे को केवल अधिकृत सरकारी राशन दुकान (FPS) का QR कोड ही स्वीकार कर सकेगा.
• मर्जी से खर्च करने पर पूरी तरह रोक: आम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) में पैसा सीधे बैंक खाते में आता है, जिसे लोग अपनी मर्जी से कहीं भी खर्च कर लेते थे. लेकिन नई व्यवस्था में राशन की सब्सिडी का पैसा किसी दूसरे काम में इस्तेमाल होना नामुमकिन होगा.
• सीधे डिजिटल वॉलेट में आएगी सब्सिडी: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के लाभार्थियों को चावल पर ₹44.57 प्रति किलो और गेहूं पर ₹30.13 प्रति किलो की दर से मिलने वाली सब्सिडी सीधे उनके ई-वॉलेट में भेजी जाएगी.
• राशन कार्ड की आय सीमा हुई ₹2.50 लाख: सरकार ने राशन कार्ड (PHH श्रेणी) के लिए सालाना पारिवारिक आय की सीमा को ₹1.20 लाख से बढ़ाकर ₹2.50 लाख करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे दिल्ली के लाखों कामकाजी गरीब इस दायरे में आ जाएंगे.
• बिना इंटरनेट भी भुगतान संभव: लाभार्थी फेयर प्राइस शॉप पर जाकर आसानी से QR कोड स्कैन करके या मोबाइल पर आए SMS-आधारित OTP के जरिए बिना किसी नकद लेनदेन के अपना राशन ले सकेंगे.
क्यों गेम चेंजर है यह पर्पज-स्पेसिफिक मनी?
आर्थिक और सामाजिक सुधार के लिहाज से इस तकनीक को दुनिया भर में सबसे क्रांतिकारी माना जा रहा है. दिल्ली जैसे महंगे शहर में अक्सर यह शिकायतें आती थीं कि सरकार की तरफ से मिलने वाली वित्तीय मदद या सब्सिडी का दुरुपयोग परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा गलत आदतों में कर दिया जाता है, जिससे महिलाएं और बच्चे भूखे रह जाते हैं. इस डिजिटल करेंसी (e₹) के आने से पैसे का दुरुपयोग शून्य (Zero) हो जाएगा क्योंकि यह पैसा प्रोग्रामेबल है यानी इसे जिस काम के लिए बनाया गया है, यह सिर्फ वही काम करेगा.
इसके अलावा, दिल्ली की वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखें तो यहां एक अकुशल मजदूर की न्यूनतम मासिक मजदूरी ₹18,000 से अधिक है, जिसके कारण उसकी सालाना आय ₹2.16 लाख तक पहुंचच जाती है. ₹1.20 लाख की पुरानी सीमा के कारण ये मजदूर राशन कार्ड के लिए पात्र नहीं रहते. अब दिल्ली खाद्य सुरक्षा नियम, 2026 के नियम 3(1) में संशोधन कर आय सीमा ₹2.50 लाख करने से 64.93 लाख मौजूदा लाभार्थियों के साथ-साथ हजारों नए जरूरतमंद परिवारों को भी सुरक्षा कवच मिल जाएगा. 1,943 सरकारी राशन दुकानों पर इस सिस्टम के आने से पूरा लेन-देन रियल-टाइम ट्रैक होगा, जिससे राशन डीलरों द्वारा होने वाली हेराफेरी पर हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी.
सवाल-जवाब
अगर किसी लाभार्थी को राशन नहीं खरीदना है, तो क्या वह इस डिजिटल रुपये को बैंक खाते में ट्रांसफर करके कैश निकाल सकता है?
बिल्कुल नहीं. यही इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत है. सरकार द्वारा राशन के लिए दी गई डिजिटल करेंसी नॉन-ट्रांसफरेबल होगी. इसे आप न तो किसी दूसरे के बैंक खाते में भेज सकते हैं और न ही एटीएम से कैश के रूप में निकाल सकते हैं. इसका एकमात्र उपयोग राशन की दुकान पर अनाज के बदले भुगतान करने के लिए ही किया जा सकता है.
आय सीमा बढ़ने से क्या दिल्ली के मध्यम वर्ग को भी राशन कार्ड मिल सकेगा?
नहीं, यह मध्यम वर्ग के लिए नहीं बल्कि निम्न-आय वर्ग और श्रमिकों के लिए है. दिल्ली में बढ़ती महंगाई, किराया और पढ़ाई के खर्च को देखते हुए ₹1.20 लाख की सीमा बहुत कम थी, जिसमें एक रेहड़ी-पटरी वाला या फैक्ट्री मजदूर भी पात्रता से बाहर हो जाता था. ₹2.50 लाख की नई सीमा से केवल वही गरीब और जरूरतमंद परिवार जुड़ेंगे जो न्यूनतम मजदूरी पर गुजर-बसर कर रहे हैं.
क्या गेहूं-चावल के अलावा राशन दुकान से मिलने वाली अन्य चीजों पर भी यह नियम लागू होगा?
सरकार ने इसके साफ संकेत दिए हैं. शुरुआती चरण में इसे गेहूं और चावल की सब्सिडी के लिए लागू किया जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के परिवारों को मिलने वाली 1 किलो चीनी की वितरण प्रणाली को भी इसी डिजिटल करेंसी (CBDC) मोड में ट्रांसफर कर दिया जाएगा, ताकि पूरी राशन व्यवस्था पारदर्शी हो सके.
